Chand Bibi Biography In Hindi | चाँद बीबी की जीवनी

आज हम इस आर्टिकल में Chand Bibi History In Hindi के बारे में जानेंगे, वह 18 वीं सदी की बहादुर स्त्री थी। सितार बजाने और फूलों के चित्र बनाने का शौक रखने वाली चाँद बीबी का जीवन परिचय बताने वाले है। 

चांद बीबी का जन्म 1550 ई को अहमदनगर के सुल्तान हुसैन निजाम शाह प्रथम के घर हुआ था। उनकी माता का नाम खुंजा हुमायु था। और भाई का नाम सुल्तान बुरहान-उल-मुल्क जो अहमदनगर के सुल्तान थे। चांद बीबी अनेक भाषाएं फारसी , तुकी,कन्नड़ ,अरबी ,और मराठी सहित कई भाषाए की ज्ञाता थी। चांद बीबी 1550-1599 जिन्हें चांद खातून या चांद सुल्ताना के नाम से भी पहेचाना जाता है।

चांद बीबी एक भारतीय मुस्लिम महिला योद्धा थी। चांद बीबी को बहोत ज्यादा सम्राट अकबर की मुगल सेना से अहमदनगर की रक्षा के लिए पहचाने जाता है। अगर आप भी chand bibi Biography, चाँद बीबी का इतिहास और chand bibi kaun thi in hindi के बारे में जानना चाहते है तो हमारे इस आर्टिकल के बारे में पढ़िए ताकि आपको भी भारत की स्त्री वीरांगना चाँदबीबी का जीवन परिचय के बारे में आपको जानकरी देंगे। 

Chand Bibi Biography In Hindi –

नाम चांदबीबी
जन्म 1550 ई
पिता हुसैन निजाम शाह प्रथम
माता खुंजा हुमायु
पति अली आदिल शाह प्रथम
मृत्यु 1595
मृत्यु स्थान अहमदनगर से 40 मील दूर

चाँद बीबी की जीवनी –

चाँद बीबी  एक 18 वीं सदी की बहादुर स्त्री थी। चांद बीबी का जन्म 1550 ई को हुवा था। उनका पिताजी का नाम हुसैन निजाम शाह प्रथम था। और माता का नाम खुंजा हुमायु था। चांद बीबी को अनेक भाषाएं फारसी , तुकी,कन्नड़ ,अरबी ,और मराठी सहित कई भाषाएं जानती थी। चांद बीबी को फूलों के चित्र बनाना उनका शौक था। और चाँद बीबी सितार बजाती थी। 

chand biwi साल 1550-1599 जिन्हें चांद खातून या चांद सुल्ताना के नाम से भी पहेचाना जाता है। चांद बीबी एक भारतीय मुस्लिम महिला योद्धा थी। चांद बीबी को बहोत ज्यादा सम्राट अकबर की मुगल सेना से अहमदनगर की रक्षा के लिए पहचाने जाता है। चांद बीबी के पिताजी ने उनकी शादी का फैसला किया और बीजापुर सल्तनत के ‘अली आदिल शाह प्रथम’ से उनका निकाह कर दिया।

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Chand Bibi का विवाह –

चांद बीबी ने 15 वीं शताब्दी में अपनी आंखें खोली थीं। चांद बीबी उनके माता-पिता के दुलार के साथ वह कब 14 साल की हो गईं, उन्हें मालूम ही नहीं चला कयोकि उस समय लड़कियों की जल्दी शादी का चलन था। chand bibi ki kahani देखे तो उसी कारन चांद बीबी के पिताजी ने उनकी शादी का फैसला किया और बीजापुर सल्तनत के ‘अली आदिल शाह प्रथम’ से उनका निकाह कर दिया।

Chand beegam बचपन से ही बहोत समझदार थीं। इस वजसे उन्हें शादी के बाद अपनी ससुराल में बहोत दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा वह जल्द ही सबके साथ घुल-मिल गईं। उनका वैवाहिक जीवन पटरी पर था पति ‘अली आदिल शाह प्रथम’ से भी उनको पूरा प्यार और सहयोग मिल रहा था। सब उनती तारीफ करते थे, इस बीच अचानक उनकी खुशियों को किसी की नज़र लग गई और उनके पति मृत्यु को प्यारे हो गए। 

