Rani Karnavati Biography in Hindi | रानी कर्णावती की जीवनी

नमस्कार मित्रो आज के हमारे आर्टिकल में आपका स्वागत है ,आज हम Rani Karnavati Biography in Hindi में आपको राजस्थान  मेवाड़ की महारानी रानी कर्णावती के जीवन संघर्ष की कहानी बताने वाले है। 

रानी कर्णवती चित्तौड़गढ़ के सिसोदिया वंशीय राजा राणा साँगा (राणा संग्राम सिंह) की विधवा महारानी थीं। उनके दो पुत्र जिनके नाम राणा उदयसिंह और राणा विक्रमादित्य था। और महाराणा प्रताप की दादी थी। अपने आखरी वक्त पे रानी कर्णावती का जौहर अग्नि कुंड में कर लिया था। जब उनके मेवाड़ राज्य पे जब बहादुरशाह ने हमला बोल दिया तब उन्होंने हुमायु के साथ संधि का प्रस्ताव रखा था।

जिस समय सम्राट हुमायूँ अपने राज्य विस्तार का प्रयत्न कर रहा था तब गुजरात का शासक बहादुर शाह भी अपनी शक्ति बढ़ाने में लगा हुआ था। उस वक्त मेवाड़ की महारानी का शाशन ही राजस्थान में चल रहा था। आज आपको rani karnavati story में did humayun help rani karnavati ?,rani karnavati birth place ? और how did rani karnavati died की जानकारी देने वाले है। तो चलिए कर्णावती की कहानी में रानी कर्णावती का जीवन परिचय बताने वाले है। 

MahaRani Karnavati Biography in Hindi –

 नाम रानी कर्णावती
 जन्म तिथि अज्ञात
 पति राणा साँगा
संतान राणा उदयसिंह और राणा विक्रमादित्य
कर्म भूमि मेवाड़
प्रसिद्धि मेवाड़ की रानी
नागरिकता भारतीय
मृत्यु कारण  अग्नि कुंड में जौहर कर लिया 
मृत्यु 8 मार्च, 1535 ई

रानी कर्णावती की जीवनी –

Rani Karnavati History in hindi
Rani Karnavati History in hindi

Rani Karnavati मेवाड़ की रानी थी। जिस समय हुमायूँ अपने राज्य विस्तार का प्रयत्न कर रहा था, गुजरात का शासक बहादुर शाह भी अपनी शक्ति बढ़ाने में लगा हुआ था। बहादुर शाह ने 1533 ई. में चित्तौड़ पर आक्रमण कर दिया। उसने राजनीतिक दूरदर्शिता का परिचय देते हुए हुमायूँ के सामने प्रस्ताव रखा कि हम परस्पर संधि करके अपने समान शत्रु बहादुर शाह का मिलकर सामना करें। ऐसा कहे तो गलत नहीं है की राजस्थान के मेवाड़ की रानी कर्णावती को कौन नहीं जानता।

एक ओर जहां मुगल सम्राट हुमायूं अपने राज्य का विस्तार करने में लगा था तो दूसरी ओर गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने 1533 ईस्वी में चित्तौड़ पर आक्रमण कर दिया था। Rani Karnawati चित्तौड़ के राजा की विधवा थीं। रानी के दो पुत्र थे राणा उदयसिंह और राणा विक्रमादित्य। रानी कर्णावती ने राजपूतों और मुस्लिमों के संघर्ष के बीच हुमायूं के सामने प्रस्ताव रखा कि हम परस्पर संधि करके अपने समान शत्रु बहादुरशाह का मिलकर सामना किया था ।

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Rani Karnavati (रानी कर्णावती का पारंभिक जीवन)

मुगल सम्राट हुमायूं ने रानी का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। हालांकि हूमायूं किसी को भी नहीं बख्शता था लेकिन उसके दिल में रानी कर्णावती का प्यार अच्छे से उतर गया और उन्होंने रानी का साथ दिया। हुमायूं को रानी ने अपना धर्मभाई बनाया था इसलिए हुमायूं ने भी अपना कर्त्वय निभाया और राज्य की रक्षा की पहले मुगल बादशाह बाबर ने 1526 में दिल्ली के सिंहासन पर कब्ज़ा कर लिया था। मेवाड़ के राणा सांगा ने उनके खिलाफ राजपूत शासकों का एक दल का नेतृत्व किया। लेकिन अगले वर्ष खानुआ की लड़ाई में वे पराजित हुये। इस युद्ध में राणा सांगा की मृत्यु हो गई थी। 

