Bappa Rawal Biography In Hindi | बप्पा रावल की जीवनी

नमस्कार मित्रो आज के हमारे आर्टिकल में आपका स्वागत है आज हम आपको Maharana bappa rawal biography In Hindi की कहानी बताने वाले है। एक वीर और शक्तिशाली राजा बप्पा रावल की जीवनी की जानकारी से हम आपको परिचित करवाएंगे। 

आज हम bappa rawal ki talwar ka weight , bappa rawal successor , bappa rawal height और bappa rawal empire, बप्पा रावल का इतिहास बताइए की सम्पूर्ण जानकारी बताएँगे। बप्पा रावल का जन्म ka nam ‘कालभोज’ था , जन्म 713-14 ई को हुआ ऐसा माना जाता है उनका दूसरा नाम जब उनका जन्म हुआ था उस वक्त पे मान मोरी जो की मौर्य शासक के राजा थे उनका चित्तौड़ राज्य पर शासन था। जब बप्पा रावल युवा अवस्था के हुए तब 20 साल की आयु में उन्हों ने मौर्य शासक मान मोरी राजा को युद्ध में हराकर के चित्तौड़ गढ़ किले पर अपना शासन स्थापित कर दिया था .

ऐसा कहा जाता है की बाप्पा रावल [गोहिल]  गुहिलादित्य गुहिल वंश के  के संस्थापक थे। गोहिल वंश को शासन में उदभव करने वाले महाराजा बप्पा रावल है। परम पूज्य हारीत ऋषि के जरिये बाप्पा को देवाधी देव महादेव के दर्शन का साक्षात कार हुआ था। pspa रावल एक उम्दा राजा के नाम से भारतीय इतिहास में उभर आये है। आज हम बप्पा रावल जीवनी लेख के जरिये bappa rawal story in hindi की जानकारी से आपको ज्ञात कराने वाले है। 

Table of Contents

Bappa Rawal Biography In Hindi –

Bappa rawal history in hindi में आपको बतादे की प्राचीन भारत में 713-14 ई में जन्मे राजकुमार काल भोज ने मेवाड़ राज्य के राजा मान मोरी को युद्ध में पराजित करके गुहिल वंश को शासन वंश के रूप में स्थापित करने वाले महाराजा था। bappa rawal in hindi  में जानकारी बहुत काम पाई जाती है लेकिन यह राजा वीर और महान था। बाप्पा रावल ने अपने शासन काल में भगवन शिव का [आदी वराह] मन्दिर 735 ई में बनवाया था। उस समय पर हज्जात ने बाप्पा रावल राजपूताने राज्य पर अपना सैन्य भेजा था।

लेकिन बप्पा रावल की और से हज्जात के सैन्य को हज्जात के राज्य में ही पराजित कर दिया था। बाप्पा रावल को ईडर जो गुजरात का एक गांव है उसमे उनका जन्म भी बताया जाता है और बाप्पा रावल का मूल गांव भी ईडर है, ऐसा कहा जाता है। Bappa rawal wife name in hindi बताये तो उन्हें लगभग 100 पत्नियाँ थीं उसमे bappa rawal wife 35  मुस्लिम शासक राजाओ की राज कुमारिया थीं।  बाप्पा रावल का इतना भय था की मुस्लिम शासको ने अपनी बेटिया उनके भय से उन्हें ब्याह करवाई थी।

भगवन  एकलिंग जी का बहहुत ही बड़ा मन्दिर चित्तोड़ राज्य के उदयपुर नगर के उत्तर की और कैलाशपुरी जगह पर उस्थित भगवन का यह मन्दिर की बनावट 734 ई की साल में बप्पा रावल द्रारा कराई गई थी। उसके पास में ही हारीत ऋषि का एक आश्रम भी स्थापित है |

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बप्पा रावल की उपाधियां – Bappa rawal

