Alauddin Khilji Biography In Hindi – अलाउद्दीन खिलजी की जीवनी

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नमस्कार मित्रो आपका स्वागत है। आज के हमारे लेख में हम Alauddin Khilji Biography In Hindi, में महान और शक्तिशाली योद्धा अलाउद्दीन खिलजी का जीवन परिचय बताने वाले है। 

1250 में लकनौथी बंगाल में जन्मे अलाउद्दीन खिलजी के पिता का नाम शाहिबुद्दीन मसूद था। और उनका दूसरा नाम जुना मोहम्मद खिलजी था। आज की पोस्ट में alauddin khilji wife, alauddin khilji father और alauddin khilji death reason की माहिती देने वाले है। अलाउद्दीन खिलजी की बाजार नियंत्रण व्यवस्था बहुत ही लाजवाब हुआ करती थी। 

अलाउद्दीन खिलजी की पत्नी कमला देवी थी। वह खिलजी वंश के पहले सुल्तान जलालुद्दीन फिरुज खिलजी के भाई थे।  उन्हें बचपन में अच्छी शिक्षा नहीं मिली लेकिन अलाउद्दीन खिलजी के सैन्य सुधर की वजह से  महान और शक्तिशाली योद्धा बनके के उभर आये थे। आज हम अलाउद्दीन खिलजी के सुधारों का वर्णन भी करने वाले है। तो  चलए ले चलते है। 

Alauddin Khilji Biography In Hindi –

 नाम

 अलाउद्दीन खिलजी

 जन्म

 1250 AD 

 जन्म स्थान 

  लकनौथी ( बंगाल )

 पिता

 शाहिबुद्दीन मसूद

 पत्नी

 कमला देवी

 भाई

 अलमास बेग , कुतलुग टिगीन और मुहम्म

 चाचा

 जलालुद्दीन फिरुज खिलजी

 बच्चे

कुतिबुद्दीन मुबारक शाह , शाहिबुद्दीन ओमर

 धर्म

मुस्लिम

 शौक

घुडसवारी , तलवारबाजी , तैरना

 

 मृत्यु

 4 जनवरी 1316 

 मुत्यु स्थान 

  दिल्ली , भारत

alauddin khilji tomb

  क़ुतुब परिसर , दिल्ली

अलाउद्दीन खिलजी का जन्म और बचपन  –

1250 में अलाउद्दीन खिलजी का जन्म  लकनौथी बंगाल में हुआ था , उनका ओरिजनल नाम जुना मोहम्मद खिलजी था।  वे खिलजी वंश के पहले सुल्तान जलालुद्दीन फिरुज खिलजी के भाई थे। उनको बचपन से ही अच्छी शिक्षा नहीं मिली थी।  लेकिन फिरभी  एक शक्तिशाली और महत्वकांशी शासक योद्धा साबित हुए है। जो खिलजी वंश के दुसरे शासक थे। उन्होंने राजगद्दी अपने चाचा जलालुद्दीन फिरुज खिलजी को मारकर अपने नाम कर ली थी। 

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अलाउद्दीन खिलजी का साम्राज्य –

अपने वंश की विरासत को आगे बढ़ाते हुए , भारत वर्ष में अपना साम्राज्य फैलाते रहे। अलाउद्दीन खिलजीको सिकंदर-आई-सनी का ख़िताब दिया गया था। उसको अपने आपको “दूसरा अलेक्जेंडर“ बुलवाना पसंद था। उन्होंने शराब की खुलेआम बिक्री को अपने राज्य में बंद करवा दी थी। वो पहले मुस्लिम शासक थे जिन्होंने दक्षिण भारत में अपना साम्राज्य फैलाया था। 

अलाउद्दीन खिलजी का इतिहास देखा जाये तो उनका जूनून ही उन्हें जीत दिलवाता था। धीरे धीरे उनका प्रभाव दक्षिण भारत में बढ़ता गया और साम्राज्य का विस्तार बढ़ता गया। खिलजी के वफादारो की संख्या बढती गयी इसके साथ साथ उसकी ताकत भी बढती गयी। अलाउद्दीन के सबसे अधिक वफादार जनरल मलिक काफूर और खुश्रव खान थे। 