पति के मृत्यु के बाद Chand Bibi के दुश्मन –

Chandbibi के पति का कम उम्र में निधन होना किसी के लिए भी सहज नहीं होता पति के कम उम्र में निधन होने के कारन चांदबीबी पर भी इसका गहरा असर पड़ा था। उनके पति की मौत को कुछ ही दिन हुए थे कि उनकी जगह गद्दी पर बैठने की होड़ सी मच गई। असल में चांदबीबी को अपने पति से कोई भी पुत्र प्राप्त नहीं हुआ था। इसलिए अन्य लोग सत्ता पर बैठने की अपनी-अपनी दावेदारी ठोंक रहे थेबहरहाल, ‘अली आदिल शाह प्रथम’ के भतीजे ‘इब्राहिम आदिल शाह’ को अंतत बीजापुर का ताज पहनाया गया वह युवा थे किन्तु उनकी कुशलता पर किसी को संदेह नहीं था।

यहां तक कि चाँद बीबी को भी शायद इसी कारण उन्होंने इब्राहीम को गददी पे बिठाकर बीजापुर सल्तनत का प्रशासन शुरू किया हालांकि, उनको अबला समझकर राज्य के कुछ खास लोगों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। जिसे उन्होंने अपने कौशल से धराशायी कर दिया। इसी बीच उनके पिता के राज्य अहमदनगर के निजाम की हत्या के बाद वहां की सत्ता का विवाद गहरा गया। वहां से चांदबीबी को खासा लगाव था, इसलिए वहां की मदद के लिए वह तुरंत रवाना हो गईं। 

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Chand Bibi और मुगलो के बिच युद्ध –

पहुंचकर पता चला कि दिल्ली का शहजादा मुराद अपने सेना बल के साथ अहमदनगर की तरफ बढ़ रहा है। चांद बीबी ने बुद्धिमानी और साहस का परिचय देते हुए, अहमदनगर का नेतृत्व किया। उन्होंने मुकाबले के लिए रणनीति तैयार की और उसका प्रयोग करते हुए मुगलों के दांत खट्टे कर दिए। वह अहमदनगर किले को बचाने में तो सफल रहीं लेकिन मुगलों के साथ दुश्मनी मोडली यह सिलसिला नहीं रुका और बाद में ‘शाह मुराद’ ने चांदबीबी के पास एक दूत भेजा उसने पीछे हटने की बात लिखी, लेकिन चांदबीबी नहीं मानेगी तो उसने आगे बढ़ने का फैसला किया चांदबीबी उसकी योजना समज चुकीं थीं।

उन्होंने देर न करते हुए भतीजे इब्राहिम आदिल शाह और गोलकोण्डा के ‘मुहम्मद क़ुली क़ुतुब शाह’ से अपील की कि दोनों एक साथ मिल जाए। इब्राहिम ने अपने साथी सोहेल खान के साथ मिलकर 25,000 लोगों का दल बनाया साथ ही नलदुर्ग में येख्लास ख़ान की शेष की सेना के साथ गठबंधन कर लिया वहीं गोलकॉन्डा की सेना में 6,000 लोग इस युद्ध के लिए तैयार हुई।

चाँद बीबी के पास अच्छी सेना थी जो मुगलों को हराने में सक्षम थी। सब कुछ अच्छा हो रहा था। तब उनका विश्वसनीय मुहम्मद खान मुगलों से जा मिला नतीजा रहा कि चांदबीबी की सेना कमजोर पड़ गई। हालांकि उनकी तरफ से सोहेल खान पूरी ताकत के साथ मुगल सेना से लड़ते रहे वह बात और है कि इस युद्ध को वह चांदबीबी के हक में नहीं कर सके और हार गए। 