जब भारत देश के नन्हे नन्हे  राज्यों पर अरब देश के राजाओ ध्वारा आक्रमण करवाए जाते थे ऐसा कहा जाता है की उसके आक्रमणकारियों से पूरा भारत त्राहि पुकार चूका था। उनके कई पराक्रम बहु प्रचलित है। उस वक्त 738 ई में  शासक राजा वि`क्रमादित्य द्वितीय और नागभट्ट प्रथम की मिली हुई सेना ने सिंधु के मुहम्मद बिन कासिम को बहुत बुरी तरह हराया था।

बाप्पा रावल ने सलीम जाप अफगानिस्तान के गजनी के शासक को हरा दिया था। बाप्पा रावल  एव बापा रावल शब्द व्यक्तिगत शब्द का नाम नहीं है लेकिन जिस तरह वर्त्तमान समय में महात्मा मोहनदास करमचंद गांधी के नाम को बापू के नाम से जाना जाता है ऐसे ही मेवाड़ राज्य के  नृपविशेष और सिसौदिया वंशी राजा कालभोज का दूसारा नाम है बाप्पा रावल। लेकिन history of rawal caste देखे तो उसके नाम से ही जुडी थी। 

सिसौदिया वंशी राजा कालभोज के देशरक्षण और प्रजासरंक्षण के कार्यो

से प्रभावित हो के ही प्रजा ने राजा को बापा नाम की पदवी से सन्मानित किया था।

महाराणा कुंभा के वक्त में रचना हुई।

एकलिंग महात्म्य के प्राचीन ग्रंथमें राजा काल भोज का समय संवत् 810 (सन् 753) ई. बताया गया है।

एक दूसरे प्राचीन ग्रन्थ में उस समय को बापा रावल का राज्यत्याग का वक्त भी बताया गया है।

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बप्पा रावल का जीवन परिचय –

उनका शासनकाल 30 साल रहा था उन्हों ने कई प्रजा के कार्य करके वंश के मुख्य स्थापक राजा बने थे। सन् 723 में आसपास बाप्पा रावल ने राज्य का कार्यकाल संभाला था। काल भोज के समय से पहले भी उनके वंश के कुछ महान और प्रतापी महाराजा का शासन मेवाड़ राज्य में रह चूका है।  bppm रावल [काल भोज] का व्यक्तित्व जीवन इस सभी महाराजाओ से बढ़कर था। 

चित्तौड़ का किला मोरी वंश के कब्जे में था उस वक्त परम पूज्य ऋषि श्रेस्ट हारीत ऋषि की सहायता से चितोड़ के राजा मान मोरी को मार कर बाप्पा रावल ने उसके राज्य पर अधिकार स्थापित किया।  वि. सं. 770 (सन् 713 ई.) का एक लेख मिला था।इस शिला लेख पर अंकित किया हुआ से यह प्रतीत हुआ था की मानमोरी और  bpps रावल के समय में ज्यादा अंतर नहीं था सिंध में अरबी राजाओ का शासन को बढ़ता हुआ पूर्ण रूप से रोकने वाला और उनको बहुत ही करारी हार देने वाला वीर यौद्धा बाप्पा रावल थे।

bippa रावल गहलौत [ गोहिल ]राजपूत वंश के आठवें शासक राजा थे बाप्पा रावल का बाल्य काल नाम राजकुमार कालभोज था।  उनका जन्म सन् 713 में हुआ था। तक़रीबन 97 वर्ष की उम्र में उनकी मौत  हुई थी। इस वीर और प्रतापी युवराज ने राजा बनने के बाद ही अपने वंश का नाम अपने नाम से जोड़ दिया सिर्फ जोड़ा ही नहीं मेवाड़ वंश से अपना राजवंश स्थापित करदिया। bappa rawal sword weight को उठाके जब भी चलते है जित ही हासिल करते थे। 

