Jai Prakash Narayan Biography In Hindi – जय प्रकाश नारायण की जीवनी

नमस्कार मित्रो आज के हमारे आर्टिकल में आपका स्वागत है ,आज हम Jai Prakash Narayan Biography In Hindi में भारत माता के वह सपूत जिन्होंने मानवीय मूल्यों और मानवता के प्रति निरन्तर संघर्ष किया जयप्रकाश नारायण का जन्म परिचय बताने वाले है। 

समाजवादी लोककल्याणकारी राज्य एवं समाज की कल्पना को साकार करने में उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया था। ऐसे बिहार के सारण जिले के सिताबदियारा गाँव में जन्मे जय प्रकाश नारायण के राजनीतिक विचार  बहुत अच्छे थे। आज हम jai prakash narayan wife ,jayaprakash narayan daughter snigdha और jayaprakash narayan views on partyless democracy की सम्पूर्ण माहिती से वाकिफ कराने वाले है। 

जयप्रकाश नारायण के सामाजिक विचार बहुत बढ़िया थे ,उन्होंने मानवता के प्रति अपनी सारी जिंदगी संघर्ष किया था। जयप्रकाश नारायण का उपनाम jp लोक नायक था। जयप्रकाश नारायण का समाजवाद भी बेहतरीन हुआ करता था आज जयप्रकाश नारायण को किस का दलाल कहा गया , जय प्रकाश नारायण सम्पूर्ण क्रांति और जयप्रकाश नारायण किस पार्टी से जुड़े थे जैसे कई सवालों के जवाब आज की पोस्ट में हम बताने वाले है। तो चलिए शुरू करते है। 

Jai Prakash Narayan Biography In Hindi –

पूरा नाम लोकनायक जयप्रकाश नारायण
जन्म  1 October 1902
जन्म स्थान बिहार , सारण जिला ,सिताबदियारा गाँव 
पिता हर्सुल दयाल श्रीवास्तव
माता फूल रानी देवी
पत्नी prabhavati devi
पेशा राजनीतिज्ञ
राजनीतिक पार्टी पहले कांग्रेस,बाद में कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी
राष्ट्रीयता भारतीय
उम्र Age 77 वर्ष गृहनगर पटना
धर्म हिन्दू
जाति कायस्थ
वैवाहिक स्थिति विवाहित
राशि तुला
मृत्यु 8 अक्टूबर 1979
मृत्यु स्थान पटना

जय प्रकाश नारायण की जीवनी –

Jai Prakash Narayan का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को बिहार के सारण जिले के सिताबदियारा गाँव में हुआ। उनके पिता का नाम हर्सुल दयाल श्रीवास्तव और माता का नाम फूल रानी देवी था। वो अपनी माता-पिता की चौथी संतान थे। जब जयप्रकाश 9 साल के थे तब वो अपना गाँव छोड़कर कॉलेजिएट स्कूल में दाखिला लेने के लिए पटना चले गए। स्कूल में उन्हें सरस्वती, प्रभा और प्रताप जैसी पत्रिकाओं को पढने का मौका मिला। उन्होंने भारत-भारती, मैथिलीशरण गुप्त और भारतेंदु हरिश्चंद्र के कविताओं को भी पढ़ा। इसके अलावा उन्हें ‘भगवत गीता’ पढने का भी अवसर मिला था।

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जयप्रकाश नारायण का जीवनपरिचय –

1920 में जब जयप्रकाश 18 वर्ष के थे तब उनका विवाह प्रभावती देवी से हुआ। विवाह के उपरान्त जयप्रकाश अपनी पढाई में व्यस्त थे इसलिए प्रभावती को अपने साथ नहीं रख सकते थे। इसलिए प्रभावती विवाह के उपरांत कस्तूरबा गांधी के साथ गांधी आश्रम मे रहीं। मौलाना अबुल कलाम आजाद के भाषण से प्रभावित होकर उन्होंने पटना कॉलेज छोड़कर ‘बिहार विद्यापीठ’ में दाखिला ले लिया था । बिहार विद्यापीठ में पढाई के पश्चात सन 1922 में जयप्रकाश आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए।

