Adolf Hitler Biography In Hindi – एडोल्फ हिटलर की जीवनी

नमस्कार मित्रो आज के हमारे लेख में आपका स्वागत है ,आज हम Adolf Hitler Biography In Hindi में जर्मनी को शक्तिशाली साम्राज्य के रूप में स्थापित करने वाले एडोल्फ हिटलर का जीवन परिचय देने वाले है।

एडोल्फ हिटलर का नाम जर्मनी के इतिहास में ही नहीं, विश्व के इतिहास में अजर-अमर हो चुका है। जर्मनी को सबसे शक्तिशाली साम्राज्य बनाने का सम्पूर्ण श्रेय हिटलर को जाता है । जर्मनी के स्वाभिमान की रक्षा के लिए हिटलर का उत्कर्ष हुआ था । हिटलर का जीवन कठिनाइयों और करुण कहानियों से भरा पड़ा था । उसने कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करते हुए समस्त विश्व के सामने यह आदर्श रखा था की किसी भी कठिन-से-कठिन कार्य भी परिश्रम, साहस और दृढ़संकल्प से पूर्ण हो सकते हैं । आज हम hitler’s childhood ,adolf hitler’s daughter और jean-marie loret की सभी बातो से परहेज़ कराने वाले है। 

हिटलर का इतिहास देखा जाये तो वह एक कुशल वक्ता, बुद्धिमान राजनीतिज्ञ था । हिटलर का उदय बहुत ही काम वक्त में नहीं हुआ था उन्होंने बहुत मेहनत के दम पे अपना शाशन स्थापित किया था। जनता ने उस पर विश्वास करके नाजीवाद का समर्थन किया था । नाजीवाद के द्वारा हिटलर ने जर्मनी के अस्तित्व की रक्षा की थी । जर्मनी के आर्थिक विघटन, अपमानजनक वर्साई की सन्धि की शर्तें तथा रूसी क्रान्ति का प्रभाव जर्मनी में हिटलर के उत्कर्ष का कारण बनी । द्वितीय विश्वयुद्ध में हिटलर की असाधारण सफलता तथा बेल्जियम, हालैंड एवं फ्रांस के पतन के पश्चात् ब्रिटेन की स्थिति अत्यन्त नाजुक हो गयी, ब्रिटेन ने समझौतावादी दृष्टिकोण की नीति अपनायी थी ।

 नाम  एडोल्फ हिटलर
 जन्म  20 अप्रैल 1889
 जन्म स्थान  ऑस्ट्रिया
 पिता  एलोईस हिटलर
 माता  क्लारा हिटलर
 पत्त्नी  ईवा ब्राउन
 भाई  बहन-गस्तव, इदा
 राष्टीयता  जर्मनी
 राजनीतिक विचारधारा  नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी (1921 – 1945)
 उपलब्धि  एक जर्मन शासक थे वे “राष्ट्रीय समाजवादी जर्मन कामगार  पार्टी” (NSDAP) के नेता थे
 मृत्यु  30 अप्रैल 1945
 मृत्यु का कारण  आत्महत्या की थी

Adolf Hitler Biography In Hindi –

अडोल्फ हिटलर का जन्म आस्ट्रिया में 20 अप्रैल 1889 को हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा लिंज नामक स्थान पर हुई। पिता की मृत्यु के पश्चात् 17 वर्ष की अवस्था में वे वियना गए। कला विद्यालय में प्रविष्ट होने में असफल होकर वे पोस्टकार्डों पर चित्र बनाकर अपना निर्वाह करने लगे। इसी समय से वे साम्यवादियों और यहूदियों से घृणा करने लगे।जब प्रथम विश्वयुद्ध प्रारंभ हुआ तो वे सेना में भर्ती हो गए और फ्रांस में कई लड़ाइयों में उन्होंने भाग लिया। 1918 ई. में युद्ध में घायल होने के कारण वे अस्पताल में रहे। जर्मनी की पराजय का उनको बहुत दु:ख हुआ।

मई 1895 में जब Adolf Hitler अडोल्फ़ हिटलर छ: वर्ष के हुए तब उन्हें गाँव की स्कूल में दाखिला दिलाया गया | अब उसके पिता भी ऑस्ट्रियन सिविल सेवाओ से सेवानिवृत हो चुके थे | अब स्कूल में उन्हें टीचर्स अनुशाशन से रखते थे और वापस घर आने पर पिताजी सख्त रुख अपनाते थे | पिताजी के सख्त रुख से परेशान होकर एक बार अडोल्फ़ हिटलर घर से भाग गया था लेकिन बाद में वापस आ गया | अब उनके पिता ने बैचैन होकर शहर छोड़ने का फैसला किया और ऑस्ट्रिया के लम्बच शहर में आकर बस गये | लम्ब्च में एक पुरानी कैथोलिक चर्च था जहा अडोल्फ़ रोज स्कूल के बाद खेलने जाता था  एडोल्फ हिटलर। 