Bappa rawal एकलिंगजी के भक्त थे –

Biography of Bappa Rawal in Hindi Jivani में सभी को बतादे की बप्पा रावल एक न्यायप्रिय और प्रजा के कल्याणकारी  महाराजा थे। राजा राज्य को अपना नहीं समझते थे लेकिन  भगवन शिवजी के एक रूप ‘एकलिंग जी’ को चित्तोड़ दुर्ग  राजा मानते हुए राज्य  कार्यकाल संभाला करते थे। और खुद को एकलिंगजी के भक्त और प्रजा का सेवक बताते थे। तक़रीबन 30 साल के शासन कल के बाद ही बाप्पा रावल ने अपने जीवन का उद्देश्य बदल के वैराग्य ले लिया और अपने उत्तराधिकारी  पुत्र को राज्य का कारभार देकर भगवन शिव की भक्ति और उपासना में अपना जीवन व्यतीत कर दिया था।

चित्तोड़ किले पर हुए वीर और पराक्रमी राजाओं की जिस वंश में लाइन लगी थी। bappa rawal family tree देखि जाये तो राणा सांगा [ महाराणा संग्राम सिंह ] उदय सिंह , महाराणा प्रताप और अमरसिह जैसे वीर और श्रेष्ठ शासक राजा बाप्पा रावल के ही वंश में जन्मे है।बाप्पा रावल ने अपने जीवन काल में अपने दुश्मन अरब  राजाओ को अनेक समय ऐसी करारी हार का सामना करवाया था

की उन्हों ने अपने जीवन में तक़रीबन  400 साल तक किसी भी मुस्लिम राजा की हिंमत नहीं हुई थी। कोई शासक भारत देश की और आंख उठा कभी देख सके या उनका शासन भारत की और बढ़ाने की सोच भी रख सके। कई बार महमूद गजनवी ने राजस्थान की और चढाई की लेकिन हमेशा पराजय का ही सामना काना पड़ा क्योकि bappa rawal son भी बहुत ताकतवर थे। 

अरबों का आक्रमण –

इतिहास की जानकारी के अनुसार बापा की  ज्यादा प्रसिद्धि का मुख्य कारण अरबो के साथ का सफल युद्ध माना जाता है। अरबो के सामने बाप्पा रावल जब जब भी युद्ध में उतरे है हमेशा जित ही हासिल हु थी।सन् 712 ई. में bappa rawal and muhammad bin qasim के युद्ध में बापा ने सिंधु प्रान्त को जीत लिया था । अरबी राजाओ ने इसके बाद चारों ओर आक्रमण चालू कर दिये थे।  लेकिन बापा रावल ने सबको हार का सामना करवाया था।

कच्छेल्लोंश् , गुर्जरों , चावड़ों, मौर्यों और सैंधवों को पराजित करके बापा ने गुजरात, मारवाड़, मेवाड़ और मालवा जैसे सभी प्रान्तों पर अपना अधिकार जमा दिया था।राजस्थान राज्य के कुछ महान् लेखो में बप्पा रावल और सम्राट् नागभट्ट प्रथम  के नाम उल्लेख्य किये हुए मिलते हैं।

Bappa rawal hindi में आपको बतादे की राजा नागभट्ट प्रथम ने अरब राजाओ को मालवा और पश्चिम राजस्थान से मार कर खदेड़ दिया था। जिस समय तक बाप्पा रावल का वंश चित्तोड़ दुर्ग में शासन करता रहा उस समय तक अरबो ने कभी भी चित्तोड़ की और कभी भी नहीं देखा था। bappa rawal vanshavali देखि जाये तो कई पराक्रमी और वीर राजाओ ने जन्म लिया है।

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बप्पा रावल के सिक्के – ( Bappa Rawal Coins )

पुरे भारत में अपने अपने राज्य में अपने अपने सिक्के राजाओ के जरिये लागु किये जाते थे। अजमेर शहर में मिले सिक्के को ओझा गौरीशंकर हीराचंद ने बाप्पा रावल का सिक्का है ऐसा बताया था।बाप्पा रावल के सिक्के का वजन देखा जायेतो  65 रत्ती [तोल 115 ग्रेन] है। उनके सिक्के के अंदर ऊपर और निचे की और के इक साइड श्री बोप्प लेखा है जो माला के निचे अंकित किया है। उसके आलावा त्रिशूल और बाई का चित्र अंकित किया है।