अलाउद्दीन खिलजी और मंगोल –

खिलजी का दक्षिण भारत में आतंक बढ़ता गया और सभी राज्यों में आतंक चलने लगा था। उनसे जो भी शासक हार जाते थे उनसे वे कर के रूप में धन लेते थे। दिल्ली की सल्तनत को मंगोल आक्रमणकारियों से बचाने में भी उनका पूरा ध्यान रहता था। अलाउद्दीन खिलजी और मंगोल कई वक्त युद्ध में भीड़ चुके थे और उन्होंने सेंट्रल एशिया पर कब्ज़ा मंगोल की विशाल सेना को हराकर किया था। 

वह आज अफगानिस्थान के नाम से जाना जाता है। उन्होंने मंगोल की सेना को कई बार हराया इसलिए उनका नाम इतिहास के पन्नो पर लिखा हुआ है। खिलजी ए दुनिया के सबसे बेशकीमती कोहिनूर हीरे को वारंगल के काकतीय शासको पर हमला करके हथिया लिया था। वो एक महान सैन्य कमांडर और रणनीतिकार थे , अलाउद्दीन को सबसे पहले सुल्तान जलालुद्दीन फिरुज के दरबार में आमिर-आई-तुजुक बनाया गया। 

अलाउद्दीन खिलजी बना दिल्ही सुल्तान – 

मालिक छज्जू ने 1291 में सुल्तान के राज्य में विद्रोह किया और अलाउद्दीन खिलजी ने इस समस्या को बहुत ही अच्छे ढंग से सम्भाला। उसे कारा का राज्यपाल बना दिया गया। सुल्तान ने 1292 में भिलसा के जीत के बाद खिलजी को अवध प्रान्त भी दे दिया। परन्तु सुल्तान के साथ खिलजी ने विश्वासघात करके उन्हें मार डाला और दिल्ली के सुल्तान बन बैठ गए। 

उन्हें दो सालो तक विद्रोह का काफी सामना करना पड़ा क्योंकि वे अपने चाचा को मारकर गद्दी पर बैठे थे। परन्तु अलाउद्दीन ने इस समस्या का निवारण पूरी ताकत के साथ किया था। मंगोल 1296 से 1308 के बीच अलग अलग शासको द्वारा दिल्ली पर अपना कब्ज़ा करने के हमला करते रहे। मंगोलियो के खिलाफ अलाउद्दीन खिलजी ने जालंधर ( 1296 ) किली ( 1299 ) अमरोहा ( 1305 ) एवं रवि ( 1306 ) की लड़ाई में सफलता प्राप्त की थी। 

काफी सारे मंगोलों को दिल्ली के पास ही बसना पड़ा और इस्लाम धर्म भी अपनाना पड़ा और इनको नए मुसलमान के कहा गया। अलाउद्दीन को ये विश्वास नहीं होने के कारण वो इसे मंगोलियो की साजिश समझ रहा था। इसी डर से अपने साम्राज्य को बचाने के चक्कर में खिलजी ने उन सारे मंगोलियो जो 30 हजार की तादाद में थे , 1298 में एक दिन उन सभी को मारकर उनकी पत्नी और बच्चो को अपना गुलाम बना दिया।

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गुजरात पर आक्रमण – Alauddin Khilji

गुजरात में अलाउद्दीन को पहली जीत 1299 में मिली थी।  गुजरात में विजय पाने के उपरांत यहाँ के राजा ने अपने 2 बड़े जनरल नुसरत खान और उलुघ खान को अलाउद्दीन खिलजी के समस्त प्रकट किया। खिलजी के मुख्य वफादार जनरल मलिक काफूर बन गये।

रणथम्भोर पर आक्रमण – 

अलाउद्दीन ने 1303 में रणथम्भोर के राजपुताना किले में पहली बार हमला किया जिसमे वह असफल रहा था।  उसके बाद जब उसने वापिस रणथम्भोर पर हमला किया तो उनका सामना हम्मीर देव से हुआ जो की उस युद्ध में लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। और फिर खिलजी ने रणथम्भोर पर कब्ज़ा कर लिया। 