Chand Bibi का साम्राज्य –

1.बीजापुर सल्तनत :

chand bibi Biography के बारे में जाने तो उनका विवाह बीजापुर सल्तनत के अली आदिल शाह प्रथम से हुई थी। चाँद बीबी के पति द्वारा बीजापुर की पूर्वी सीमा के पास एक कुएं (बावड़ी) का निर्माण कराया गया और उस बावड़ी का नाम चांद बावड़ी रखा गया था। अली आदिल शाह के पिता, इब्राहिम आदिल शाह प्रथम ने सुन्नी रईसों, हब्शियों और डेक्कन के बीच शक्ति का विभाजन कर दिया था। तथापि, अली आदिल शाह ने शिया का पक्ष लिया था। 1580 में उनकी मृत्यु के पश्चात, शिया रईसों ने अपने नौ वर्षी के भतीजे इब्राहिम आदिल शाह द्वितीय को शासक घोषित कर दिया। डेक्कन सेनानायक कमाल ख़ान ने राज्य पर अपना हक़ जमा लिया और संरक्षक बन गए।

कमाल ख़ान ने चाँद बीबी का अनादर किया चाँद बीबी को ऐसा ऐसास हुवा था कि कमाल ख़ान की सिंहासन कब्ज़ा करने की महत्वाकांक्षा है। चांद बीबी ने अन्य सैनिक हाजी किश्वर ख़ान की मदद से कमाल ख़ान के सामने युद्धा करने की साजिश रची कमाल ख़ान उस समय कब्जे में हो गए जब वो भाग रहे थे और उन्हें किले में मौत की सजा दी गयी। किश्वर ख़ान इब्रहिम के दूसरे संरक्षक बन गए। धरासेओ में अहमदनगर सल्तनत के सामने एक युद्व में उनके नेतृत्व में बीजापुर की सैनिको ने दुश्मन सेना के सब तोपखानों और हाथियों पर कब्जा कर लिया।

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किश्वर ख़ान को दी चुनौती –

किश्वर ख़ान ने बीजापुरी सैनिको को आदेश दिया कि वे कब्जा हो गए सभी हाथियों को छोड़ दें। हाथी बेहद महत्वपूर्ण थे और सैनिको ने भयंकर अपराध के रूप में लिया। चांद बीबी के साथ उन्होंने बांकापुर के सेनानायक मुस्तफा ख़ान की मदद से किश्वर ख़ान को खत्म करने की साजिस की।  किश्वर ख़ान के जासूसों ने साजिश के बारे में बताया। किश्वर ख़ान ने मुस्तफा ख़ान के खिलाफ अपने सैनिकों को भेजा जो लड़ाई में पकड़ के मार दिए गए।

चांद बीबी ने किश्वर ख़ान को चुनौती दी लेकिन उन्हें सतारा किले में कैद कर लिया। अपने आप को राजा घोषित करने की कोशिश की किश्वर ख़ान बाकी सेनानायकों के बीच अलोकप्रिय हो गया।  वह वहा से भागने के लिए मजबूर हो गया जब हब्शी सेनानायक इखलास ख़ान के नेतृत्व में एक संयुक्त सैनिको ने बीजापुर पर युद्व कर दिया। सेना में तीन हब्शी रईसों, इखलास ख़ान, हामिद ख़ान और दिलावर ख़ान की सेना मौजूद थी।

किश्वर ख़ान ने अहमदनगर में किस्मत आजमाने की कोशिश की और गोलकुंडा के लिए भाग गए। निर्वासन में मुस्तफा ख़ान के एक रिश्तेदार द्वारा मार दिए गए। बाद चांद बीबी ने थोड़े समय के लिए एक संरक्षक के रूप में काम किया। इखलास ख़ान संरक्षक बन गए लेकिन वह शीघ्र ही चांद बीबी द्वारा बर्खास्त कर दिए गए। बाद में उन्होंने फिर से अपनी तानाशाही शुरू कर दी जिसे जल्द ही अन्य हब्शी सेनानायकों द्वारा चुनौती दी गयी।

बीजापुर पर अधिकार –

बीजापुर में स्थान का लाभ उठाते हुए अहमदनगर के निजाम शाही सुल्तान ने गोलकुंडा के कुतुब शाही के साथ मित्रता करके बीजापुर पर युद्व कर दिया। बीजापुर में मौजूद सैनिक संयुक्त हमलें का सामना करने के लिए पर्याप्त नहीं थे। हब्शी सैनिको को एहसास हुआ कि वे अकेले शहर की रक्षा नहीं कर सकतें और उन्होंने चांद बीबी को अपना इस्तीफा दे दिया।