अमेरिका जाकर उन्होंने जनवरी 1923 में बर्कले विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। अमेरिका में अपनी पढाई का खर्चा उठाने के लिए उन्होंने खेतों, कंपनियों, रेस्टोरेन्टों इत्यादि में कार्य किया। इसी दौरान उन्हें श्रमिक वर्ग के परेशानियों का ज्ञान हुआ और वे मार्क्स के समाजवाद से प्रभावित हुए। इसके पश्चात उन्होने एम.ए. की डिग्री हासिल की पर पी.एच.डी पूरी न कर सके क्योंकि माताजी की तबियत ठीक न होने के कारण उन्हें भारत वापस लौटना पड़ा था।

जयप्रकाश नारायण की शिक्षा –

जयप्रकाश नारायण अपने दादा के साथ सिताबदियारा में रहते थे, क्योंकि उनके गाँव में कोई हाई स्कूल नहीं थी, इसलिए बाद में जयप्रकाश को आगे की पढाई के लिए पटना आना पड़ा, इस तरह स्कूल से ही पढाई में उपलब्धियाँ हासिल करते हुए 1918 में वो डिस्ट्रिक्ट मेरिट स्कॉलरशिप के साथ वो पटना कॉलेज पहुंचे. पटना में उन्हें पढने का शौक बढ़ गया,क्योंकि यहाँ काफी पुस्तकें भी उपलब्ध थी। 

इस तरह सरस्वती, प्रभा और प्रताप जैसे साहित्य के साथ ही उन्होंने भगवद गीता जैसी धार्मिक किताबें भी पढ़ी थी। जयप्रकाश नारायण काफी प्रतिभाशाली छात्र थे, स्कूल के दिनों में उन्होंने लेखन में अपनी प्रतिभा दिखाते “बिहार में हिंदी की वर्तमान स्थिति दी प्रेजेंट स्टेट ऑफ़ हिंदी इन बिहार पर निबंध लिखा था,जिसे काफी प्रोत्साहन और प्रशंसा मिली थी। 

जयप्रकाश नारायण का विवाह (Jai Prakash Narayan marriage)

जयप्रकाश का विवाह 1920 में मात्र 18 वर्ष की उम्र में हुआ था, उनके विवाह के समय उनकी पत्नी मात्र 14 वर्ष की थी , प्रभादेवी एक स्वतंत्र व्यक्तित्व वाली महिला थी, साथ ही वो क्रांतिकारी, उदारवादी और गांधीवादी महिला थी और गांधीजी के कार्यों में उत्साह के साथ भाग लेती थी. जयप्रकाश जब यूएस पढने के लिए गए तब वो गांधीजी के आश्रम पढ़ने को चली गई थी। 

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विवाह के बाद पढाई में व्यस्त –

विवाह के उपरान्त जयप्रकाश अपनी पढाई में व्यस्त थे इसलिए प्रभावती को अपने साथ नहीं रख सकते थे इसलिए प्रभावती विवाह के उपरांत कस्तूरबा गांधी के साथ गांधी आश्रम मे रहीं। मौलाना अबुल कलाम आजाद के भाषण से प्रभावित होकर उन्होंने पटना कॉलेज छोड़कर ‘बिहार विद्यापीठ’ में दाखिला ले लिया। बिहार विद्यापीठ में पढाई के पश्चात सन 1922 में जयप्रकाश आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए।

अमेरिका जाकर उन्होंने जनवरी 1923 में बर्कले विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। अमेरिका में अपनी पढाई का खर्चा उठाने के लिए उन्होंने खेतों, कंपनियों, रेस्टोरेन्टों इत्यादि में कार्य किया। इसी दौरान उन्हें श्रमिक वर्ग के परेशानियों का ज्ञान हुआ और वे मार्क्स के समाजवाद से प्रभावित हुए। इसके पश्चात उन्होने एम.ए. की डिग्री हासिल की पर पी.एच.डी पूरी न कर सके क्योंकि माताजी की तबियत ठीक न होने के कारण उन्हें भारत वापस लौटना पड़ा था ।

