Tyagaraja Biography In Hindi – त्यागराज का जीवनी परिचय

नमस्कार मित्रो आज के हमारे आर्टिकल  में आपका स्वागत है आज हम Tyagaraja Biography In Hindi में कर्नाटक संगीत के संगीत ताजाज्ञ त्यागराज का जीवन परिचय बताने वाले है। 

त्यागराज ‘कर्नाटक संगीत’ के सबसे उत्तम ज्ञाता और भक्ति मार्ग के सबसे उत्तम प्रसिद्ध कवि हे ,त्यागराज हर एक कृतियों में भगवान राम के साथ अपने खुद का अलग व्यक्तिगत सम्बन्ध बताया हे मनो कभी मित्र, तो कभी कभी मालिक, कभी पिता और कभी सहायक वगेरे जैसे अपने अलग अलग व्यक्तिगत सम्बन्ध बताये हे जो कुछ भी त्यागराज ने रचा है, आज tyagaraja parents ,tyagaraja descendants और when was tyagaraja born ? की जानकारी देने वाले है।  

उनकी रचनाये अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में है ,उसमें प्रवाह भी ऐसा है जो संगीत प्रेमियों को अपनी ओर अनायास ही खींच लेता है ,आध्यात्मिक रूप से त्यागराज उन लोगों में से थे, जिन्होंने भक्ति के सामने किसी बात की परवाह नहीं की थी। tyagaraja wife का नाम परवातम्मा था। त्यागराज का जन्म एक हिन्दू ब्राह्मण परिवार में हुआ था ,उसकी वजह से त्यागराज को बचपन से ही भक्ति गीतों के प्रति बहुत ही लगाव हो गया था। तो चलिए एक महान कवी,भक्त और संगीत कर के जीवन से परिचित करवाते है। 

  नाम   त्यागराज
  उपनाम   ककर्ला त्यागब्रह्मन
  जन्म   4 मई, 1767
  जन्मस्थान   तमिलनाडु के तंजावुर ज़िले 
  पिता   रामब्रह्मम
  माता   सीताम्मा
  धर्म   हिन्दू
  राशि फल   वृषभ
  राष्ट्रीयता   भारतीय
  पत्नी   परवातम्मा
  व्यवसाय   शास्त्रीय संगीतकार, महान् कवि व रचनाकार
  संगीत शैली   कर्नाटक संगीत
  मृत्यु   6 जनवरी 1847
  मृत्यु स्थान   तिरुवारूर, तंजावुर, तमिलनाडु, भारत

Tyagaraja Biography In Hindi –

त्यागराज का जन्म 4 मई, 1767 को तमिलनाडु के तंजावुर ज़िले में स्तिथ तिरूवरूर जगह पर हुआ था. उनका जन्म एक नेक खानदान में हुवा था त्यागराज की माता का नाम ‘सीताम्मा’ था और त्यागराज के पिता का नाम ‘रामब्रह्मम’ था त्यागराज ने उनकी हर एक से बढ़कर एक कृति में बताया है कि- ‘सीताम्मा मायाम्मा श्री रामुदु मा तंद्री’ अर्थात ‘सीता मेरी मां और श्री राम मेरे पिता हैं। 

इसके जरिए शायद वह दो बातें स्पष्ट कहना चाहते थे- एक ओर वास्तविक माता-पिता के बारे में बताते हैं तो दूसरी ओर प्रभु राम के प्रति अपनी आस्था प्रदर्शित करते हैं ,त्यागराज ने श्रीराम को समर्पित भक्ति गीतों की बहुत ही अच्छी रचना की थी. त्यागराज के सबसे महत्व पूण गीत ज्यादातर धार्मिक आयोजनों में गाए जाते हैं। 

त्यागराज ने अपने समाज और साहित्य को भी समृद्ध बनाए हे और तो और त्यागराज की विद्वता हर एक कृति में झलकती है और ‘पंचरत्न’ कृति को त्यागराज की सर्वश्रेष्ठ रचना भी कहा जाता है. और तो और यह भी जाता है कि त्यागराज के जीवन का कोई भी पल भगवान श्रीराम से जुदा नहीं था। त्यागराजका जन्म अपने नाना गिरिराज कवि के घर पे ही हुवा था जो तंजावुर के महाराजा के दरबारी कवि और संगीतकार थे. यह भी कहा जाता है कि इनके कवि और संगीतकार बनने में इनके नाना का बचपन से ही विशेष योगदान था।

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त्यागराज का विवाह – Tyagaraja marriage