विधवा रानी कर्णावती और इनके बेटे राजा राणा विक्रमादित्य और राणा उदय सिंह थे। रानी कर्नावती ने अपने बड़े पुत्र विक्रम जित को राज्य सभालने को दिया । परंतु इतना बड़ा राज्य संभल ने के लिये अभी विक्रम जित की उम्र काफी छोटी थी । इस बीच गुजरात के बहादुर शाह द्वारा दूसरी बार मेवाड पर हमला किया गया था। जिनके हाथ विक्रम जित को पहले हार मिली थी। रानी के लिए यह बहुत चिंता का मामला था। Karnavati rani ने अपना राज्य की रक्षा करने के लिए राजपूत शासकों से अपील की। शासकों ने सहमति व्यक्त की लेकिन उनकी एकमात्र शर्त यह थी। 

रानी कर्णावती कौन थी –

रानी कर्णावती का इतिहास के बारे मे रूची रखने वालो के मस्तिष्क मे जरूर आता है। रानी कर्णावती जिन्हें एक और नाम रानी कर्मवती (karmavati) के नाम से भी जाना जाता है। रानी कर्णावती मेवाड़ के राजा राणा संग्राम सिंह की पत्नी थी।जिनका दूसरा नाम राणा सांगा है।

Rani karnavati images
Rani karnavati images

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Rani Karnavati And Humayun Story in hindi –

(रानी कर्णावती और हुमायूं) उस समय गुजरात का बादशाह बहादुर शाह था। उसे मेवाड़ की कमजोरी का पता चला। अब तो मेवाड की सैन्य शक्ति भी कमजोर हो गई थी। बहादुरशाह ने वहां की कमजोरी का फायदा उठाया। यह उसके लिए सुनहरा मौका था। मौका मिलते ही उसने मेवाड़ पर आक्रमण कर दिया। मेवाड़ की परिस्थिति बडी विकट हो गई, ऐसी दशा में राजमाता (Rani karmavati)ने अपनी राजनीतिक कुशलता का परिचय दिया। भारत की राजनीति उनकी रग रग में समाई हुई थी। वे राजनीतिक स्थिति से अच्छी तरह अवगत थी।

उन दिनों दिल्ली की गद्दी पर मुगल बादशाह हुमायूं का राज था। वह मेवाड़ से मेल मिलाप करने के लिए हर घडी तैयार रहता था। यह बात राजमाता भलीभांति जानती थी। जब संग्राम सिंह जिंदा थे, तब हुमायूं ने कई बार दोस्ती का हाथ बढ़ाया था। संग्राम सिंह को हुमायूं से दोस्ती करना पसंद नही था, इसलिए वे जीवन भर हुमायूं से जूझते रहे थे। वो दिन बडी खुशी का दिन था। जब राजमाता ने एक इतिहास रचा। ऐसा इतिहास, जो भाई बहनों के बंधन का प्रतीक बनकर रह गया।

राजमाता ने हुमायूं को अपना भाई मान लिया। राजमाता ने भाई के लिए रेशम के धागे भिजवाएं, उन्होंने अपने संदेश में कहा “मैं मुसीबत की घडी में हूं। बहादुरशाह ने हमारे राज्य पर आक्रमण कर दिया है। मेरी आपसे करबद्ध प्रार्थना है। मुझे बहादुरशाह से बचाओ। आज मैं तुम्हें अपना भाई मानती हूँ। मैं रेशम के धागे भेज रही हूँ। इन्हें अपनी कलाई पर सजा लेना।

Rani Karnavati ने हुमायु को राखी भेजी –

“मुझे उम्मीद है, आप अपना फर्ज अवश्य निभाओगे।

अपनी बहन की रक्षा करोगे। देखो मेरी उम्मीद को ठोकर मत लगाना।

भाई बहन के प्यार को एक ज्योति देना, जो हमेशा कायम रहे।

और सदा जलती रहे।दूत रेशम के धागे लेकर हुमायूं के पास पहुंचा।

हुमायूं खुश हुआ। उसने अपनी कलाई पर रेशम के धागे सजा लिए।

उसने संदेश में जवाब दिया “मै तुम्हें अपनी बहन स्वीकार करता हूं।

मै तुम्हारी रक्षा के लिए बहुत जल्द आऊंगा, घबराना नहीं। 

रेशम के धागे का फर्ज तुम्हारा यह भाई अवश्य निभाएगा|

Rani karnavati in hindi
Rani karnavati in hindi

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क्यों मनाया जाता है रक्षा बंधन का त्यौहार –

