Mother Teresa Biography In Hindi – मदर टेरेसा की जीवनी

आज के हमारे लेख में आपका स्वागत है। नमस्कार मित्रो आज हम,Mother Teresa Biography In Hindi में भारतीय न होते हुए भी हमारे देश को बहुत कुछ दिया ऐसे मदर टेरेसा का जीवन परिचय देने वाले है। 

आज वह हमारे बीच नहीं हैं , लेकिन दुनिया में उनके कार्य को एक मिसाल की तरह जाने जाते है। मानवता की जीती-जागती मिसाल मदर टेरेसा का योगदान है । उनका नाम लेते मन में मां की भावनाएं उमड़ने लगती है। आज हम  mother teresa ki jivani में सबको। mother teresa quotes,mother teresa speech और mother teresa birth place से रिलेटेड माहिती बताने वाले है। 

मदर टेरेसा भारत रत्न मानवता की सेवा के लिए काम करती थीं। मदर टेरेसा दीन-दुखियों की सेवा करती थीं। आज हम उनकी शख्सियत मदर टेरेसा और जीवन के बारे में जानने वाले है। जिन्होंने अपना पूरा जीवन गरीब और बीमार लोगों की सेवा में लगा दिया था। तो चलिए मदर टेरेसा की कहानी बताना शुरू करते है। 

Mother Teresa Ka Jeevan Parichay –

 नाम   मदर टेरेसा
 असली ना   अग्नेस गोझा बॉयजिजु
 जन्म   26 अगस्त 1910 
 जन्म स्थान    स्कोप्जे ( मेसीडोनिया )
 पिता   निकोला बोयाजू
 माता    द्राना बोयाजू
 मृत्यु   5 सितम्बर 1997

मदर टेरेसा का जीवन और उनकी समाज सेवाएं –

मदर टेरेसा टेरेसा एक रोमन कैथोलिक सन्यासिनी और ईसाई धर्म की प्रचारक थी। टेरेसा ने ईसाई धर्म के प्रचारकों का भी निर्माण किया था। प्रचारकों का गठन करने के पीछे मदर टेरेसा का मुख्य उद्देश्य रोमन कैथोलिक धर्मो के सभी धर्मो को साथ लेना था जब मदर टेरसा ने संस्था की शुरुआत की थी तब लोग धीरे-धीरे इस संस्था जुड़ने लगे। 

2012 में इस संस्था से 4500 भागिनियाँ जुड़ी आज मदर टेरेसा की इस संस्था के पूरी दुनिया में 133 देशो में उनकी संस्थाएं कार्य कर रही है। संस्था मुख्य तौर पर किसी बड़ी बीमारी से ग्रसित लोगों और जिन गरीब और बेसहारा बच्चों का इस दुनिया में कोई नहीं होता उनकी ये संस्था देखभाल करती है। साथ उन बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक कर उन्हें अध्ययन करवाती है। 

कुल मिलकर उनकी इस संस्था का एक ही उद्देश्य है की अपना पूरा जीवन गरीब लोगों की सेवा में लगा दो। देश और समाज में इस सम्मानीय कार्यो के लिए मदर टेरेसा कई सम्मान मिल चुके है। साल 1979 में इन्हें नोबेल पुरस्कार और 2003 में “कलकत्ता की भाग्यवान टेरेसा” के नाम की उपाधि दी साथ ही साल 2015 में पॉप फ्रांसिस ने कैथोलिक चर्च के माध्यम से उन्हें संत की उपाधि प्रदान की मदर टेरेसा की संत बनाने की पूर्ण प्रक्रिया सितम्बर 2016 को पूरी हुई थी। 