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एडोल्फ हिटलर की जीवनी –

उस चर्च में पत्थरों और लकडियो से बने स्वस्तिक चिन्ह को अक्सर देखा करता था | अब वो अक्सर चर्च में जाकर गाने गता था और उसने पादरी बनने की ठान ली थी | तभी 1898 में उनका परिवार हमेशा के लिए वापस अपने पैतृक गाँव लेओंडिंग आ गया | 1900 में अडोल्फ़ हिटलर के छोटे भाई एडमंड की चेचक की वजह से मौत हो गयी जिससे अडोल्फ़ हिटलर को गहरा सदमा पहुचा | अब उसका आत्मविश्वास टूट गया था और वो अक्सर उदास रहने लग गया था | 3 जनवरी 1903 को अचानक Adolf Hitler अडोल्फ़ हिटलर के पिता अलोइस की मौत हो गयी |

अब Adolf Hitler का स्कूल में प्रदर्शन अच्छा नही रहा और उनकी माँ ने स्कूल छुडवाकर Realschule में दाखिला दिलाया जहा उनके प्रदर्शन में सुधार हुआ | 1918 में जर्मनी की पराजय के बाद 1919 में हिटलर ने सेना छोड़ दी व नेशनल सोशलिस्टिक आर्बिटर पार्टी (नाजी पार्टी) का गठन कर डाला था। इसका उद्देश्य साम्यवादियों और यहूदियों से सब अधिकार छीनना था क्योंकि उनकी घोषित मान्यता थी कि साम्यवादियों व यहूदियों के कारण ही जर्मनी की हार हुई।  

जर्मनी की हार को लेकर हिटलर के अंदर जो नफरत की भावना थी, वो हज़ारों जर्मन वासियों की भावना से मेल खाती थी. यही वजह है कि नाजी पार्टी के सदस्यों में देशप्रेम कूट-कूटकर भरा था। उन्होंने स्वास्तिक को अपने दल का चिह्र बनाया जो कि हिन्दुओं का शुभ चिह्र है. समाचारपत्रों के द्वारा हिटलर ने अपने दल के सिद्धांतों का प्रचार जनता में किया। भूरे रंग की पोशाक पहने सैनिकों की टुकड़ी तैयार की गई. 1923 ई. में हिटलर ने जर्मन सरकार को उखाड़ फेंकने का प्रयत्न किया लेकिन इसमे वह कामयाब नहीं हो पाए. 20 फरवरी, 1924 को हिटलर पर “राष्ट्रद्रोह” का मुकदमा चलाया गया और पांच साल के कैद की सजा सुनाई गई। 

इस दल ने यहूदियों को प्रथम विश्वयुद्ध की हार के लिए दोषी ठहराया। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण जब नाजी दल के नेता हिटलर ने अपने ओजस्वी भाषणों में उसे ठीक करने का आश्वासन दिया तो अनेक जर्मन इस दल के सदस्य हो गए। हिटलर ने भूमिसुधार करने, वर्साई संधि को समाप्त करने और एक विशाल जर्मन साम्राज्य की स्थापना का लक्ष्य जनता के सामने रखा जिससे जर्मन लोग सुख से रह सकें। 1933 में चांसलर बनते ही हिटलर ने जर्मन संसद को भंग कर दिया, साम्यवादी दल को गैरकानूनी घोषित कर दिया और राष्ट्र को स्वावलंबी बनने के लिए ललकारा। हिटलर ने जोज़ेफ गोयबल्स को अपना प्रचारमंत्री नियुक्त किया।

नाज़ी दल के विरोधी व्यक्तियों को जेलखानों में डाल दिया गया। कार्यकारिणी और कानून बनाने की सारी शक्तियाँ हिटलर ने अपने हाथों में ले ली। 1934 में उसने अपने को सर्वोच्च न्यायाधीश घोषित कर दिया। उसी वर्ष हिंडनबर्ग की मृत्यु के पश्चात् वो राष्ट्रपति भी बन बैठा। नाजी दल का आतंक जनजीवन के प्रत्येक क्षेत्र में छा गया। 1933 से 1938 तक लाखों यहूदियों की हत्या कर दी गई। 1933 में जर्मनी की सत्ता पर जब एडोल्फ हिटलर काबिज हुआ था तो उसने वहां एक नस्लवादी साम्राज्य की स्थापना की थी।

