Rani Padmavati Biography In Hindi – रानी पद्मावती की जीवनी

नमस्कार मित्रो आज के हमारे लेख में आपका स्वागत है ,आज हम Rani Padmavati Biography In Hindi में एक वीर, साहसी, स्वाभिमानी हिन्दू राजपूत महारानी जिन्होंने अपनी रक्षा हेतु अग्नि में अपने प्राणों की आहुति देदी ऐसी रानी पद्मावती का जन्म परिचय बताने वाले है। 

रानी पद्मिनी (पद्मावती) का नाम भारत नहीं बल्कि पुरे विस्वा में बड़े आदर और सन्मान से लिया जाता है ,जिन्होंने राष्ट्रीय गौरव के साथ-साथ स्त्री जाति के सम्मान हेतु अपने प्राणों की आहुति दे दी । आज रानी पद्मावती की कथा में आपको rani padmavati husband ,rani padmavati mahal और rani padmavati jauhar kund से जुडी कई युगो से गाये जाने वाली महारानी rani padmavati history in hindi की जानकारी बताने वाले है।  

रानी पद्मावती का इतिहास चित्तौड़गढ़ से जुड़ा हुआ है , एक वीर, साहसी, स्वाभिमानी हिन्दू जाति की राजपूतानी महिला ने शत्रुओं के हाथों पड़ने की बजाय आग में जौहर कर लिया था। रानी पद्मावती का जौहर बहुत ही प्रचलित है लेकिन उन्हे क्यों अपने खूबसूरत शरीर की वजह से मरना पसंद किया था इस पोस्ट में रानी पद्मावती की पूरी कहानी आज बताई जायेगी तो चलिए शुरू करते है। 

 नाम

 पद्मावती

 जन्म

12-13 वीं सदी में

 जन्म स्थान

 सिंघल प्रांत श्रीलंका में हुआ था

 पिता

 गंधर्वसेन

 माता

 चंपावती

 पति

 रावल रत्न सिंह (ratnasimha)

Rani Padmavati Biography In Hindi –

रानी पद्मिनी का विवाह मेवाड़ के रावल रतनसिंह के साथ हुआ ,महारानी बन चित्तौड़गढ़ फोर्ट पहुंचीं पद्मावती के सौंदर्य के चर्चे उस समय पूरे देश में चर्चित होने लगे।इस दौरान रावल रतनसिंह ने किसी बात पर नाराज होकर राघव चेतन नामक राज चारण को देश निकाला दे दिया। राघव ने दिल्ली दरबार में जाकर महारानी पद्मावती के सौंदर्य का बखान अल्लाउद्दीन के सामने इस तरह किया कि वह रानी पद्मावती को हासिल करने को लालायित हो उठा और चित्तौड़ पर चढ़ाई कर दी। खिलजी की सेना के कूच करते ही रावल रतनसिंह ने चित्तौड़गढ़ फोर्ट में राजपूतों की सेना को एकत्र करना शुरू कर दिया था ।

खिलजी की सेना ने कई माह तक फोर्ट को घेरे रखा, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। सफलता मिलती नहीं देख खिलजी ने एक दांव खेला। उसने रतनसिंह के समक्ष प्रस्ताव रखा कि एक बार वह महारानी पद्मावती के दीदार करवा दे, इसके बाद वह घेरा उठा देगा। इस प्रस्ताव से रतनसिंह आग बबूला हो गए। लेकिन पद्मावती ने खूनखराबा रोकने के लिए अपने पति को इसके लिए तैयार कर लिया। चित्तौड़गढ़ फोर्ट में स्थित महारानी के महल में लगे एक शीशे को इस तरह लगाया गया था। उसमें पद्मावती के स्थान पर खिलजी को सिर्फ प्रतिबिम्ब नजर आए।

प्रतिबिम्ब में ही पद्मावती को देखते ही खिलजी की नीयत डोल गई और उसने बाहर निकलते समय उसे छोड़ने बाहर तक आए रतनसिंह को पकड़ लिया।रतनसिंह की जान की एवज में खिलजी ने प्रस्ताव रखा कि पद्मावती को सौंपने के बाद ही वह रतनसिंह को रिहा करेगा। इस प्रस्ताव के बाद पद्मावती ने अपने सात सौ लड़ाकों को तैयार किया और प्रस्ताव भेजा कि वह दासियों के साथ खिलजी से मिलने आ रही है। सात सौ पालकियों में दासियों के स्थान पर लड़ाकों के साथ पद्मावती खिलजी के डेरे में पहुंची और हमला बोल दिया। देखते ही देखते रतनसिंह को आजाद करवा कर वह फोर्ट में लौट गईं।