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मदर टेरेसा का जन्म –

Mother Teresa Biography  – मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 को और मदर टेरेसा का जन्म स्थान मेसिडोनिया की राजधानी स्कोप्जे शहर है । ‘एग्नेस गोंझा बोयाजिजू’ के नाम से एक अल्बेनियाई परिवार में उनका लालन-पालन हुआ। उनके पिता का नाम निकोला बोयाजू और माता का नाम द्राना बोयाजू था। mother teresa real name ‘एग्नेस गोंझा बोयाजिजू’ था। अलबेनियन भाषा में ‘गोंझा’ का अर्थ ‘फूल की कली’ होता है। 

वह एक ऐसी कली थीं जिन्होंने गरीबों और दीन-दुखियों की जिंदगी में प्यार की खुशबू भरी। वे 5 भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं। टेरेसा एक सुन्दर, परिश्रमी एवं अध्ययनशील लड़की थीं। टेरेसा को पढ़ना, गीत गाना विशेष पसंद था। उन्होंने तय किया था की  सारा जीवन मानव सेवा में लगाएंगी। उन्होंने पारंपरिक वस्त्रों को त्यागकर नीली किनारी वाली साड़ी पहनने का फैसला किया और मदर टेरेसा का कार्य  मानवता की सेवा के लिए आरंभ हुआ ।

भारत में मदर टेरेसा का आगमन – Mother Teresa Biography 

मदर टेरेसा आयरलैंड से 6 जनवरी 1929 को कोलकाता में ‘लोरेटो कॉन्वेंट’ पंहुचीं। इसके बाद मदर टेरेसा ने पटना के होली फैमिली हॉस्पिटल से आवश्यक नर्सिंग ट्रेनिंग पूरी की और 1948 में वापस कोलकाता आ गईं। 1948 में वहां के बच्चों को पढ़ाने के लिए मदर टेरेसा स्कूल खोला और बाद में ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ की स्थापना की जिसे 7 अक्टूबर 1950 को रोमन कैथोलिक चर्च ने मान्यता दी। 

मदर टेरेसा की मिशनरीज संस्था ने 1996 तक करीब 125 देशों में 755 निराश्रित गृह खोले जिससे करीबन 5 लाख लोगों की भूख मिटाई जाने लगी। टेरेसा ने ‘निर्मल हृदय’ और ‘निर्मला शिशु भवन’ के नाम से आश्रम खोले। ‘निर्मल हृदय’ आश्रम का काम बीमारी से पीड़ित रोगियों की सेवा करना था। वहीं ‘निर्मला शिशु भवन’ आश्रम की स्थापना अनाथ और बेघर बच्चों की सहायता के लिए हुई, जहां वे पीड़ित रोगियों व गरीबों की स्वयं सेवा करती थीं।

बचपन में समाज सेवा का झुकाव था –

बचपन से ही उनका झुकाव समाज सेवा के लिए था। उन्होंने बहुत कम उम्र में रोमन कैथोलिक बनने का फैसला कर लिया था। मात्रा 18 साल की उम्र में ही उन्होंने कैथोलिक चर्च ज्वाइन कर लिया था जिसके बाद से वे कभी अपने घर नहीं लौटी। इटली में जन्मी मदर टेरेसा ने भारत को अपनी कर्मभूमि चुना और 1950 में कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की थी। 

 संस्था को शुरू करने का उनका मकसद यही था कि इसक्वे जरिये वो गरीबों, बीमार और अनाथ लोगों की मदद करना चाहती थी।  उन्होंने कुष्ठ रोगियों को भी शरण दी जिन्हें समाज ठुकरा चुका था। इसके साथ ही उन्होंने टीबी के मरीजों की भी बहुत सेवा की थी। 

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मदर टेरेसा का सन्मान – Mother Teresa Biography

मदर टेरेसा को मानवता की सेवा के लिए अनेक अंतरराष्ट्रीय सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त हुए। साल 1962 में भारत सरकार ने उनकी समाजसेवा और जनकल्याण की भावना की कद्र करते हुए उन्हें  ‘पद्मश्री’ से नवाजा गया। 

साल 1980 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारतरत्न’ से अलंकृत किया गया। विश्वभर में फैले उनके मिशनरी के कार्यों की वजह से व गरीबों और असहायों की सहायता करने के लिए मदर टेरेसा को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया।