उसके साम्राज्य में यहूदियों को सब-ह्यूमन करार दिया गया और उन्हें इंसानी नस्ल का हिस्सा नहीं माना गया। यहूदियों के प्रति हिटलर की इस नफरत का नतीजा नरसंहार के रूप में सामने आया, यानी समूचे यहूदियों को जड़ से खत्म करने की सोची-समझी और योजनाबद्ध कोशिश। होलोकास्ट इतिहास का वो नरसंहार था, जिसमें छह साल में तकरीबन 60 लाख यहूदियों की हत्या कर दी गई थी। इनमें 15 लाख तो सिर्फ बच्चे थे।

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हिटलर की राजनीतिक शुरुआत –

युद्ध समाप्त होने के बाद सन 1919 की गर्मियों में हिटलर को एक साहसिक सैनिक जिनका नाम ‘एर्न्स्ट रोएह्म’ था और वे वहाँ फ़ौजी थे, की मदद से म्युनिक में सेना में एक राजनीतिक अधिकारी के रूप में रोजगार मिला, और यहीं से इनके राजनीतिक कैरियर की शुरुआत हुई। सितम्बर सन 1919 में हिटलर ने तथाकथित जर्मन वर्कर्स पार्टी, राष्ट्रवादी, विरोधी सेमेटिक और समाजवादी समूह की बैठक में भाग लिया. उन्होंने जल्द ही इस पार्टी के सबसे लोकप्रिय, प्रभावशाली वक्ता और प्रचारक के रूप में खुद को प्रतिष्ठित किया था। 

 सन 1921 से कुछ 6 हजार नाटकीय रूप से अपनी सदस्यता बढ़ाने में लग गए. उसी साल अप्रैल में वे राष्ट्रीय सामाजिक जर्मन वर्कर्स पार्टी के नेता बन गए, इस पार्टी का ओफिसिअली नाम नाज़ी पार्टी था। हिटलर ने बाद के वर्षों में खराब आर्थिक स्तिथि को हटाकर पार्टी में तेजी से विकास के लिए योगदान दिया. सन 1923 के अंत में एडोल्फ हिटलर बवेरियन और जर्मन राजनीती में एक मजबूत ताकत के रूप में कुछ 56 हजार सदस्यों, कई और समर्थकों के साथ सामने आये। 

हिटलर ने बर्लिन सरकार की खुद की पराजय के लिए और संकट की स्थिति का उपयोग करने के लिए आशा व्यक्त की. इस उद्देश्य के लिए उन्होंने नवंबर 8-9 सन 1923 के नाज़ी बीयर हॉल क्रांति का मंचन किया, जिसके द्वारा उन्होंने रूढ़िवादी – राष्ट्रवादी बवेरियन सरकार को “बर्लिन पर मार्च” में उनका सहयोग करने के लिए मजबूर किया. हालांकि यह कोशिश नाकामियाब रहीं थी। 

एडोल्फ हिटलर ने देशद्रोह करने की भी कोशिश की, और इसके लिए उन्हें लैंडस्बर्ग के पुराने किले में एक साल के कारावास की बजाय हल्की सजा दी गई. कुछ समय पश्चात उन्हें रिहा कर दिया गया। अपनी रिहाई के बाद हिटलर ने ईमानदार फ़ॉल्लोवर के एक समूह के आसपास ही पार्टी का पुनर्गठन किया जोकि नाजी आन्दोलन और राज्य का केंद्र बने रहने के लिए था. उन्होंने कई सारे राज्यों को अपनी तरफ कर लिया, इस तरह उनकी ताकत बढ़ती चली गई और उनका राजनीतिक कैरियर चलता रहा था। 

एडॉल्फ हिटलर –

1923 में जर्मन सरकार को गिराने के एक असफल प्रयास के बाद, 1933 में जर्मनी के नेता बना। उसने लोकतंत्र को समाप्त कर दिया और दुनिया के लिए एक कट्टरपंथी जातिवादी प्रेरित नजरिये के संशोधन को बढ़ावा देना शुरू किया। इससे फ्रांस और ब्रिटेन चिंतित हो गए, क्योंकि पिछले युद्ध में वे बहुत कुछ हार चुके थे, साथ ही इटली भी, जिसे अपनी क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को जर्मनी के द्वारा खतरा महसूस होने लगा था। अपने गठबंधन को सुरक्षित करने के लिए फ्रांस ने इटली को इथियोपिया, जिस पर वो विजय पाना चाहता था। 