चित्तोड़ पर आक्रमण – Alauddin Khilji

अलाउद्दीन खिलजी ने 1303 में अपनी सेना भेजी , परन्तु उनकी सेना काकतीय शासक से हार गई।  चितोड पर रावल रतन सिंह का राज्य था , 1303 में खिलजी ने चित्तोड़ पर हमला किया था। महारानी पद्मावती ( पद्मिनी ) रावल रतन सिंह की पत्नी थी और अलाउद्दीन को पद्मावती ( पद्मिनी ) पाने की चाह में खिलजी के यहाँ हमला किया था। 

उसमे अलाउद्दीन खिलजी की विजय तो हुई पर महारानी पद्मावती ( पद्मिनी ) ने जौहर कर लिया था। मेवाड़ के सिवाना किले पर 1308 में अलाउद्दीन खिलजी के जनरल मलिक कमालुद्दीन ने किया।  परन्तु पहली बार मेवाड़ के आगे अलाउद्दीन की सेना हार गयी और दूसरी बार उसे सफलता मिली थी। 

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बंग्लाना पर आक्रमण –

अलाउद्दीन ने 1306 में बंग्लाना पर हमला किया वह एक बड़ा राज्य था। और राय करण का शासन था।  बंग्लाना पर हमला करने पर खिलजी को सफलता मिली और राय करण की बेटी को दिल्ली लाकर खिलजी के बड़े बेटे विवाह कर लिया। देवगिरी में 1307 को खिलजी ने अपने वफादार काफूर को कर लेने के लिए भेजा। अलाउद्दीन खिलजी ने 1308 में अपने मुख्य घाजी मलिक के साथ अन्य आदमी कंधार , घजनी और काबुल को मंगोल के राज्य अफगानिस्तान भेजा और घाजी ने मंगोलों ऐसा कुचला की वे फिर भारत पर आक्रमण करने की हिम्मत नहीं जूटा पाए। 

होयसल साम्राज्य पर आक्रमण – Alauddin Khilji

होयसल साम्राज्य कृष्णा नदी के दक्षिण में स्थित था। उस पर 1310 में अलाउद्दीन ने आसानी से सफलता प्राप्त कर ली।  वहा के शासक वीरा ब्ल्लाला ने बिना युद्ध किये ही आत्मसमर्पण कर वार्षिक आय देने को राजी हो गये। मलिक काफूर के कहने पर मबार इलाके में 1311 में अलाउद्दीन खिलजी की फौज ने छापा मारा। परन्तु वहा के तमिल शासक विक्रम पंड्या के सामने उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालाँकि भारी धन और सल्तनत लुटने में काफूर कामयाब रहे थे। 

किसानो का कर्ज माफ़ लिया –

दक्षिण भारत के सभी प्रदेश प्रतिवर्ष भारी करो का भुगतान किया करते थे और उतर भारतीय राज्य प्रत्यक्ष सुल्तान शाही के नियम के तहत नियंत्रित किये गये। इससे अलाउद्दीन खिलजी के पास अपार पैसा हो गया और कृषि उपज पर 50% कर माफ़ कर दिया जिससे किसानो पर बोझ कम हो गया और वे कर के रूप अपनी भूमि किसी को भी देने के लिए बाध्य नहीं रहे। 

गुजरात के राजपूत राजा की पत्नी कमला देवी

Alauddin Khilji – 1299 में ख‌िलजी की सेनाओं ने गुजरात पर बड़ा हमला किया था। इस हमले में गुजरात के वाघेला राजपूत राजा कर्ण वाघेला (जिन्हें कर्णदेव और राय कर्ण भी कहा गया है) की बुरी हार हुई थी। इस हार में कर्ण ने अपने साम्राज्य और संपत्तियों के अलावा अपनी पत्नी को भी गंवा दिया था। तुर्कों की गुजरात विजय से वाघेला राजवंश का अंत हो गया था और गुजरात के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ा था। कर्ण की पत्नी कमला देवी से अलाउद्दीन ख‌िलजी ने विवाह कर लिया था। गुजरात के प्रसिद्ध इतिहासकार मकरंद मेहता कहते हैं, “ख‌िलजी के कमला देवी से विवाह करने के साक्ष्य मिलते हैं। “

