Shivaji Maharaj Biography In Hindi – शिवाजी महाराज का जीवन परिचय

आज के हमारे लेख में आपका स्वागत है। नमस्कार मित्रो आज हम Chhatrapati Shivaji Maharaj Biography In Hindi बताएँगे। भारत के सबसे वीर यशश्वी योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज की जीवनी बताने वाले है। 

छत्रपति शिवाजी एक ऐसे महान योद्धा पुरुष थे और उनकी बहादुरी रणनीति और प्रशासनिक कौशल के लिए जाने जाता थे। छत्रपति शिवाजी ने हमेशा स्वराज और मराठा विरासत पर ध्यान केंद्रित किया था। आज हम shivaji maharaj information ,में shivaji horse name ,shivaji maharaj quotes और shivaji children की जानकारी देने वाले है। छत्रपति शिवाजी का गोत्र क्षत्रीय मराठा थे। shivaji father name शाहजी भोंसले और जीजा बाई उनकी माता थे। भारत में shivaji maharaj birth date 1 9 फरवरी को shivaji jayanti मनाई जाती है। 

लेकिन शिवाजी महाराज को पुणे में उनकी माँ और काबिल ब्राह्मण दादाजी कोंडा देव की देख रेख में पाला गया था। शिवाजी महाराज का युद्ध कौशल्य बालयकाल से ही लाजवाब रहा था। शिवाजी महाराज राज्याभिषेक 1660 की साल में सिर्फ 16 साल की उम्र में किया गया था। फिरभी उंहोने अपनी जवाबदारियां बहुत चालाकी से निभाया करते थे। उन्होंने दिल्ही सल्तनज बादशाह ओरंगजेब जैसे महान बादशाह को भी धूल चटाई थी। चलिए shivaji maharaj history in hindi बताना शुरू करते है। 

Shivaji Maharaj Biography In Hindi –

नाम शिवाजी भोंसले 
जन्म तिथि 19 फरवरी ,1630 या अप्रिल 1627
जन्मस्थान महारष्ट्र के पुणे जिले में शिवनेरी किला
पिता शाहजी भोंसले
माता जीजाबाई
शासनकाल 1660-1674
wife ईबाई, सोयाराबाई, पुतलाबाई, सकवरबाई, लक्ष्मीबाई, काशीबाई
बच्चे संभाजी, राजाराम, सखुबाई निम्बालकर, रणुबाई जाधव, अंबिकाबाई महादिक, राजकुमारबाई शिर्के
धर्म हिंदू धर्म
मृत्यु 3 अप्रैल, 1680
शासक रायगढ़ किला, महाराष्ट्र
उत्तराधिकारी संभाजी भोंसले

शिवाजी महाराज का जीवन परिचय –

शिवाजी महाराज के गुरु रामदास से धार्मिक रूप से प्रभावित थे, जिन्होंने शिवाजी को मातृभूमि पर गर्व करना सिखाया था। 17 वी शताब्दी की शुरुआत में नये योद्धाओ के तौर पर मराठो का उदय हुआ था,जब शाहजी भोंसले के परिवार को सैन्य के साथ अहमदनगर साम्राज्य का राजनितिक लाभ मिला था। भोंसले ने अपनी सेनामे काफी सारी संख्या में मराठा सरदारों को भर्ती किया था, जिनके कारण उनकी सेनामे ताकतवर और काफी मजबूत सेना और लड़ाकु सैनिक थे, इसलिए उनकी सेना एक मजबूत एवम् ताकतवर सेना हो गयी।

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छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन की महत्व पूर्ण घटनाएँ – 

 टोरणा किले का विजय –

छत्रपति Shivaji महाराज उनकी 16 साल की उम्रमे उन्होंने जीवन में पहेला  टोरणा किला जीत लिया था। मराठा उन्हीं शिवाजी को बहुत ही कम उम्र में अपने सरदार के तौर पर स्वीकार कर लिया था। बहुत ही कम उम्र में यह साहस दिखा कर यह साबित कर दिया था कि वह सुरवीर ही नहीं बल्कि एक ताकतवर और समझदार इंसान और योद्धा है। 16 साल की उम्र में उन्होंने टोरणा जिला को जीत कर एक अजय योद्धा के तौर पर अपनी विजय हासिल की थी।