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रानी पद्मावती का जीवन का परिचय –

Rani Padmavati को पद्मिनी के नाम से भी जाना जाता था। वे चित्तौड़गढ़ की रानी और राजा रतनसिंह की पत्नी थीं। इन्हें बेहद खूबसूरत माना जाता था। कहा जाता है कि खिलजी वंश का शासक अलाउद्दीन खिलजी पद्मावती को पाना चाहता था। रानी को जब ये पता चला तो उन्होंने कई दूसरी राजपूत महिलाओं के साथ जौहर कर लिया था ।ऐसा माना जा रहा है कि ‘बाजीराव मस्तानी’ की तरह इस फिल्म में भी खिलजी और पद्मावती को सेंटर में रखकर कहानी को बुना जा रहा है।

पद्मावती का जन्म singhal kingdom में हुआ। उनके पिता राजा गंधर्वसेन व माता चंपावती थीं। ऐसी वीरांगना रानी पद्मावती का जन्म 12-13 वीं सदी में सिंघल प्रांत (श्रीलंका) में हुआ था। जहां उनके पिता गंधर्वसेन वहाँ के राजा थे और उनकी माँ चंपावती रानी थी। Rani Padmavati का बचपन में पद्मिनी नाम था। जिन्हें बाद में पद्मावत के नाम से भी जाना गया। वे बाल्यकाल से ही बहुत सुंदर थी। वे अपने पिता की तरह निडर और युद्ध कौशल सीखने में रुचि रखती थी।

रानी पद्मावती का बचपन और विवाह –

Rani Padmavati के पिता गंधर्वसेन सिंह सिंघल द्वीप के राजा थे। बचपन में पद्मिनी का एक तोता था, जिसका नाम “हिरमणी” था। जिनके साथ उन्होंने अपना अधिकांश समय बिताया बचपन से पद्मनी बहुत सुंदर थी जब वह किशोरवस्था से जवान हुई तो उनके पिता ने अपनी पुत्री के लिए योग्य वर के लिए उनके स्वंवर का आयोजन किया। इस स्वंवर में उन्होंने सभी हिंदू राजाओं और राजपूतों को बुलाया। एक छोटे से राज्य के राजा मल्खान सिंह भी स्वंवर में आए थे।

राजा रावल रतन सिंह पहले से ही विवाह कर चुके थे। एक पत्नी के होने के बावजूद स्वंवर गए थे। प्राचीन समय में, राजा एक से अधिक विवाह करते थे, राजा रावल रतन सिंह ने स्वंवर में मल्खान सिंह को पराजित किया और पद्मावती से शादी कर ली। शादी के बाद राजा रावल रतन सिंह अपनी दूसरी पत्नी पद्मिनी के साथ चित्तोड लौट आए।

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संगीतकार राघव चेतन का अपमान और राज्य से निर्वासन –

उस समय, राजपूत राजा रावल रतन सिंह चित्तोड के शासक थे। एक अच्छे शासक और पति होने के अलावा, रतन सिंह का कला के प्रति लगाव भी था। उनके सभासद में कई प्रतिभाशाली लोग थे, जिसमें राघव चेतन नाम का एक संगीतकार भी था। लोगों को राघव चेतन के बारे में ज्यादा नहीं पता था। असलियत में राघव चेतन एक जादूगर था। वह अपने दुश्मन को मारने के लिए अपनी बुरी प्रतिभा का इस्तेमाल किया करता था। एक दिन, राघव चेतन रंगे हाथ पकड़ा गया।

जब इसका पता राज रावल रतन सिंह को लगा तो उन्होंने राघव चेतन का चेहरा काला कर एक गधे पर बिठाकर पुरे राज्य में घुमाया और अपने राज्य से निर्वासित कर दिया। रतन सिंह की इस कठोर सजा के कारण, राघव चेतन अंदर ही अंदर क्रोध की अग्नि में जलने लगा और उसने राजा से अपने अपमान का बदला लेने का प्रण किया था ।