Tyagaraja जब 18 वर्ष के थे तब उनका विवाह परवातम्मा नामक लड़की से वर्ष 1784 में हुआ है लेकिन शायद उनकी किस्मत में परवातम्मा नहीं थीऔर उसकी अचानक मृत्यु वर्ष 1789 में ही हो गई थी फिर त्यागराज ने अपनी दूसरे लग्न वर्ष 1790 में पुन विवाह पूर्व पत्नी की बहन कमालाम्बा के साथ कर लिया और विवाह के कुछ साल बाद इनको एक लड़की पैदा हुई थी। 

उसका नाम उन्होंने सीतालक्ष्मी रखा था. बाद में किसी कारणवश त्यागराज ने घर त्याग दिया और भगवान श्री राम की सेवा में अपने आप को समर्पित कर दिया ,त्यागराज एक प्रकांड विद्वान और कवि थे. ये संस्कृत, ज्योतिष तथा अपनी मातृभाषा तेलुगु के ज्ञानी पुरुष थे। 

संगीत के प्रति त्यागराज लगाव –

त्यागराज को संगीत के प्रति बचपन से ही बहुत प्यार और लगाव था.त्यागराज को बहुत ही कम उम्र में ही ये सोंती वेंकटरमनैया के शिष्य बनना पड़ा था , जो की अभी के समय के बहुत ही उच्चकोटि के संगीत के विद्वान माने जाते थे , त्यागराज ने अपने औपचारिक संगीत शिक्षा के दौरान इन्होंने शास्त्रीय संगीत के तकनीकी पक्षों को विशेष महत्व नहीं दिया और अध्यात्मिक तथ्यों पर अपना ध्यान केन्द्रित कर दिया था। 

त्यागराज अपने गीत-संगीत का उद्देश्य शुद्ध रूप से धार्मिक और सांस्कृतिक था. किशोरावस्था में ही इन्होंने अपने पहले गीत ‘नमो नमो राघव’ की रचना की थी ,त्यागराज ने कुछ सालो के बाद जब संगीत की शिक्षा अपने गुरु से प्राप्त कर ली और तो और त्यागराज सोंती वेंकटरमनैया के द्वारा फीर से संगीत की प्रस्तुति के लिए बुलाया गया था इस समारोह में इन्होंने अपने गुरु को अपने संगीत प्रस्तुति से मंत्रमुग्ध कर दिया था। 

जिससे प्रसन्न होकर उन्होंने त्यागराज को राजा की तरफ से दरबारी कवि और संगीतकार के रूप में कार्य करने के लिए लिए निमंत्रण दे डाला. परन्तु इस प्रस्ताव को त्यागराज ने अस्वीकार कर दिया। त्यागराज ने दक्षिण भारतीय संगीत शास्त्रीयके विकास में अपनी अहम भूमिका निभाए हे और तो और शास्त्रीय संगीत में अपना योगदान करने वाले त्यागराज की रचनाएं आज भी पुरे इण्डिया में काफ़ी लोकप्रिय हैं। 

पुरे इण्डिया ने धार्मिक आयोजनों तथा त्यागराज के सम्मान में आयोजित कार्यक्रमों में इनका खूब गायन मनाई जाते है त्यागराज ने मुत्तुस्वामी दीक्षित और श्यामा शास्त्री के साथ कर्नाटक संगीत को नयी दिशा प्रदान की. इन तीनों के योगदान को देखते हुए ही इन्हें दक्षिण भारत में ‘त्रिमूर्ति’ की संज्ञा से विभूषित किया गया है। 

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त्यागराज की दक्षिण भारत की यात्रा – 

त्यागराज की प्रतिभा से तंजावुर नरेश बहुत प्रभावित हुवे थे और उन्होंने त्यागराज को अपने दरबार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। और भगवान श्री राम की भक्ति में डूबे त्यागराज ने तंजावुर नरेश को आकर्षक प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। त्यागराज राजा के प्रस्ताव को अस्वीकार कर प्रसिद्ध कृति “निधि चल सुखम” यानी ‘क्या धन से सुख की प्राप्ति हो सकती है’ की रचना की थी।

ऐसा भी कहा जाता है कि त्यागराज के भाई ने श्रीराम की वह मूर्ति, जिसकी पूजा-अर्चना आदि त्यागराज किया करते थे, पास ही कावेरी नदी में फेंक दी थी। त्यागराज अपने इष्ट से अलगाव को बर्दाश्त नहीं कर सके और घर से निकल पड़े।

त्यागराज की कृतियाँ –

Tyagaraja  ने अपने जीवन के दौरान क़रीब 600 कृतियों की रचना भी की है और उसके बावजूद भी तेलुगु में त्यागराज ने दो नाटक की रचना की थी (1 ) ‘प्रह्लाद भक्ति विजय’ और दूसरा ( 2 ) ‘नौका चरितम’ भी लिखी थी । त्यागराज ने ‘प्रह्लाद भक्ति विजय’ में पांच दृश्यों में 45 कृतियों का नाटकरचा हुवा हे , वहीं ‘नौका चरितम’ एकांकी है।