मकरंद मेहता की पद्मनाभ किताब –

मकरंद मेहता कहते हैं, “पद्मनाभ” ने 1455-1456 में कान्हणदे प्रबंध लिखी थी, जो ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित थी। इसमें भी राजपूत राजा कर्ण की कहानी का वर्णन है।” मेहता कहते हैं, “पद्मनाभ ने राजस्थान के सूत्रों का संदर्भ लिया है और उनके लेखों की ऐतिहासिक मान्यता है। इस किताब में गुजरात पर अलाउद्दीन ख‌िलजी के हमले का विस्तार से वर्णन है।” मेहता कहते हैं, ”ख़िलजी की सेना ने गुजरात के बंदरगाहों को लूटा था, कई शहरों को नेस्तानाबूद कर दिया था।”

पद्मनाभ ने उनकी किताब में हिंदू या मुसलमान शब्द का जिक्र नहीं किया है, लेकिन उन्होंने ब्राह्मण, बनिया, मोची, मंगोल, पठान आदि जातियों का उल्लेख किया है। मेहता कहते हैं, ख़िलजी ने गुजरात के राजपूत राजा ओको युद्ध में हरा दिया और गुजरात के शहरों- मंदिरों को लूटा और ध्वस्त करदिया , लेकिन जो लोग युद्ध में हार जाते हैं वो भी अपनी पहचान युद्ध में विजेता के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। 19वीं शताब्दी के लेखकों ने कहा है कि भले ही अलाउद्दीन ख‌िलजी ने सैन्य युद्ध जीत लिए हों, लेकिन सांस्कृतिक रूप से हम ही सर्वश्रेष्ठ हैं।

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कमला देवी से विवाह –

Alauddin Khilji – गुजरात विजय के बाद वहां के राजा कर्ण की पत्नी से ख‌िलजी के विवाह की कहानी ऐतिहासिक रूप से प्रमाणिक है।” क्या मध्यकाल में युद्ध में हारे हुए राजा की धन – संपत्तियां और रानियां जीते हुए राजाओं के अधिकार में आ जाती थीं। प्रोफेसर हैदर कहते हैं, “हारे हुए राजा की संपत्तियां, जवाहरात, युद्ध में इस्तेमाल होने वाले हाथी घोड़े जैसे जानवर और हरम सब जीते हुए राजा की मिल्कियत हो जाती थी।

 जीते हुए राजा ही तय करते थे कि उनका क्या करना है।” वो कहते हैं, “आम तौर पर खजाना लूट लिया जाता था, जानवरों को अमीरों में बांट दिया जाता था, लेकिन सल्तनत काल में हरम या राजकुमारियों को साथ लाने के उदाहरण नहीं मिलते हैं। सिर्फ़ खिलजी के विवाह करने का संदर्भ मिलता है जब हारे हुए राजा की पत्नी का जीते हुए के राजा के पास जाना कोई सामान्य बात नहीं थी। ख़िलजी के कमला देवी से शादी करने की कहानी अपने आप में अनूठी है। हारे हुए राजाओं की सभी रानियों के साथ ऐसा नहीं हुआ है।

देवल देवी का विवाह ख़िलजी के बेटे के साथ –

एक और दिलचस्प बात ये पता चलती है कि अलाउद्दीन खिलजी के हरम में रह रहीं कमला देवी ने उनसे अपनी बिछड़ी हुई बेटी देवल देवी को लाने का आग्रह किया था।  खिलजी की सेनाओं ने बाद में जब दक्कन में देवगिरी पर मलिक काफूर के नेतृत्व में हमला किया तो वो देवल देवी को लेकर दिल्ली लौटीं।” हैदर बताते हैं, बाद में ख़िलजी के बेटे का विवाह देवल देवी के साथ हुआ था। अमीर ख़ुसरो ने देवल देवी नाम की एक कविता लिखी है जिसमें देवल और खिज्र खान के प्रेम का विस्तार से वर्णन है। खुसरो की इस मसनवी को आशिका भी कहा गया है।” देवल देवी की कहानी पर ही नंदकिशोर मेहता ने 1866 में कर्ण घेलो नाम का उपन्यास लिखा था जिसमें देवल देवी की कहानी का वर्णन है। इस बेहद चर्चित उपन्यास को गुजराती का पहला उपन्यास भी माना जाता है। 