प्रतिशोध की आग में जले राघव चेतन पहुचा खिलजी के पास –

अपने अपमान से नाराज होकर राघव चेतन दिल्ली चला गया जहा पर वो दिल्ली के सुल्तान अलाउदीन खिलजी को चित्तौड़ पर आक्रमण करने के लिए उकसाने का लक्ष्य लेकर गया। दिल्ली पहुंचने पर राघव चेतन दिल्ली के पास एक जंगल में रुक गया जहां पर सुल्तान अक्सर शिकार के लिया आया करते थे। एक दिन जब उसको पता चला कि की सुल्तान का शिकार दल जंगल में प्रवेश कर रहा है तो राघव चेतन ने अपनी बांसुरी से मधुर स्वर निकालना शुरु कर दिया। जब राघव चेतन की बांसुरी के मधुर स्वर सुल्तान के शिकार दल तक पहुंची तो सभी इस विचार में पड़ गये कि इस घने जंगल में इतनी मधुर बांसुरी कौन बजा सकता है। 

सुल्तान ने अपने सैनिको को बांसुरी वादक को ढूंढ कर लाने को कहा , जब राघव चेतन को उसके सैनिको ने अलाउदीन खिलजी के समक्ष प्रस्तुत किया तो सुल्तान ने उसकी प्रशंसा करते हुए उसे अपने दरबार में आने को कहा चालाक राघव चेतन ने उसी समय राजा से पूछा कि “आप मुझे जैसे साधारण संगीतकार को क्यों बुलाना चाहते है जबकि आपके पास कई सुंदर वस्तुए है. ” राघव चेतन की बात ना समझते हुए खिलजी ने साफ़-साफ़ बात बताने को कहा. राघव चेतन ने सुल्तान को रानी पदमिनी की सुन्दरता का बखान किया जिसे सुनकर खिलजी की वासना जाग उठी.अपनी राजधानी पहुचने के तुरंत बात उसने अपनी सेना को चित्तौड़ पर आक्रमण करने को कहा क्योंकि उसका सपना उस सुन्दरी को अपने हरम में रखना था।

चित्तरोंगढ़ किले पर किसने किया आक्रमण –

चीत्तोड पहुंचने के बाद, अलाउद्दीन ने चित्तोड़ के किले के चारो तरफ भारी रक्षा कवच देख सोच में पद गया। वह सीधे चढाई करके जीत नहीं सकता था। लेकिन सुल्तान रानी पद्मिनी को देखने के लिए पागल हुआ जारहा था। फिर उसने एक चाल चली। अपने दूत को एक सन्देश के साथ राजा रतन सिंह के पास भेजा। जिसमे लिखा था कि वह रानी पद्मिनी को अपनी बहन सामान मानते हैं, और उससे मिलना चाहते हैं। वह रानी को एक बार देख कर वापस चला जायगा। उसने यह भी कहा की यदि रानी सीधे तौर पर सामने नहीं आना चाहती तो वह दर्पण में अपना चेहरा दिखा दे।

सुल्तान के इस सन्देश को सुनने के बाद , रतन सिंह और उसके मंत्री मंडल ने फैसला लिया और सोचा की राज्य और उसकी प्रजा की रक्षा के लिए यह गलत नहीं होगा। और उन्होंने रानी को दिखाने के लिए सहमति दे दी । जब अलाउद्दीन खिलजी ने यह खबर सुनी कि रानी पद्मिनी का दीदार करने के लिए तैयार हो गए है, तो उसने बड़ी चालाकी से सावधानीपूर्वक अपने चुने हुए योद्धाओं के साथ किले में प्रवेश किया।

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राजा रावल रतन सिंह को बंधी बनाया धोके से –

जब अलाउद्दीन खिलजी ने दर्पण में रानी पद्मिनी के सुंदर चेहरे का प्रतिबिंब देखा, तो उसके मन में लौटते रानी पद्मावती को पाने की लालशा और बढ़ गई। रानी के ख़ूबसूरती को देख उसकी अन्तर्वासना की आग और तेज़ी से भड़क उठी। अपने शिविर में वापस लौटते समय के छुपे सैनिको ने किले के द्वार पर रतन सिंह को कैदी बना लिया। क्यूंकि रतन सिंह मेहमान को दरवाजे तक छोड़ने गए थे।