चांद बीबी द्वारा चुने गई एक शिया सेनानायक अबू-उल-हसन, ने कर्नाटक में मराठा सेना को बुलाया। मराठों ने आक्रमणकारियों की आपूर्ति लाइनों पर हमला कर दिया और मजबूर होकर अहमदनगर-गोलकुंडा की संयुक्त सेना वापस लौट गयी। फिर इखलास ख़ान ने बीजापुर पर अधिकार पाने के लिए दिलावर ख़ान पर हमला कर दिया। हालांकि, वह हार गए थे और 1582 से 1591 तक के लिए दिलावर ख़ान संरक्षक बन गए। जब बीजापुर राज्य में शांति बहाल हुई तो चांद बीबी अहमदनगर में लौट आई। 

2 अहमदनगर सल्तनत :

Information about chand bibi in hindi देखे तो 1591 में मुगल सम्राट अकबर ने चारों डेक्कन रियासतों को अपनी सर्वोच्चता को अपना ने के लिए कहा सभी रियासतों ने आदेश का पालन को टाल दिया। अकबर के राजदूत 1593 में वापस आ गये । 1595 में, बीजापुर के शासक इब्राहिम शाह, अहमदनगर से 40 मील दूर एक बहोत कठिन कार्रवाई में मारे गए। मृत्यु के बाद लोगों ने महसूस किया कि चांद बीबी (उनके पिता की चाची) के संरक्षण के तहत उनके पुत्र बहादुर शाह को राजा घोषित करना चाहिए।

लेकिन डेक्कन मंत्री मियां मंजू ने 6 अगस्त 1594 को शाह ताहिर के बारह वर्षीय बेटे अहमद शाह द्वितीय को राजा घोषित कर दिया। इखलास ख़ान के नेतृत्व में अहमदनगर के हब्शी रईसों ने उसका का विरोध किया। रईसों के मध्य बढते असंतोष ने मियां मंजू को इस बात के लिए प्रेरित किया कि वे अकबर के पुत्र शाह मुराद (जो गुजरात में था) को अहमदनगर में अपनी सेना लाने के लिए आमंत्रित करे मुराद मालवा आये जहां वे अब्दुल रहीम खान-ए-खाना की नेतृत्व वाली मुग़ल सेना में शामिल हो गए।

Chand Bibi ने बहादुर शाह का राज्याभिषेक किया –

Bibi chand in hindi में आपको बतादे की राजा अली ख़ान मांडू में उनके साथ शामिल हो गए। संयुक्त सेना अहमदनगर की ओर बढ गयी। हालांकि जब मुराद अहमदनगर के लिए जा रहे थे उस समय कई कुलीन व्यक्तियों ने इखलास ख़ान को छोड़ दिया और मियां मंजू के साथ शामिल हो गए। मियां मंजू ने इखलास ख़ान और अन्य विरोधियों को हरा दिया। मुगलों को आमंत्रित करने पर खेद व्यक्त किया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

उन्होंने चांद बीबी से अनुरोध किया कि वे संरक्षण स्वीकार कर ले और वे अहमद शाह द्वितीय के साथ अहमदनगर से बाहर चले गए। इखलास ख़ान भी पैठान भाग गए जहां मुगलों ने उन पर हमला किया ओर वे हार गए। चाँद बीबी ने प्रतिनिधित्व स्वीकार कर लिया और बहादुर शाह को अहमदनगर का राजा घोषित कर दिया।

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3 अहमदनगर की रक्षा :