 रामदेव की बेटी इत्यपलीदेवी के साथ विवाह

Alauddin Khilji – ख़िलजी ने कड़ा का गवर्नर रहते हुए साल 1296 में दक्कन के देवगिरी (अब महाराष्ट्र का दौलताबाद) में यादव राजा रामदेव पर आक्रमण किया था। ख़िलजी के आक्रमण के समय रामदेव की सेना उनके बेटे के साथ अभियान पर थी। इसलिए मुक़ाबले के लिए उनके पास सेना नहीं थी। रामदेव ने अलाउद्दीन के सामने समर्पण कर दिया। रामदेव से ख़िलजी को बेतहाशा दौलत और हाथी घोड़े मिले थे। 

रामदेव ने अपनी बेटी झत्यपलीदेवी का विवाह भी ख़िलजी के साथ किया था। प्रोफ़ेसर हैदर बताते हैं, “इस वाक़ये का ज़िक्र उस दौर के इतिहासकार ज़ियाउद्दीन बरनी की किताब तारीख़-ए- फ़िरोज़शाही में मिलता है। ” हैदर बताते हैं, “बरनी ने रामदेव से मिले माल और उनकी बेटी से ख़िलजी के विवाह का ज़िक्र किया है लेकिन बेटी के नाम का ज़िक्र नहीं है.”

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अलाउद्दीन खिलजी का मूल्यांकन –

हैदर बताते हैं, “चौदहवीं शताब्दी के दक्कन क्षेत्र के इतिहासकार अब्दुल्लाह मलिक इसामी की फ़ुतुह-उस-सलातीन में ख़िलजी के रामदेव की बेटी झत्यपली देवी से शादी का ज़िक्र है। प्रोफ़ेसर हैदर कहते हैं, “बरनी और इसामी दोनों के ही विवरण ऐतिहासिक और विश्वसनीय हैं.” बरनी ने ये भी लिखा है कि मलिक काफ़ूर ने खिलजी की मौत के बाद शिहाबुद्दीन उमर को सुल्तान बनाया जो झत्यपली देवी के ही बेटे थे.

बरनी ने लिखा था कि शिहाबुद्दीन उमर मलिक काफ़ूर की कठपुतली थे और शासन वही चला रहे थे. प्रोफ़ेसर हैदर के मुताबिक़ रामदेव ख़िलजी के अधीन रहे और दक्कन में उनके अभियानों में सहयोग देते रहे. ख़िलजी की मौत के बाद देवगिरी ने सल्तनत के ख़िलाफ़ विद्रोह कर दिया था।

 राजपूत राजा की पूर्व पत्नी और यादव राजा की बेटी

Alauddin Khilji – दो महिलाओं का ज‌िक्र नहीं हुआ है जो अलाउद्दीन ख़िलजी की हिंदू पत्नियां थीं, हालांकि उस वक्त हिंदू शब्द उस तरह प्रचलन में नहीं था जैसे आज है। 1296 में दिल्ली के सुल्तान बने अलाउद्दीन ख‌िलजी के जीवन के रिकॉर्ड मौजूद हैं, जिनसे पता चलता है कि ख‌िलजी की चार पत्नियां थीं। 

जिनमें से एक राजपूत राजा की पूर्व पत्नी और दूसरी यादव राजा की बेटी थीं। 1316 तक दिल्ली के सुल्तान रहे अलाउद्दीन ख‌िलजी ने कई छोटी राजपूत रियासतों पर हमले करे या तो उन्हें सल्तनत में शामिल कर लिया था या

अलाउद्दीन की शादियां सिर्फ़ कूटनीतिक नहीं थीं

प्रोफ़ेसर हैदर मानते हैं कि ख़िलजी की राजपूत रानी कमला देवी और यादव राजकुमारी झत्यपली देवी से शादियां सिर्फ़ कूटनीतिक नहीं थी बल्कि ये व्यक्तिगत तौर पर उनके लिए फ़ायदेमंद थी। दरअसल ख़िलजी अपने ससुर जलालउद्दीन ख़िलजी की हत्या कर दिल्ली के सुल्तान बने थे जिसका असर उनकी पहली पत्नी मलिका-ए-जहां (जलालउद्दीन ख़िलजी की बेटी) से रिश्तों पर पड़ा होगा। मलिका-ए-जहां सत्ता में दख़ल देती थीं जबकि दूसरी बेगमों के साथ ऐसा नहीं था।