में खुली छूट दे दी.1935 के शुरू में यह स्थिति बहुत बिगड़ गई जब सारलैंड कानूनी रूप से जर्मनी के साथ फिर से मिल गया। हिटलर ने वर्साय संधि को अस्वीकार कर दिया, हथियारबंदी भी तेजी से बढने लगी और सेना में जबरी भर्ती की शुरुआत कर दी। जर्मनी को रोकने की मंशा से, ब्रिटेन, फ्रांस और इटली ने स्ट्रीसा मोर्चा बनाया। पूर्वी यूरोप के विशाल क्षेत्रों को हथियाने के जर्मनी के लक्ष्य के कारण सोवियत संघ चिंतित था, इसलिए उसने फ्रांस के साथ पारस्परिक सहायता की एक संधि की थी। 

हालांकि, इस फ्रेंको-सोवियत संधि को प्रभाव लेने से पहले[लीग ऑफ नेशंस की नौकरशाही के माध्यम से जाना अनिवार्य था, इसलिए ये बिना किसी प्रभाव की होकर रह गयी। जून 1935 में, यूनाइटेड किंगडम ने जर्मनी के साथ एक स्वतंत्र नौसेना करार किया और पूर्व के प्रतिबंधों में ढील दे दी। यूरोप और एशिया की घटनाओं के कारण चिंतित संयुक्त राज्य अमेरिका ने अगस्त में तटस्थता अधिनियम पारित किया था। अक्टूबर में, इटली ने इथोपिया पर आक्रमण किया, जर्मनी अकेला ऐसा प्रमुख यूरोपीय देश था। 

जिसने इस आक्रमण में उसका समर्थन किया। इटली ने जर्मनी के ऑस्ट्रिया को एक अनुचर राज्य बनाने के उद्देश्य से आपत्तियों को हटा लिया था। वर्साय तथा लोकार्नो संधियों के सीधे उल्लंघन में, हिटलर ने मार्च 1936 में राइनलैंड को पुनः हथियारबंद कर दिया। उसे अन्य यूरोपीय शक्तियों से नाममात्र ही प्रतिसाद प्राप्त हुआ। जब जुलाई में स्पेनी गृहयुद्ध प्रारंभ हुआ, हिटलर और मुसोलिनी ने गृह युद्ध में सोवियत समर्थित स्पेन के गणराज्य के ख़िलाफ़ फ़ासिस्ट जनरलिज़्मों फ्रांसिस्को फ्रेंको की राष्ट्रवादी ताकतों का समर्थन किया था। 

दोनों पक्षों ने नए हथियारों और युद्ध के तरीकों का परीक्षण करने के लिए संघर्ष का इस्तेमाल किया और 1939 के शुरुआत में ही राष्ट्रवादी विजयी साबित हो गए। बढ़ते तनाव के साथ, शक्ति को संगठित और सुदृढ़ करने के प्रयास होने लगे। अक्टूबर में, जर्मनी और इटली ने रोम-बर्लिन धुरीबनाई और एक महीने के बाद जर्मनी और जापान, दोनों ने इस विश्वास के साथ की साम्यवाद और विशेष रूप से सोवियत संघ से खतरा है। 

कोमिन्तर्न विरोधी संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसमें इटली आने वाले साल में शामिल हो गया। चीन में, कुओमिन्तांग और साम्यवादी शक्तियां जापान का विरोध करने के लिए एक संयुक्त मोर्चा पेश करने के इरादे से युद्धविराम पर सहमत हो गयीं।

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हिटलर ने नाज़ीवाद प्रारंभ किया –

एक राजनीतिक विचारधारा जिसे जर्मनी के तानाशाह Adolf Hitler ने प्रारंभ किया था। हिटलर का मानना था कि जर्मन आर्य है और विश्व में सर्वश्रेष्ठ हैं। इसलिए उनको सारी दुनिया पर राज्य करने का अधिकार है। नाजी का अर्थ ही ही तानाशाह कहाजाता था अपने तानाशाहीपूर्ण आचरण से उसने विश्व को द्वितीय विश्व युद्ध में झोंक दिया था। १९४५ में हिटलर के मरने के साथ ही नाज़ीवाद का अंत हो गया परन्तु ‘नाज़ीवाद’ और ‘हिटलर होना’ मानवीय क्रूरता के पर्याय बन कर आज भी भटक रहे है।