Ahmednagar history in hindi देखे तो नवम्बर 1595 में अहमदनगर पर मुगलों ने हमला कर दिया चांद बीबी ने अहमदनगर में नेतृत्व किया और अहमदनगर किले का सफलतापूर्वक बचाव किया बाद में शाह मुराद ने चांद बीबी के पास एक दूत भेजा और बरार के समझौते के बदले में घेराबंदी हटाने की पेशकश की चांद बीबी के सैनिक भुखमरी से बेहाल थे । 1596 में उन्होंने बरार मुराद, जिसने युद्ध से सेना हटा लेने का आदेश दे दिया था, को सौंपकर शांति स्थापित करने का फैसला किया।

chand hindi bibi ने अपने भतीजे बीजापुर के इब्राहिम आदिल शाह द्वितीय और गोलकुंडा के मुहम्मद कुली कुतुब शाह से विनत्ति कि वे मुगल सेना के सामने युद्ध करने के लिए एकजुट हो जाएं। इब्राहिम आदिल शाह द्वितीय ने सोहिल ख़ान के नेतृत्व में 25,000 आदमियों का एक दल भेजा जिसके साथ नलदुर्ग में येख्लास ख़ान की बहोत सारि बची सेना शामिल हो गयी। बाद में उनके साथ गोलकुंडा के 6,000 पुरुषों का एक दल शामिल हो गया चाँद बीबी ने मुहम्मद ख़ान को मंत्री के रूप में नियुक्त कर दिया परन्तु वह विश्वासघाती साबित हुआ।

ख़ान खनन से एक प्रस्ताव के तहत उसने मुगलों को पूरी सल्तनत सौपने की पेशकश की इस बीच ख़ान खनन ने उन जिलों पर कब्जे करना शुरू कर दिया जो बरार के समझौते में शामिल नहीं थे सोहिल ख़ान जो बीजापुर से वापस लौट रहा था उसे वापस लौट ने से खनन ख़ान की मुगल सेना पर हमले का आदेश दिया गया।

अहमदनगर किले को गेर लिया –

ख़ान खनन और मिर्जा शाहरुख के नेतृत्व में मुगल सेनाओं ने सहपुर में मुराद को छोड़ दिया।

गोदावरी नदी के किनारें सोन्पेत (या सुपा) के नजदीक बीजापुर, अहमदनगर और

गोलकुंडा के संयुक्त बलों का सामना करना पड़ा।

08-09 फ़रवरी 1597 की एक भीषण लड़ाई में मुगल जीते अपनी जीत के बावजूद

मुगल सेना हमले को आगे बढ़ाने के हिसाब से कमजोर थी और सहपुर लौट गयी।

उनका एक कमांडर, राजा अली ख़ान लड़ाई में मारा गया था।

कमांडरों के बीच बहुत विवाद थे।

विवादों के कारण, ख़ान खनन को अकबर ने 1597 में वापस बुला लिया था।

उसके शीघ्र बाद ही राजकुमार मुराद की मृत्यु हो गई अकबर ने फिर अपने बेटे दनियाल

और ख़ान खनन को नए सैनिकों के साथ भेजा अकबर ने खुद उनका पीछा किया

अहमदनगर में, चांद बीबी के अधिकारों का नवनियुक्त मंत्री नेहंग ख़ान द्वारा विरोध रहा ।

नेहंग ख़ान ने ख़ान खनन की अनुपस्थिति और बरसात के मौसम का फायदा उठाते हुए।

बीड के शहरों पर पुनः कब्जा कर लिया।

1599 में अकबर ने बीड के राज्यपाल को कार्य मुक्त करने के लिए।

दनियाल, मिर्जा यूसुफ ख़ान और ख़ान खनन को भेजा नेहंग ख़ान भी जयपुर कोटली मार्ग को जप्त करने के लिए। 

क्योंकि उसे उम्मीद थी कि वहां उसे मुग़ल मिलेंगे हालांकि दनियाल ने पास को छोड़ दिया

और वह अहमदनगर किले पर पहुंच गया। उसकी सेना ने किले को घेर लिया।

चाँद बीबी की मृत्यु –

  • who killed chand bibi in hindi 
  • रानी चाँद बीबी ने फिर किले का बहादुरी से बचाव किया हालांकि वह प्रभावी प्रतिरोध नहीं कर पाई।
  • उन्होंने दनियाल के साथ उनकी शर्तों पर बातचीत करने का फैसला किया।
  • हामिद ख़ान एक रईस अतिरंजित हो गया था। 
  • यह खबर फैला दी कि चांद बीबी ने मुगलों के साथ संधि कर ली है।
  • एक दूसरे संस्करण के अनुसार जीता ख़ान जो चाँद बीबी का एक हिजड़ा सेवक था,
  • मुगलों के साथ बातचीत करने का उनका निर्णय एक विश्वासघात था।
  • उसने यह खबर फैला दी कि चांद बीबी एक देशद्रोही है।
  • चांद बीबी को फिर उनकी ही सेना की एक क्रुद्ध भीड़ ने मार डाला। 