जब राजमाता को हुमायूँ का संदेश मिला, तब वे खुशी से फूली न समाई। उन्हें एक भाई का साथ जो मिल गया था। इससें राजमाता के हौसले बुलंद हो गए। इरादे अटूट हो गए, उनके अंदर एक नई शक्ति का संचार हुआ। हुमायूँ का संघर्ष सिर्फ दो राज्यों से था। पहला मेवाड़ से, दूसरा गुजरात से। कर्मवती जब हुमायूँ की बहन बनी, तभी स्पष्ट हो गया कि दोनो राज्यों में परस्पर सहयोग की नीव डालने का मौका उन्हें मिल गया है। Rani Karnavati हिन्दू थी। हुमायूँ मुगल था। पहली बार किसी हिन्दू महिला ने मुगल शासक को भाई बहन के बंधन मे बांधा था। इतना ही नही, रानी ने एक तीर से दो निशाने लगाए थे।

एक ओर हुमायूँ को भाई बनाया, दूसरी ओर हिन्दू मुगल के बीच की धार्मिक कट्टरता को खत्म करने की कोशिश की। रानी चाहती थी सब एक जुट होकर रहे।राजमाता ने मेवाड़ के जागीरदारों और सूरवीर सामंतों को एकत्र किया। राजमाता ने उन्हें भारत मां की रक्षा करने के लिए कहा। उन्हें जी जान से तैयार रहने को कहा। राजमाता ने मेवाड़ के सामंतों का आह्वान करते हुए कहा चित्तौड़ का किला किसी राजा का नही है। किसी रानी का भी नही है। वह किला हम सबका है। हम सब की मान मर्यादा का प्रतीक है।अकेला राजा उसकी रक्षा नही कर सकता। अकेली रानी उसकी रक्षा नही कर सकती।

Rani Karnavati History In Hindi –

रानी कर्णावती के रोचक तथ्य –

  • राजपूत रानी कर्णावती राणा विक्रमादित्य और राणा उदय सिंह की माँ
  • और भारत के सबसे प्रतापी वीर महाराणा प्रताप की दादी थीं। 
  • मुग़ल सम्राट हुमायूं और राजपूत रानी कर्णावती की ये
  • कहानी शुद्ध भाई बहन के प्यार का प्रतीक है।
  • हूमायूं ने अपने सैनिकों को युद्ध बंद करने का आदेश दिया था।
  • क्योकि कर्णावती को अपनी बहन का दर्जा दिया और उम्रभर रक्षा का वचन दिया था। 
  • राजपूत रानी कर्णावती की मौत अग्नि कुंड में जौहर कर लेने की वजह से हुई थी।  

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Rani Karnavati FAQ –

Q : रानी कर्णावती हुमायूँ का क्या रिस्ता था ?

Ans : हुमायूँ और रानी कर्णावती के बिच भाई बहन का रिस्ता था।  

Q : कर्मवती कहाँ की रानी थी?

Ans : रानी कर्णावती मेवाड़ की रानी थी ,कर्मवती उनका बचपन का नाम था। 

Q : कर्णावती किसकी पत्नी थी?

Ans : कर्णावती मेवाड़ के राजा राणा संग्राम सिंह की पत्नी थी।

Q : रानी कर्णावती के पति का क्या नाम था?

Ans : रानी कर्णावती राजस्थान के मेवाड़ के राजा राणा संग्राम सिंह की पत्नी थी।

Q : रानी कर्णावती ने हुमायूं को राखी क्यों भेजी?

Ans : महारानी कर्मावती ने हुमायूं को राखी भेजी इसका मुख्य कारन बहादुरशाह ने उनके राज्य पर हमला करदिया था।

Rani karnavati photo
Rani karnavati photo

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Conclusion –

दोस्तों आशा करता हु आपको मेरा यह आर्टिकल Rani Karnavati Biography in Hindi बहुत अच्छी तरह से समज और पसंद आया होगा। इस लेख के जरिये  हमने rani karnavati death reason और rani karnavati humayun से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दी है। अगर आपको इस तरह के अन्य व्यक्ति के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है। तो आप हमें कमेंट करके जरूर बता सकते है। और हमारे इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द ।

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