प्रथम विश्व युद्ध प्रारंभ होने पर वह सेना में भरती हो गया। वीरता के लिए उसे आर्यन क्रास से सम्मानित किया गया। युद्ध समाप्त होने पर वह एक दल जर्मन लेबर पार्टी में सम्मिलित हो गया जिसमें मात्र २०-२५ लोग थे। हिटलर के भाषणों से अल्प अवधि में ही उसके सदस्यों की संख्या हजारों में पहुँच गई। पार्टी का नया नाम रखा गया ‘नेशनल सोशलिस्ट जर्मन लेबर पार्टी’। जर्मन में इसका संक्षेप में नाम है ‘नाज़ी पार्टी’। हिटलर द्वारा प्रतिपादित इसके सिद्धांत ही नाज़ीवाद कहलाते हैं।

Adolf Hitler ने जर्मन सरकार के विरुद्ध विद्रोह का प्रयास किया। उसे बंदी बना लिया गया और ५ वर्ष की जेल हुई। जेल में उसने अपनी आत्म कथा ‘मेरा संघर्ष’ लिखी। इस पुस्तक में उसके विचार दिए हुए हैं। इस पुस्तक की लाखों प्रतियाँ शीघ्र बिक गईं जिससे उसे बहुत ख्याति मिली। उसकी नाज़ी पार्टी को पहले तो चुनावों में कम सीटें मिलीं परन्तु1933 तक उसने जर्मनी की सत्ता पर पूरा अधिकार का लिया और एक छत्र तानाशाह बन गया।

उसने अपने आसपास के देशों पर कब्जे करने शूरू कर दिए जिससे दूसरा विश्व युद्ध प्राम्भ हो गया। वह यहूदियों से बहुत घृणा करता था। उसने उन पर बहुत अत्याचार किये, कमरों में ठूँसकर विषैली गैस से हजारों लोग मार दिए गए। 6 वर्षों के युद्ध के बाद वह हार गया और उसने अपनी प्रेमिका, जिसके साथ उसने एक-दो दिन पहले ही विवाह किया था। 

विश्व युद्ध में भारत की प्रतिक्रिया –

  • युद्ध में भारतीयों का सहयोग प्राप्त करने के उद्देश्य से 8 अगस्त 1940 को वायसराय लिनलिथगो ने एक घोषणा की, जिसे अगस्त प्रस्ताव के नाम से जाना जाता है।
  • अगस्त प्रस्ताव प्रस्ताव में निम्न प्रावधान थे
  • भारत के लिये डोमिनियन स्टेट्स मुख्य लक्ष्य।
  • भारतीयों को सम्मिलित कर युद्ध सलाहकार परिषद की स्थापना।
  • वायसराय की कार्यकारिणी परिषद का विस्तार।

युद्ध के पश्चात् संविधान सभा का गठन किया जायेगा, जिसमें मुख्यतया भारतीय अपने सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक धारणाओं के अनुरूप संविधान के निर्माण की रूपरेखा सुनिश्चित करेंगे। संविधान ऐसा होगा कि रक्षा, अल्पसंख्यकों के हित, राज्यों से संधियां तथा अखिल भारतीय सेवायें इत्यादि मुद्दों पर भारतीयों के अधिकार का पूर्ण ध्यान रखा जायेगा। अल्पसंख्यकों को आश्वस्त किया गया कि सरकार ऐसी किसी संस्था को शासन नहीं सोपेगी, जिसके विरुद्ध सशक्त मत हो। उक्त आधारों पर भारतीय सरकार को सहयोग प्रदान करेंगे।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया –

कांग्रेस ने अगस्त प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया। नेहरूजी ने कहा “डोमिनियन स्टेट्स का मुद्दा पहले ही अप्रासंगिक हो चुका है”। गांधीजी ने घोषणा की- “अगस्त प्रस्तावों के रूप में सरकार ने जो घोषणायें की हैं, उनसे राष्ट्रवादियो तथा उपनिवेशी सरकार के बीच खाई और चौड़ी होगी।“

मुस्लिम लीग की प्रतिक्रिया –

यद्यपि मुस्लिम लीग ने प्रस्ताव में अल्पसंख्यकों के संबंध में दिये गये आश्वासन का स्वागत किया, किन्तु प्रस्ताव में पाकिस्तान की मांग स्पष्ट रूप से स्वीकार न किये जाने के कारण उसने भी प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। लीग ने घोषणा की कि भारत का विभाजन ही गतिरोध के हल का एकमात्र उपाय है।