मदर टेरेसा ने जीवन का लक्ष समाज और गरीबो की सेवा को बताया –

Mother Teresa Biography  – मदर टेरेसा के जीवन पर जोन ग्रफ्फ़ क्लुकास की आत्मकथा के माध्यम से बताया की जब मदर टेरेसा बाल्यावस्था में थी तब से उन्हें समाज के हित में कार्य करने और धर्म का प्रचार करने वाली बातें सुनने में अधिक रूचि थी जब उनकी उम्र 12 साल थी। तब उन्होंने पाने जीवन का एक लक्ष्य तय कर लिया की वो अपना पूरा जीवन समाज सेवा में व्यतीत करेगी और वो समय आ ही गया 15 अगस्त 1928 मदर टेरेसा ने अपने बचपन के लक्ष्य के अभियान की शुरुआत कर दी। 

मदर टेरेसा 18 साल की थी तब लोरेटो बहनों के साथ रहने के लिए अपना घर छोड़ दिया। और वहीं पर मदर टेरेसा ने इंग्लिश बोलने का ज्ञान अर्जित किया। ईसाई धर्म का प्रसारक बनने के लिए निकल पड़ी दोस्तों लोरेटो बहनें भारत देश में गरीब बच्चों को शिक्षित करने के लिए अंग्रेजी भाषा का ज्ञान देती थी। जब इन्होने अपना घर छोड़ा वो फिर दुबारा कभी अपने घर नहीं गई।  mother teresa family 1934 में स्कोप्जे रहता था। फिर वहां से अल्बानिया के टिराना में रहने चले गए। 

मदर टेरेसा को संन्यासी की पदवी मिली –

  • 1929 में मदर टेरसा भारत देश में आई और भारत के राज्य वेस्ट बंगाल के दार्जिलिंग में अपनी आगे की शिक्षा का अध्यन किया। 
  • अध्ययन के साथ हिमालय की घाटियों के पास सेंट टेरेसा स्कूल में उन्होंने बंगाली भाषा का ज्ञान लिया। 24 मई 1931 टेरेसा को सन्यासिनी की पदवी दी गई थी। 
  • उन्होंने अपना नाम अग्नेसे गोंकशे बोजशियु से बदलकर मदर टेरेसा कर लिया। शिक्षा के साथ मदर टेरेसा मई 1937 में “मदर टेरेसा लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल” में अध्ययन भी करवाती थी।
  • मदर टेरेसा की जीवनी के 20 साल इसी स्थान पर गुजारे बाद साल 1944 में उनका पद बढ़ गया और उन्हें हेडमिस्ट्रेस का पद मिल गया। 
  • mother teresa for kids अलग सिखाने का जूनून था लेकिन वो कलकत्ता में फैली गरीबी और वहां के हालत देख कर हमेशा परेशान हो जाती थी। अपने शहर में बड़ी हिंसक घटनाए देखी थी। 

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बेसहारा और गरीब बच्चो के लिए किये बहोत सारे काम –

Mother Teresa Biography – अपने पुरे जीवन में मदर टेरेसा ने गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए कार्य किया और अपने रोमन कैथोलिक सन्यासिनी पदवी को गोरवीनत किया मदर टेरेसा ने अपने जीवन का ज्यादा समय काल्चुता में ही व्यतीत किया था। यहां पर रहकर टेरेसा ने गरीब लोगों की भलाई की देखभाल करने के लिए अनेक संस्थाओ की स्थापना की थी।  इस सराहनीय कार्य के लिए उन्हें 1979 नोबेल शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। 

मदर टेरेसा अपने समाजसेवी कार्यो के लिए पूरी दुनिया में जानी जाने लगी। मदर टेरेसा की भगवान के प्रति काफी आस्था थी। दोस्तों टेरेसा के पास किसी भी प्रकार की संपत्ति उनके नाम नहीं थी। बस उनके पास जीवन में था तो विश्वास एकाग्रता भरोसा और कार्य को करने की ऊर्जा कूट कूट के भरी थी। बस यहीं था जो वो हमेसा करीब लोगों के लिए लुटाया करती थी गरीब लोगों के मदद के लिए। 