और दूसरी साइड पर एक  शिवलिंग भी अंकित किया है। और नंदी भी है जो शिवलिंग की ओर मुख करके बैठा दिखता है। नंदी और शिवलिंग के नीचे दंडवत्‌ प्रणाम करते एक पुरुष की छवि अंकित है।सिक्के के ऊपर सूर्य , चमर और छत्र की आकृति भी अंकित  हैं। इस सिक्के में एक गौ भी खड़ी मिलती और उसका दूध पीता हुआ बछड़ा भी है। इस सिक्के में बप्पा रावल के जीवन की जानकारिया और शिवभक्तिी को प्रतीत कराती है।

बाप्पा रावल की मृत्यु – ( Bappa Rawal Death )

बप्पा रावल का मृत्यु नागदा में हुआ था और वह बापा की समाधि आजभी स्थित है।

आबू के शिलालेख , कीर्ति स्तम्भ शिलालेख , और रणकपुर प्रशस्ति में बाप्पा रावल का वर्णन मिलता है।

Bappa Rawal History Video –

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Bappa rawal के बारेमे कुछ रोचक तथ्य –

  • गहलौत राजपूत वंश के बप्पा रावल आठवें शासक राजा थे।
  • बप्पा का बालयकाल का नाम राजकुमार कलभोज हुआ करता था।
  • उनका जन्म सन् 713 में हुआ था। और उनकी मौत तक़रीबन 97 वर्ष की आयु में हुई थी।
  • महाराजा बप्पा रावल के बारे में कहा जाता है कि
  • वह अपने एक ही झटके में दो भैंसों की बलि देता था।
  • पहेरवेश में 35 हाथ की धोती और 16 हाथ का दुपट्टा पहनते थे।
  • बापा की तलवार का वजन 32 मन बताया जाता है। और अपने भोजन में 4 बकरों का भोजन करते थे।
  • उनकी सैन्य शक्ति में तक़रीबन 1272000 सैनिक हुआ करते है।
  • महाराजा बप्पा रावल ने शासक बनने के पश्यात अपने वंश का नाम ग्रहण नहीं किया था।
  • लेकिन नए मेवाड़ वंश नाम का राजवंश चलाया है और चित्तौड़ दुर्ग को अपने राज्य की राजधानी बनाया था।
  • बप्पा रावल ने 39 वर्ष की उम्र में सन्यास लिया था।
  • इनका समाधि स्थान एकलिंगपुरी से उत्तर में एक मील दूर उपस्थित है। 
  • बप्पा रावल ने कुल 19 वर्षों तक शासन किया था।
  • बप्पा रावल की विशेष प्रसिद्धि अरबों से सफल युद्ध जितने के कारण हुई  थी। ।
  • सन् 712 ई. में महाराजा बप्पा ने मुहम्मद बिन क़ासिम से सिंधु प्रान्त को जीत लिया था ।
  • अरबों ने उसके बाद चारों ओर धावे करने शुरू करदिये थे।
  • बप्पा ने मौर्यों,चावड़ों,सैंधवों ,गुर्जरों और कच्छेल्लोंश् को भी हरा के मेवाड़ गुजरात ,
  • मारवाड़ और मालवा जैसे बड़े भूभागों को जित लिया था।

FAQ –

1 .बप्पा रावल की कितनी रानियां थी ?

बप्पा रावल की लगभग 100 पत्नियाँ थीं उसमे बप्पा रावल की 35 पत्नियाँ  मुस्लिम शासक राजाओ की राज कुमारिया थीं।  बाप्पा रावल का इतना भय था की मुस्लिम शासको ने अपनी बेटिया उनके भय से उन्हें ब्याह करवाई थी।

2 .बप्पा रावल की वंशावली और बप्पा रावल के पुत्र कौन थे?

बप्पा रावल के पुत्रों के नाम की बात करे तो उनकी पीढ़ी महाराजा राणा प्रताप से मिलती है। बप्पा रावल के राणा सांगा [महाराणा संग्राम सिंह] उदय सिंह , महाराणा प्रताप और अमरसिह जैसे वीर और श्रेष्ठ शासक राजा बाप्पा रावल के ही वंश में जन्मे है। बप्पा रावल ब्राह्मण को बहुत मानसन्मान देते थे।

3 .बप्पा रावल की उपाधियां और बप्पा रावल की मृत्यु कैसे हुई? 