उनमे कुल 21 कृतियां उपलब्ध हैं। त्यागराज की विद्वता अपनी हर कृति में झलकती है। मानाकि ‘पंचरत्न’ कृति को उनकी सर्वश्रेष्ठ रचना कहा जाता है। सैंकड़ों गीतों के अलावा उन्होंने उत्सव संप्रदाय ‘कीर्तनम’ और ‘दिव्यनाम कीर्तनम’ की भी रचनाएं कीं। उन्होंने संस्कृत में भी गीतों की रचना की। हालांकि उनके अधिकतर गीत तेलुगु में हैं ,त्यागराज ने जिसकी भी रचना की हे , वो सब कुछ उनके सर्वश्रेष्ठ रूप में है। 

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त्यागराज की मुत्यु -Tyagaraja’s death 

ऐसा भी माना जाता है की उसमें प्रवाह भी ऐसा है, जो संगीत के आसिको को अपनी ओर खींच लेता है। आध्यात्मिक रूप से त्यागराज उन लोगों में थे, जिन्होंने भक्ति के सामने किसी बात की परवाह नहीं की। वह अपनी कृतियों में श्रीराम को मित्र, मालिक, पिता और सहायक बताते थे। 6 जनवरी, 1847 को त्यागराज ने समाधि ले ली।

Tyagaraja Biography Video –

Tyagaraja Interesting Fact –

  • त्यागराज ने समाज एवं साहित्य के साथ-साथ कला को भी समृद्ध किया। वह बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे।
  • वह तिरुवैयारू में अंबाल देवी के मंदिर में भजन गाया करते थे। 
  • उन्होंने अपनी एक रचना में यह कहा है कि “सीताम्मा मायाम्मा श्री रामुदु मा तंद्री” जिसका अर्थ सीता मेरी मां और श्री राम मेरे पिता हैं।
  • त्यागराज अपनी कृतियों में भगवान श्री राम को मित्र, मालिक, पिता और सहायक बताते हैं।
  • त्यागराज रचित कृतियों की बात करे तो उन्होंने तक़रीबन 600 से भी ज्यादा रचना लिखी है, इसके आलावा तेलुगू में दो नाटक लिखे है। 

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Tyagaraja Questions –

1 .त्यागराज का मूल नाम क्या था ?

त्यागराज का मूल नाम ककर्ला त्यागब्रह्मन था। 

2 .त्याग राज जी के पिता का क्या नाम था ?

त्यागराज के पिता का नाम रामब्रह्मम था। 

3 .त्याग राज जी की माता का क्या नाम था ?

उनकी माता का नाम सीताम्मा था। 

4 .त्यागराज की मृत्यु कब हुए थी ?

त्यागराज की मृत्यु 6 जनवरी 1847 को हुए थी। 

5 .त्यागराज का समाधि स्थान कहा पर हे ?

त्यागराज का समाधि स्थान  तिरुवारूर, तंजावुर, तमिलनाडु, भारत है। 

6 .त्यागराज का जन्म तंजावुर में हुआ था तो यह बताएं कि तंजावुर किस राज्य में स्थित है ?

तंजावुर तमिलनाडु के तिरुवारूर में उपस्थित है। 

7 .त्यागराज ने किस महान विभूति को अपनी रचनाओं में नारद माना ?

 इसा कहा जाता है की देव ऋषि नारद ने इन्हें शास्त्रीय संगीत के प्रचार प्रसार के लिए ‘स्वरार्णव’ नाम का एक ग्रंथ भेंट किया था।

8 .त्याग राज आराधना महोत्सव का आयोजन कहां किया गया था ?

तंजावुर जिले के थिरुवैयारु में त्यागराज आराधना  महोत्सव173वें का आयोजन किया गया था। 

9 .मुथुस्वामी दीक्षितकर संगीत की किस पद्धति से सम्बंधित हैं?

वह दक्षिण भारतीय कर्नाटक संगीत शैली के महान प्रतिपादक थे। 

10 .त्यागराज की मृत्यु कारण क्या था ?

त्यागराज की मृत्यु कारण स्वाभाविक मृत्यु ही था। 

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निष्कर्ष – 

दोस्तों आशा करता हु आपको मेरा यह आर्टिकल Tyagaraja Biography In Hindi बहुत अच्छी तरह पसंद आया होगा। इस लेख के जरिये  हमने tyagaraja aradhana और tyagaraja and annamacharya से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दे दी है अगर आपको इस तरह के अन्य व्यक्ति के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है तो आप हमें कमेंट करके जरूर बता सकते है। और हमारे इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे। जय हिन्द। 

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