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Adolf Hitler Death (हिटलर और उनकी गर्लफैंड की मृत्यु)

30 अप्रैल, 1945 को रूसी सेना जर्मनी की राजधानी बर्लिन में बंकर में स्थित एडोल्फ हिटलर के अंडरग्राउंड कमांड सेंटर के पास पहुंच गई थी. इस वक्त तक एडोल्फ हिटलर यह समझ गया था कि उसके हजारों साल तक चलने वाले साम्राज्य का सपना अब टूट गया है। इसी दिन दोपहर को हिटलर ने अपने निजी क्वार्टर में अपनी गर्लफैंड और बाद में पत्नी बनी एफा ब्राउन के साथ मरने की योजना बना ली थी. यहां उन दोनों ने साइनाइड कैप्सूल खाया और खुद को गोली मार ली। 

इन दोनों की बॉडी दोपहर करीब 3:15 बजे तक मिली. इतना ही नहीं हिटलर ने अपने पीछे यह निर्देश भी छोड़े थे कि कैसे उसकी और एफा की बॉडी का निपटान किया जाए। इन निर्देशों में कहा गया था कि दोनों के मृत शरीर को बंकर के बाहर ले जाकर जला दिया जाए. करीब 5 मई तक सोवियत संघ की सेना हिटलर के जले हुए शरीर की पहचान नहीं कर सकी थी। 

Adolf Hitler Biography Video –

एडोल्फ हिटलर के रोचक तथ्य –

  • वस्तुत: हिटलर जर्मनी को विश्व का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाना चाहता था। इसलिये उसने अपनी विदेश नीति के लिये निम्नलिखित उद्देश्य अपनाए वर्साय की संधि का उल्लंघन करना। इस संधि के प्रावधान जर्मनी के लिये अपमानजनक थे तथा उस पर आरोपित किये गए थे। अखिल जर्मन साम्राज्य की स्थापना करना। इसके लिये वह विश्व में समस्त जर्मन जातियों को एकसूत्र में संगठित करना चाहता था।
  • हिटलर का भाषण इतना जबरदस्त था की साम्यवाद के प्रसार को रोकना चाहा था ।
  • अपनी विदेश नीति की अभिव्यक्ति तथा उसे अमलीजामा पहनाने के लिये कई आक्रामक कदम उठाए, जो अंतत: द्वितीय विश्व युद्ध का कारण बनी, जैसे 
  • 1933 में राष्ट्र संघ से अलग होना।
  • 1935 में राइनलैंड का सैन्यीकरण करना।
  • 1936 में रोम-बर्लिन धुरी का निर्माण करना जिसमें जापान के शामिल होने पर यह रोम-बर्लिन-टोकियो धुरी बन गया। यह साम्यवाद विरोधी गुट था।
  • Adolf Hitler ने 1938 में ऑस्ट्रिया पर हमला तथा बाद में चेकोस्लोवाकिया पर नियत्रंण।
  • 1 सितंबर, 1939 को पोलैंड पर आक्रमण जिससे द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत हुई।

Adolf Hitler Questions –

1 .हिटलर की मृत्यु कब हुई ?

30 अप्रैल 1945 के दिन हिटलर की मौत हुई थी। 

2 .एडोल्फ हिटलर का जन्म कहां हुआ था ?

ऑस्ट्रिया में 20 अप्रैल 1889 के दिन एडोल्फ हिटलर का जन्म हुआ था। 

3 .हिटलर की मौत कैसे हुई ?

30 अप्रैल 1945 को जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर ने  ख़ुदकुशी यानि आत्महत्या करदी थी। 

4 .हिटलर का पूरा नाम क्या था ?

Adolf Hitler का पूरा नाम  एडोल्फ हिटलर था। 

5 .हिटलर का जन्म किस देश में हुआ था ?

ऑस्ट्रिया में हिटलर का जन्म हुआ था। 

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निष्कर्ष – 

दोस्तों आशा करता हु आपको मेरा यह आर्टिकल Adolf Hitler Biography In Hindi आपको बहुत अच्छी तरह से समज आ गया होगा और पसंद भी आया होगा । इस लेख के जरिये हमने führerbunker और hitler’s rise to power essay से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दे दी है अगर आपको इस तरह के अन्य व्यक्ति के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है तो आप हमें कमेंट करके जरूर बता सकते है। और हमारे इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे। जय हिन्द ।

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