बपा रावल का इतिहास dekhe to बप्पा रावल का मृत्यु नागदा में हुआ था।

उनकी वजह बताई जाये तो उम्र के कारन उनकी मौत हुई थी।

उनकी उपाधियां सिसौदिया वंशी राजा कालभोज के देशरक्षण और प्रजासरंक्षण के कार्यो से प्रभावित हो के ही

प्रजा ने राजा को बापा नाम की पदवी से सन्मानित किया था।

4 . मेवाड़ का प्रथम शासक कौन था? और मेवाड़ का अंतिम शासक कौन था?

मेवाड़ का प्रथम शासक बप्पा रावल को बताया गया है। 

उन्हों ने राजपूत साम्राज्य की मेवाड़ किले पर स्थापना की हुई है।

और मेवाड़ का अंतिम शासक महाराजा अमर सिंह को बताया जाता है।

5 . बप्पा रावल का जन्म और बप्पा रावल की मृत्यु कब हुई?

बप्पा रावल उनका जन्म सन् 713 में हुआ था। और

बप्पा की मौत तक़रीबन 97 वर्ष की आयु में हुई थी।

6 .बप्पा रावल की तलवार का वजन कितना था?

बप्पा रावल इतिहास dekhe to बप्पा रावल की तलवार का वजन तक़रीबन 32 मन बताया जाता है।

7 .बप्पा रावल का वजन कितना था ? बप्पा रावल की लंबाई कितनी थी ? 

बप्पा रावल का वजन (bappa rawal height and weight) बताया जाये तो

सिक्के का वजन 115 ग्रेन या 65.7 रत्ती है।

और अपने एक ही झटके में दो भैंसों की बलि देता था। 

Bappa rawal height in feet पहेरवेश में 35 हाथ की धोती और

16 हाथ का दुपट्टा पहनते थे बापा की तलवार का वजन 32 मन बताया जाता है।

बप्पा रावल का भोजन में 4 बकरों का भोजन करते थे।

इसके अनुसार उनकी वजन और ऊंचाई की क्षमता बहुत ज्यादा थी।

8 .बप्पा रावल किस का पुत्र था? 

बप्पा रावल नागादित्य [Nagaditya] के पुत्र थे। 

9 .Bappa rawal और रावलपिंडी के बीच क्या संबंध है?

बप्पा रावल और रावलपिंडी का इतिहास के बीच संबंध बताया जाये तो

अपने देश को विदेशी आक्रमणो से बचाने के लिए वीर बप्पा रावल के सैन्य को

ठिकाना रावलपिंडी मे हुआ करता था, इसी वजह से इस जगह का नाम रावलपिंडी पड़ा था।

10 .मेवाड़ का संस्थापक कौन है?

महाराजा बप्पा रावल मेवाड़ राज्य के स्थापक है। 

11 .बप्पा रावल की हाइट कितनी थी ? 

बप्पा रावल की लंबाई या हाइट की बात करे तो 9 फीट थी।

12 .बप्पा रावल के पिता का नाम क्या था ?

bappa rawal ke pita ka naam नागादित्य [Nagaditya] था। 

13 .बप्पा रावल की तलवार में कितना वजन था ?

महाराजा बापा की तलवार का वजन 32 मन बताया जाता है।

14 .बप्पा रावल का जन्म कब हुआ ?

महाराणा बप्पा रावल का जन्म 713 AD में हुआ था। 

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Conclusion –

दोस्तों आशा करता हु आपको मेरा यह आर्टिकल Bappa Rawal Biography बहुत पसंद आया होगा।

इस लेख के जरिये  हमने bappa rawal rawalpindi और

bappa rawal ke vanshaj से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दे दी है।

अगर आपको इस तरह के अन्य व्यक्ति के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है।

तो आप हमें कमेंट करके जरूर बता सकते है।

हमारे इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द ।

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