वह कई किलोमीटर नंगे पाँव पैदल चल कर पहुंच जाती थी। टेरेसा ने अपने जीवन में कभी मुश्किलों के आगे हार नहीं मानी और निरंतर गरीब बेसहारा लोगों की मदद के लिए आगे बढ़ती चली गई। 

Mother Teresa Awards – Mother Teresa Biography

( 1 )  मदर टेरेसा नोबेल पुरस्कार (mother teresa nobel prize )1979

( 2 ) भारत रत्न 1980

( 3 ) गोल्डन ऑनर ऑफ़ द नेशन 1994

( 4 ) पदम् श्री 1962

( 5 ) टेम्पलेटों पुरस्कार 1973

( 6 ) कांग्रेशनल गोल्ड मैडल 1997

( 7 ) जवाहरलाल नेहरू अवार्ड फॉर इंटरनेशनल 1969

( 8 ) पॉप जॉन पुरस्कार 1971

( 9 ) आर्डर ऑफ़ मेरिट 1983

( 10 ) Pacem in Terris Award 1976

( 11 ) ग्रैंड आर्डर ऑफ़ क्वीन जेलेना 1995

शिक्षिका के रूप में लोकप्रिय थी मदर टेरेसा – Mother Teresa Biography

मदर टेरेसा 6 जनवरी, 1929 को आयरलैंड से 6 जनवरी, 1929 को कोलकाता के लोरेटो कॉन्वेंट’ में एक शिक्षिका के रूप में आईं। एक शिक्षिका के रूप में बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय हो गईं थी। इसके बाद वह वर्ष 1944 में वह सेंट मैरी स्कूल की प्रिंसिपल के पद पर तैनात हुई। मदर टेरेसा 1948 में कलकत्ता की एक गरीब बुजुर्गो की देखभाल करने वाली संस्था के साथ रहीं। यहां का दृश्य देखकर वह उनका दिल कराह गया। बस इसके बाद से ही उन्होंने लोगों की सेवा करने के लिए अपने कदम आगे बढ़ा दिए।

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मदर टेरेसा नीले किनारे वाली सफ़ेद रंग की साडी पहनती थी –

आज पूरी दुनिया में मशहूर हो चुकी ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ की स्थापना मदर टेरेसा ने सन् 1948 में कलकत्ता में की थी। इसे वैश्विक तौर पर 7 अक्टूबर, 1950 को रोमन कैथोलिक चर्च ने मान्यता दी थी। इसके अलावा उन्होंने ‘निर्मल हृदय’ और ‘निर्मला शिशु भवन’ जैसे कई आश्रमों की नींव भी रखी। इस दौरान लोगों की सेवा के लिए तत्पर मदर टेरेसा ने अपना जीवन काफी सादगी से जीने के लिए पारंपरिक वस्त्रों को त्याग दिया। उन्होंने अपने आगे के जीवन के लिए बस नीले रंग की बार्डर वाली सफेद साड़ी धारण करने का फैसला लिया।

मदर टेरेसा को ” भारतरत्न ” से अलंकृत किया –

Mother Teresa Biography  – निस्वार्थ भाव से हो रही सेवा भाव को लेकर पूरी दुनिया में चर्चा थी। जिससे उन्हें उनके नेक काम के लिए कई पुरस्कार मिले। जिसमें 1962 में भारत सरकार ने उन्हें “पद्म श्री” से नवाजा था। 1980 मे भी भारत सरकार ने “भारत रत्न” से अलंकृत किया। इसके अलावा 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया। इस दौरान नोबेल पुरस्कार की 192,000 डॉलर की धन-राशि को भारतीय गरीबों के लिए दान कर दिया था। वहीं 2003 को रोम में मदर टेरेसा को “धन्य” घोषित किया था। मदर टेरेसा ने अपने जीवन के 40 से अधिक साल लोगों की सेवा में बिताए।