भारत वापस लौटनेके बाद स्वाधीनता आन्दोलन –

जयप्रकाश नारायण जब 1929 में अमेरिका से लौटे तब स्वतंत्रता संग्राम तेज़ी पर था। धीरे-धीरे उनका संपर्क जवाहर लाल नेहरु और महात्मा गाधी से हुआ और वो स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बने। 1932 मे सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौरान जब गांधी, नेहरु समेत अन्य महत्वपूर्ण कांग्रेसी जेल चले गए तब उन्होने भारत के अलग-अलग हिस्सों मे आन्दोलन को दिशा दी। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें भी मद्रास में सितंबर 1932 मे गिरफ्तार कर लिया गया और नासिक जेल भेज दिया। नासिक जेल में उनकी मुलाकात अच्युत पटवर्धन, एम. आर. मासानी, अशोक मेहता, एम. एच. दांतवाला, और सी. के. नारायणस्वामी जैसे नेताओं से हुई थी ।

इन नेताओं के विचारों ने कांग्रेस सोसलिस्ट पार्टी (सी.एस.पी) की नींव रखी। जब कांग्रेस ने 1934 मे चुनाव मे हिस्सा लेने का फैसला किया तब कांग्रेस सोसलिस्ट पार्टी ने इसका विरोध किया। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया और ऐसे अभियान चलाये जिससे सरकार को मिलने वाला राजस्व रोका जा सके। इस दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 9 महीने की कैद की सज़ा सुनाई गई। उन्होने गांधी और सुभाष चंद्र बोस के बीच मतभेदों को सुलझाने का प्रयास भी किया। सन 1942 में ‘भारत छोडो’ आंदोलन के दौरान वे हजारीबाग जेल से फरार हो गए थे।

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जयप्रकाश नारायण का करियर – Jai Prakash Narayan 

जयप्रकाश अपने मित्रों के साथ असहयोग आन्दोलन (जिसे गांधीजी ने 1919 में आये रोलेट एक्ट के विरुद्ध शुरू किया था) के दौरान मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के भाषण को सुनने गये थे , उस समय उन पर मौलाना अबुल के शब्दों का प्रभाव हुआ और उन्होने अपने एग्जाम से 20 दिन पहले ही कॉलेज छोड़ दिया. 1922 में उच्च शिक्षा के लिए जयप्रकाश ने देश छोड़ दिया और इसी वर्ष 8 अक्टूबर को वो कैलीफिर्निया पहुंचे थे।

जयप्रकाश ने यूनाइटेड स्टेट्स में अपनी शिक्षा का खर्चा उठाने के लिए उन्होंने कई तरह की नौकरियां की, और इन अनुभवों ने ही उन्हें वर्किंग क्लास के सामने आने वाली समस्याओं के प्रति जागरूक कर दिया।  बर्कले में उन्होंने अंगूर तोड़ने, जेम पैकर, वेटर, सेल्समेन और बर्तन धोने का काम भी किया था ,जयप्रकाश ने पहले बर्कले (Berkeley) में प्रवेश लिया और फिर यूनिवर्सिटी ऑफ़ लोवा में स्थानांतरण लिया, इसके बाद भी उन्हें कई अन्य यूनिवर्सिटी में ट्रांसफर लेना पड़ा। 

Jai Prakash Narayan पीएचडी की डिग्री –

इस तरह यूएस में कई तरह की समस्याओं का सामना करते हुए भी जेपी ने अपने पसंदीदा विषय समाज-शास्त्र में पढाई की, और प्रोफेसर एडवर्ड रोस से इस विषय में मार्गदर्शन लिया ,यही पर कार्ल मार्क्स के दास केपिटल ने उन्हें काफी प्रभावित किया, जिसे पढकर उन्हें ये समझ आया कि मार्क्सिज्म में बहुत सी समस्याओं का समाधान मिल सकता हैं। Jai Prakash Narayan इस तरह इस विचारधारा से प्रभावित होकर वो मार्क्सिस्ट बन गए. जेपी ने भारतीय विद्वान और कम्युनिस्ट एम.एन रॉय की किताबो को भी पढ़ा, उन्होंने लेनिन, ट्रोटस्काई(Trotsky) के किये गये कामों का भी अध्ययन किया। 