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चाँद बीबी के कुछ रोचक तथ्य –

  • 1580 ई. में पति की मृत्यु हो जाने के बाद चाँद बीबी बेटे
  • इब्राहीम आदिलशाह द्वितीय की अभिभाविका बन गयी।
  • बीजापुर का प्रशासन मंत्रियों के द्वारा चलाया जाता रहा।
  • 1584 ई. में चाँद बीबी बीजापुर से अपनी जन्म स्थान अहमदनगर वापस लोटा गयी।
  • वापस कभी चांद बीबी बीजापुर नहीं लोटी।
  • 1593 ई. में मुग़ल बादशाह अकबर की सैनिको ने अहमदनगर राज्य पर युद्व किया।
  • दुख की इस समय में चाँद बीबी ने अहमदनगर की सेना का नेतृत्व किया और
  • अकबर के बेटे शाहजादा मुराद की सैनिक से बहादुरी के साथ सफलतापूर्वक मोर्चा लिया।
  • लेकिन सीमित साधनों के वजह अंत में चाँद बीबी को
  • मुग़लों के हाथ बरार सुपुर्द कर उनसे मित्रता कर लेनी पड़ी।
  • परंतु इस मित्रता के बाद जल्दी ही युद्व फिर शुरू हो गई। 
  • chand bibi की सुरक्षा व्यवस्था इतनी कठिन थी।
  • कि उसके जीवित रहते मुग़ल सेना अहमदनगर पर क़ब्ज़ा जमा कर सकी नहीं थी ।
  • परन्तु एक बहोत ज्याद भीड़ ने चाँद बीबी को मार डाला था। 
  • और इसके पश्यात अहमदनगर क़िले पर मुग़लों का क़ब्ज़ा हो गया।

Chand Bibi Video –

FAQ –

1 . चांद बीबी किस राज्य से थी ?

चांद बीबी अहमदनगर राज्य से थी

2 . Chand Bibi की मृत्यु कब हुई ?

चांद बीबी की 1599 को मृत्यु हुई थी 

3 . चांद बीबी के पिता का नाम क्या था ?

चांद बीबी के पिता नाम हुसैन निजाम शाह प्रथम था 

4 .चांद बीबी के माता का नाम क्या था ?

चांद बीबी के माता का नाम खुंजा हुमायु था। 

5 .chand bibi kon thi ?

चाँद बीबी कौन थी तो आपको बतादे की अहमदनगर की महारानी थी। 

6 .चांद बीबी कहां की शासिका थी ?

Rani chand bibi अहमदनगर की शासिका थी। 

7 .चांद बीबी कहां की रानी थी ?

महिला विरांगना चांद बीबी अहमदनगर की महारानी थी। 

8 .चाँद बीबी का विवाह किससे हुआ ?

Ali Adil Shah I से अहमदनगर चांद बीबी का विवाह हुआ था। 

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Conclusion –

आपको मेरा chand bibi Biography बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। 

लेख के जरिये हमने चाँद बीबी हिस्ट्री इन हिंदी और

Chand bibi playing polo painting से सम्बंधित जानकारी दी है।

अगर आपको अन्य अभिनेता के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है।

तो कमेंट करके जरूर बता सकते है।

हमारे आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द।

Note –

आपके पास चांदबीबी इतिहास की जानकारी, chand bibi mahal history in hindi

या Chand bibi information in hindi की कोई जानकारी हैं।

या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो दिए गए सवालों के जवाब आपको पता है।

तो तुरंत हमें कमेंट और ईमेल मैं लिखे हम इसे अपडेट करते रहेंगे धन्यवाद 

1 .Chand bibi ki hatya kisne ki thi ?

2 .अहमदनगर की रानी कौन थी ?

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