Mother Teresa Death – Mother Teresa Biography

1983 में 73 वर्ष की आयु में उन्हें पहली बार दिल का दौरा पड़ा। उस समय मदर टेरेसा रोम में पॉप जॉन पॉल द्वितीय से मिलने के लिए गई थीं। 1989 में उन्हें दूसरा दिल का दौरा पड़ा। बढती उम्र के साथ-साथ उनका स्वास्थ्य भी बिगड़ता गया। 13 मार्च 1997 को उन्होंने ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ के मुखिया का पद छोड़ दिया। 5 सितंबर 1997 को उनकी मौत हो गई। उनकी मौत के समय तक ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ में 4,000 सिस्टर और 300 अन्य सहयोगी संस्थाएं काम कर रही थीं। 

 विश्व के 123 देशों में समाजसेवा में लिप्त थीं। जिस आत्मीयता के साथ उन्होंने दीन-दुखियों की सेवा की उसे देखते हुए पोप जॉन पाल द्वितीय ने 19 अक्टूबर 2003 को रोम में मदर टेरेसा को ‘धन्य’ घोषित किया था। मदर टेरेसा आज हमारे बीच नहीं हैं, पर उनकी मिशनरी आज भ‍ी समाज सेवा के कार्यों में लगी हुई है।

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Mother Teresa History Video –

Mother Teresa Interesting Facts –

  • दुनिया में मशहूर मदर टेरेसा का असली नाम ‘अगनेस गोंझा बोयाजिजू’ था।
  • अगनेस ने दुख को बचपन से ही महसूस किया था। बचपन में ही उनके पिता उनका साथ छोड़ गए थे।
  • पांच भाई-बहनों में अगनेस सबसे छोटी थीं। वह बचपन से ही अध्ययनशील एवं परिश्रमी थीं।
  • गरीबों को देखकर उनके मन में बचपन से ही काफी उथल पुथल होने लगती थी।
  • जिससे वह बचपन से ही गरीबो व दुखियों को के लिए कुछ करने की भावना पाल चुकी थी।
  • ‘अगनेस गोंझा बोयाजिजू’ गाना भी बहुत सुंदर गाती थी।
  • मदर टेरेसा के अनमोल वचन आज भी पूरी दुनिया में गुजते रहे है। 

मदर टेरेसा के प्रश्न –

1 .madar teresa kaun hai ?

मदर टेरेसा दीन-दुखियों की सेवा करते करते अपना जीवन व्यतीत करदिया था।  

2 .madar teresa kaun thee ?

मदर टेरेसा मानवता की जीती-जागती मिसाल और एक सेवाभावी संत थे। 

3 .madar teresa kee mrtyu kab huee ?

मदर टेरेसा की मृत्यु 5 September 1997 के दिन हृदयाघात के कारन हुआ था। 

4 .madar teresa kee maata ka naam kya tha ?

मदर टेरेसा की माता का नाम Dronfile Bojaxihu था। 

5 .madar teresa ke pita ka naam kya tha ?

मदर टेरेसा के पिता का नाम Nikolay Bojaxihu था।  

6 .madar teresa ka poora naam kya hai ?

मदर टेरेसा का पूरा नाम ‘अगनेस गोंझा बोयाजिजू’ था।

7 .madar teresa bhaarat kab aaee ?

मदर टेरेसा भारत 1929 के दिन आई थीं।

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Conclusion –

आपको मेरा  आर्टिकल mother teresa story बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा।  लेख के जरिये what did mother teresa do और mother teresa cause of death से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दी है। अगर आपको अन्य व्यक्ति के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है। तो कमेंट करके जरूर बता सकते है। हमारे आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द।

3 thoughts on “Mother Teresa Biography In Hindi – मदर टेरेसा की जीवनी”

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