जयप्रकाश की माताजी की तबियत खराब होने के कारण उन्हें अपनी पीएचडी की डिग्री की छोडनी पड़ी. लन्दन में जेपी रजनी पाल्मे दत्त और अन्य क्रांतिकारियों के साथ पारिवारिक सम्बंध बन गये थे. पटना के कदम कुआं में वो अपने करीबी मित्र गंगा शरण सिंह (सिन्हा) के साथ रहते थे,जो कि उनकी तरह ही राष्ट्रवादी थे। 1929 में जेपी भारत लौटे, और वापिस लौटकर जवाहर लाल नेहरु के कहने पर वो इंडियन नेशनल कांग्रेस में शामिल हो गये. महात्मा गांधी भी युवा जेपी से काफी प्रभावित थे।

Jai Prakash Narayan गांधी के अनुयायी –

उन्हें अपने दल में शामिल कर लिया,इस तरह जयप्रकाश नारायण गांधी के अनुयायी बन गए ,जय प्रकाश ने ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध असहयोग आन्दोलन में भी योगदान दिया, और इस कारण ही उन्हें 1932 में जेल भी जाना पड़ा. जेल में उनकी मुलाकात राम मनोहर लोहिया, मीनू मसानी, अच्युत पटवर्धन,अशोक मेहता,युसूफ देसाई और अन्य कई राष्ट्रीय नेताओं से हुई थी। इसके बाद स्वतंत्रता संग्राम में धीरे-धीरे उनका योगदान बढने लगा और 1939 में उन्हें फिर से जेल हो गयी थी। 

इस बार उनके जेल जाने का कारण ये था कि उन्होंने भारत के ब्रिटेन की तरफ से विश्व युद्ध द्वितीय में शामिल होने का विरोध किया था। 1942 में महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आन्दोलन की शुरुआत की थी,जिसमें जयप्रकाश नारायण ने काफी उत्साह के साथ भाग लिया उनके साथ सूरज नारायण सिंह,गुलाब चंद गुप्ता और रामानंद मिश्रा थे जो भूमिगत हो गये थे ,लेकिन 1943 में ब्रिटिश सरकार ने उन्हें वापिस पकड़ लिया. आखिर में 1946 में जयप्रकाश को जेल से छोड़ा गया, लेकिन तब तक स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेते हुए उन्होंने कांग्रेस नेता के रूप में अपनी छवि सशक्त कर ली थी। 

जयप्रकाश नारायण को मिले पुरस्कार –

लोकनायक जयप्रकाश नारायण का व्यक्तित्व किसी तरह के पुरस्कार की मोहताज नहीं हैं. किन्तु इन्होने देश सेवा में अपना समस्त जीवन दे दिया है. इन्हें विश्व स्तर पर पुरस्कार प्राप्त हुए, यहाँ पर इन्हें प्राप्त पुरस्कार का विवरण दिया जा रहा है। वर्ष 1999 में भारत सरकार की तरफ से इन्हें भारत रत्न अवार्ड से नवाज़ा गया था ,इन्हें एफ़आईई फाउंडेशन की तरफ से राष्ट्रभूषण अवार्ड से सम्मानित किया गया था। इनकी प्रतिभा भारत के लोगों के पहले ही विदेशियों ने पहचान लिया था।  इस वजह से लोक सेवा करने के कारण इन्हें वर्ष 1965 में रामोन मैगसेसे अवार्ड से सम्मानित किया गया। 

भारत का स्वतंत्रता आन्दोलन हो या राजनैतिक आन्दोलन जयप्रकाश नारायण ने देश सेवा में हमेशा अपना योगदान दिया. इस कारण इन्हें कई यातनाएं सहनी पड़ी, किन्तु उन्होंने हार नहीं मानी थी ,आज भी कई राजनेता इनके नाम का प्रयोग अपने भाषणों में करते हैं. भारतीय राजनीति को सदैव ही ऐसे क्रांतिकारी व्यक्तित्व वाले लोगों की आवश्यकता रही है. देश का युवा वर्ग आज भी इनसे प्रेरणा लेकर भारतीय राजनीति में अपनी भूमिका दर्ज कराने की कोशिश करता है। 