आज कोई कमला देवी या झत्यपली देवी की बात क्यों नहीं करता ? इस सवाल के जवाब में प्रोफ़ेसर हैदर कहते हैं, “क्योंकि उनके किरदार आज जो माहौल है उसमें फिट नहीं बैठते।” प्रोफ़ेसर हैदर कहते हैं, “हमें मध्यकाल के भारत को आज के चश्मे से नहीं देखना चाहिए. उस दौर की संवेदनशीलता अलग थी, आज की संवेदनशीलता अलग है. आज जो बातें बिलकुल अस्वीकार्य हैं। 

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अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु – Alauddin Khilji Death

(how did alauddin khilji died) अलाउद्दीन की मृत्यु 4 जनवरी 1316 दिन दिल्ली में हुई थी। जियाउद्दीन बरनी ( 14 वी शताब्दी के कवि और विचारक ) के अनुसार अलाउद्दीन खिलजी की हत्या मलिक काफूर ने की थी। अलाउद्दीन खिलजी का मकबरा सुल्तान खिलजी ने 1296-1316 के मध्य में बनवाया था।  इतिहासकारों के अनुसार एक दीर्घकालिक बीमारी की वजह से अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु हो गई थी। उनकी कब्र कुतुब मीनार परिसर दिल्ली में है।    

Alauddin Khilji History in Hindi –

Alauddin Khilji Facts –

  • 1250 में  बंगाल जन्मे अलाउद्दीन खिलजी का ओरिजनल नाम जुना मोहम्मद खिलजी था। 
  • उन्होंने राजगद्दी अपने चाचा जलालुद्दीन फिरुज खिलजी को मारकर लेली थी। 
  • 1298 में एक दिन मंगोलियो को 30 हजार की तादाद में सभी को मारकर उनकी पत्नी और बच्चो को गुलाम बना दिया था।
  • खिलजी ने कृषि उपज पर 50% कर माफ़ कर दिया जिससे किसानो पर बोझ कम हो गया था। 
  • alauddin khilji movie भी बनी है जिसका नाम ‘पद्मावत’ है। 
  • वह अपने ससुर जलालउद्दीन ख़िलजी की हत्या कर दिल्ली के सुल्तान बने थे
  • खिलजी 4 जनवरी 1316 दिन मारा और उनका मकबरा Qutb Minar complex कहाजाता है। 

Alauddin Khilji Questions –

1 .alauddeen khilajee kee maut kaise huee ?

मलिक काफूर ने अलाउद्दीन जहर देकर मार दिया था। 

2 .alauddeen khilajee kee mrtyu kab huee ?

January 1316 में अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु हुई थी। 

3 .alauddeen khilajee kee prashaasanik vyavastha ?

अलाउद्दीन खिलजी अपने प्रशासनिक कार्य का संचालन–दीवान-ए-विजारत, दीवान-ए-आरिज, दीवान-ए-इंशा और दीवान-ए-रसातल से करवता था।

4 .alauddeen khilajee ko kisane maara ?

अलाउद्दीन खिलजी को मलिक काफूर ने जहर देकर मारा था

5 .alauddeen khilajee kee mrtyu kaise huee ?

खिलजी को मलिक काफूर ने जहर देकर मर दिया था। 

6 .alauddeen khilajee ke aarthik sudhaar ? 

खिलजी ने सम्पूर्ण भारत पर अपना अधिकार स्थापित करने के लिए आर्थिक क्षेत्र में सुधार किये थे। 

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Conclusion –

आपको मेरा यह आर्टिकल Alauddin Khilji Biography In Hindi बहुत अच्छी तरह से समज और पसंद आया होगा। यह आर्टिकल के जरिये  हमने,alauddin khilji and padmavati और अलाउद्दीन खिलजी की राजस्व व्यवस्था से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दे दी है। अगर आपको इस तरह के अन्य व्यक्ति के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है। तो आप हमें कमेंट करके जरूर बता सकते है। और हमारे इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द।

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