लेकिन कपटी खिलजी की चालाकी न समझ पाए। खिलजी ने रतन सिंह को गिरफ्तार करने का अवसर नहीं गवाया और पद्मिनी की मांग शुरू कर दी। जब यह बातचौहान रानी को पता चली तो रानी पद्मिनी ने कपट का जवाब कपट से देने का निश्चय किया और राजपूत सेनापति गोरा और बादल ने एक चाल चलते हुए, अलाउद्दीन खिलिजि को रानी पद्मिनी को सौपने का संदेश सुल्तान के पास भेज दिया। और अगली सुबह का समय दिया था।

राजा रावल रतन सिंह को किसने बंदी में से छुड़ाया –

अगली सुबह तड़के ही 150 सैनिको ने भेष बदल कर पालकी लेकर निकल पड़े लेकिन पालकी में रानी नहीं थी बल्कि सेनापति और बादल सवार थे। उस पालकी को खिलजी के शिविर पर उतरा गया जहाँ राजा बंदी बनाये गए थे। पालकी को देख राजा रतन सिंह दुखी हुए उन्होंने सोचा रानी को वो बचा नहीं पाए लेकिन तभी उसमे से सैनिको देख उनमे हिम्मत आयी और वह से निकलने में कामयाब रहे लेकिन सेनापति गोरा लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए। लेकिन राजा और बाकी लोग किले में सुरक्षित पहुंच गए।

अलाउद्दीन खिलजी ने भी चितोड़ गढ किले पे किया आक्रमण –

जब सुल्तान को यह पता चली की राजा उसकी बंदिश से निकल गया है और उसकी योजना विफल रही। अलाउद्दीन खिलजी गुस्से से आग बबूला हो गया और आदेश दिया कि अभी इसी वक्त चित्तोंगढ़ बोल दिया जाए। सुल्तान की सेना ने किले में प्रवेश करने की कोशिश की लेकिन असफल रही। अब, अलाउद्दीन खिलजी ने किले को घेरने का फैसला किया इस घेराबंदी इतनी कठोर थी कि फोर्ट की आपूर्ति धीरे-धीरे समाप्त होने लगी ।

अंत में, रतन सिंह ने दरवाजा खोलने का आदेश दिया और अपने सैनिकों के साथ के साथ युद्ध करने का फैसला लिया। खूब भयंकर लड़ाई हुई राजा रतन सिंह वीरागति को प्राप्त हो गए। इस जानकारी को सुनकर, रानी पद्मावती ने सोचा, अब सुल्तान की सेना चित्तरोंगढ़ के सभी पुरूषों को मार डालेगी। अब चित्तोड की रानी के पास दो विकल्प थे, या तो वह विजयी सेना के आने से पहले जौहर कर ले या अपने अस्मत अलाउद्दीन के हांथों में सौंप दे।

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रानी पद्मावती ने अपने सन्मान को बचाने के लिए अग्नि कूड़ में मृत्यु बलिदान दिया –

सभी महिलाओं का पक्ष जौहर की और था। एक विशाल चीता जलाई गई और रानी पद्मिनी के बाद, चित्तोड की सभी महिलाएं उसमें कूद गईं और इस तरह दुश्मन बाहर खड़े देखते रहे। यह बात जब युद्ध कर रहे सैनिको और लोगो को पता चली तो उन्होंने शाका प्रदर्शन करने का फैसला लिया। और तबतक लड़ते रहे जबतक उनके शरीर में आखिर साँस थी। क्यूंकि उनके जीवन कोई उद्देश्य नहीं बचा था। जब सभी राजपूत सैनिक लड़ते लड़ते शहीद हो गए तो विजयी सेना ने किले में प्रवेश किया, लेकिन वह उनके हाथ सिर्फ राख और जड़ी हड्डियों का मालवा मिला। रानी पद्मावती और दासियों के जौहर की स्मृति अभी भी लोकगीतों में जीवित है। जिसमें उनके गौरवशाली कार्य का गुणगान किया जाता है। 

Rani Padmavati Movie (रानी पद्मावती पर फिल्म)

पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी की कोई प्रेम कहानी नहीं थी, फिर भी उनकी कहानी बहुत प्रचलित है।  बॉलीवुड फिल्मो के महान निर्देशक संजय लीला भंसाली उनपर फिल्म बनाई है। जिनका विरोध बहुत हुआ था फिल्म के कई सिन काट के नाम बदल के प्रचलित किया गया था लेकिन फिरभी राजपूतो और करनी सेना ने कई थियेटर जलाये थे। पद्मावती के हीरोइन का रोल में दीपिका पादुकोण है, और राजा रतन सिंह के रोल के लिए शाहिद कपूर है। अलाउद्दीन खिलजी के अभिनय के लिए रणवीर सिंह को लिया गया था वह फिल्म 1 दिसंबर 2017 को रिलीज़ हुई थी। 

Rani Padmavati Real Story –

Rani Padmavati Fact –

  • रानी पद्मावती का जन्म 12-13 वीं सदी में सिंघल प्रांत (श्रीलंका) में हुआ था। जहां उनके पिता गंधर्वसेन वहाँ के राजा थे और उनकी माँ चंपावती रानी थी।
  • महाराजा रतन सिह रानी पद्मावती  स्वयंवर में राजा मल्खान सिंह को पराजित करके जित के लाये थे। 
  • अलाउद्दीन खिलजी ने किले को घेर लिया था तब रतन सिंह ने दरवाजा खोलने का आदेश दिया अपने सैनिकों के साथ युद्ध करने का फैसला लिया। खूब भयंकर लड़ाई हुई राजा रतन सिंह वीरागति को प्राप्त हो गए। उसके साथ ही रानी पद्मावती ने कई वीरांगनाओ के साथ अग्नि कुंड में अपने प्राणो की आहुति दे दी थी। 
  • पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी की कोई प्रेम कहानी नहीं थी, फिर भी उनकी कहानी बहुत प्रचलित है। बॉलीवुड फिल्मो के महान निर्देशक संजय लीला भंसाली उनपर फिल्म बनाई है।

Rani Padmavati Questions –

1 .क्या रानी पद्मावती को बच्चा हुआ था ?

रानी पद्मावती को संतान नहीं था लेकिन उनके पति की पहली पत्नी नागमणि से उनके संतान हुए ऐसा कहाजाता है ।

2 .क्या अलाउद्दीन खिलजी ने पद्मावती से शादी की थी ?

नहीं  अलाउद्दीन खिलजी ने पद्मावती से शादी की थी उनके पति मेवाड़ के महाराणा रतन सिंह थे। 

3 .क्या पद्मावती रतन सिंह की दूसरी पत्नी हैं ?

हा पद्मावती रतन सिंह की दूसरी पत्नी थी उनकी पहली पत्नी का नाम नागमती था। 

4 .रतन सिंह की कितनी पत्नियाँ थीं ?

रतन सिंह की 15 पत्नियाँ थी ऐसा विवरण उनके इतिहास से विवरण मिलता है। 

5 .रतन सिंह की हत्या किसने की ?

अपनी मातृ भूमि की रक्षा के युद्ध मैदान में रत्नसिंह (“रतन सिंह”) की मृत्यु हो गई थी। 

6 .क्या पद्मावती वाकई खूबसूरत थी ?

अपनी सुंदरता के लिए बहुत प्रचलित रानी पद्मावती बेहद खूबसूरत थीं ,अलाउद्दीन खिलजी रानी पद्मावती के प्रतिबिंब को देखकर मोहित हो गया और बाद में उस पर हमला करने के लिए किले पर हमला किया था। 

7 .रानी पद्मावती कौन थी  ?

रानी पद्मावती गंधर्वसेन सिंह सिंघल द्वीप के राजा की बेटी और मेवाड़ चितोड़ के महाराजा रतन सिंह की पत्नी थी। 

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निष्कर्ष – 

दोस्तों आशा करता हु आपको मेरा यह आर्टिकल Rani Padmavati Biography In Hindi आपको बहुत अच्छी तरह से समज आ गया होगा और पसंद भी आया होगा । इस लेख के जरिये  हमने rani padmavati age और rani padmavati beauty से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दे दी है अगर आपको इस तरह के अन्य व्यक्ति के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है तो आप हमें कमेंट करके जरूर बता सकते है। और हमारे इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द ।

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