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जयप्रकाश नारायण की मृत्यु – Jay prakash Narayan Death

आन्दोलन के दौरान ही उनका स्वास्थ्य बिगड़ना शुरू हो गया था। आपातकाल में जेल में बंद रहने के दौरान उनकी तबियत अचानक 24 अक्टूबर 1976 को ख़राब हो गयी और 12 नवम्बर 1976 को उन्हें रिहा कर दिया गया। मुंबई के जसलोक अस्पताल में जांच के बाद पता चला की उनकी किडनी ख़राब हो गयी थी जिसके बाद वो डायलिसिस पर ही रहे। जयप्रकाश नारायण का मृत्यु 8 अक्टूबर, 1979 को पटना में मधुमेह और ह्रदय रोग के कारण हो गया। 

Jai Prakash Narayan Biography Video –

 

जयप्रकाश नारायण रोचक तथ्य –

  •  11 अक्टूबर 1902 को बिहार के सारण जिले में जयप्रकाश नारायण जन्मे थे। उनके पिता का नाम हर्सुल दयाल श्रीवास्तव और माता का नाम फूल रानी देवी था।
  • जयप्रकाश नारायण के विवाह के समय उनकी पत्नी मात्र 14 वर्ष की थी , प्रभादेवी एक स्वतंत्र व्यक्तित्व वाली महिला थी। 
  • सवतंत्र सेनानी जयप्रकाश नारायण अमेरिका में अपनी पढाई का खर्चा उठाने के लिए  खेतों, कंपनियों, रेस्टोरेन्टों कई कई जगह कार्य किया था । 
  • जयप्रकाश नारायण का मृत्यु 8 अक्टूबर, 1979 को पटना में मधुमेह और ह्रदय रोग के कारण हो गया। 
  • उन्होने गांधी और सुभाष चंद्र बोस के बीच मतभेदों को सुलझाने का प्रयास भी किया। सन 1942 में ‘भारत छोडो’ आंदोलन के दौरान वे हजारीबाग जेल से फरार हो गए थे।

जयप्रकाश नारायण प्रश्न –

1 .जयप्रकाश नारायण की आत्मकथा किसने लिखी थी ?

व्हाई सोशलिज्म’ नाम एक पुस्तक जयप्रकाश नारायण की आत्मकथा खुद उन्होंने लिखी थी। 

2 .जयप्रकाश नारायण का निधन कब हुआ ?

8 October 1979 के दिन जयप्रकाश नारायण की मृत्यु हुई थी। 

3 .जयप्रकाश नारायण का जन्म कब हुआ था ?

11 October 1902 के दिन बिहार के सारण जिले के सिताबदियारा गाँव में जयप्रकाश नारायण का जन्म हुआ था। 

4 .जयप्रकाश नारायण की जीवनी किसने लिखी ?

‘व्हाई सोशलिज्म’ नाम से जो पुस्तक लिखी थी यह जयप्रकाश नारायण ने  खुद लिखी थी। 

5 .जयप्रकाश नारायण किस देश का दलाल था ?

उन्हें भारत देश के स्वतंत्र के दलाल कहा जाता था। 

6 .जयप्रकाश नारायण किस पार्टी से जुड़े थे ?

जयप्रकाश नारायण  भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जनता दल से जुड़े थे। 

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Conclusion –

दोस्तों आशा करता हु आपको मेरा यह आर्टिकल  jai prakash narayan in hindi आपको बहुत अच्छी तरह से समज आ गया होगा और पसंद भी आया होगा । इस लेख के जरिये  हमने jp movement notes और  Life introduction of Jai Prakash Narayan से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दे दी है अगर आपको इस तरह के अन्य व्यक्ति के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है तो आप हमें कमेंट करके जरूर बता सकते है। और हमारे इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे। जय हिन्द ।

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