छत्रपति शिवाजी महाराज ने सबसे पहले टोरणा किले को जीतकर उस पर अपना कब्जा स्थापित किया। इस किले को जितने के बाद छत्रपति शिवाजी को रायगढ़ और प्रतापगढ़ किले को जितने के लिए मराठाओके सरदार के तौर चुना  गया। छत्रपति शिवाजी ने पहेला किला जितने से बीजापुर के सुल्तान को चिंता होने लगी के अब मेरी बारी है,मेरा किला वो शिवाजी अब जित लेंगे। इस लिए सुल्तान ने शिवाजी के पिता शाहजी भोंसले को बीजापुर   जेल की कार कोटरि मे बंध कर दिया था।

पानीपत का युद्ध किसके साथ और कब हुआ –

पानीपत का युद्ध सन 1659 में छत्रपति शिवाजी और बीजापुर के सुल्तान के बीच हुआ था। बीजापुर के सुल्तान ने शिवाजी को मारने ने के लिए अपने सेनापति अफजल खान  को आदेश किया की  वह 20 हज़ार सैनिको के साथ शिवाजी को गिरफ्तार करके ले आए। शिवाजी चतुर योद्धा थे। उन्होंने अफजल खान की 20 हज़ार सैनिकों की सेना को पहाड़ों में ही फंसा दिया।

अपने बाप का नाम हथियार से अफजल खान पर धावा बोल दिया और अफजल खान को मौत के घाट उतार दिया। बीजापुर के सुल्तान ने अफजल खान के मौत का समाचार सुनते ही  अपनी हार स्वीकार कर ली। उसने शिवाजी के साथ हाथ मिला लिया। शिवाजी ने अपने जीते हुए विजय क्षेत्रों में अपना स्वतंत्र राज स्थापित किया था। shivaji horse name vishwas और कुछ लोग कृष्‍णा भी बताते हैं।

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कोंडाना किला का कब्ज़ा –

कोड़ना किला नीलकंठ राव के नियंत्रण में था। इस किले को जित ने के लिए शिवाजी ने  कमांडर तानाजी मालुसरे और जय सिंह प्रथम को चुना था। किला रक्षक उदयभान राठौड़ ,तानाजी मालुसरे और जय सिंहके बीच बड़ा ही भयावह युद्ध हुआ था। इस युद्ध में तानाजी मालुसरे की मोत हो गयी थी।

इस युद्ध में तानाजी की मौत होने के बावजूद भी मराठाओने यह युद्ध अपनी काबिलियत से जीत लिया था। ता बड़ी बहादुरी से इस युद्ध में लड़े थे, लड़ते लड़ते  शहीद हो गए उनकी बहादुरी को प्रदर्शित करती हुई एक हिंदी फिल्म भी निर्मित है, जिस ने बॉक्स ऑफिस पर काफी सारे रिकॉर्ड बनाए।

शिवाजी का राज्याभिषेक –

छत्रपति Shivaji ने सन 1674 ई , में छत्रपति शिवाजी ने खुद को मराठा साम्रज्य का स्वतत्र शासित घोसित किया था। उनको रायगढ़ के किले में राजा के रूप में ताज पहनाया गया था। उनका राज्यभेषिक  सुल्तान के लिये चुनौती बन गया था।

शिवाजी का प्रशासन-

छत्रपति शिवाजी का प्रशासन काफी हद तक बढ़ चुकी थी। वह प्रशासनिक प्रथाओं से प्रभावित थे। शिवाजी ने आठ मंत्रियो को चुना।  जिनको अष्ट प्रधान कहा गया था। शिवाजी के मंत्री पदों के अन्य पर कुछ इस प्रकार थे।

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छत्रपति शिवाजी के पद –

  पेशवा 
सेनापति 
मजूमदार 
सुरनवीस या चिटनिस
दबीर
न्यायधीश और पंडितराव

 पेशवा –

  • ये शिवाजी के काफी महत्व पूर्ण मंत्री थे, जो वित्त और सामान्य प्रशासन की पूरी तरह देखभाल करते थे।

सेनापति –

  • ये शिवाजी के काफी मराठा प्रमुख में से ऐसे एक प्रमुख थे जिनका एक सामन्य पद था।

मजूमदार –

  • ये पद अकाउंटेट में होते थे।जो राज का हिसाब किताब रखते थे।

सुरनवीस या चिटनिस –

  • ये  अपने पत्रचार से महाराज की रक्षा करते थे।

दबीर –

  •  ये  समारोहों के व्यवस्थापक थे।  इस पद में विदेशी मामलो को निपटाने  के लिए था। साथ ही वे महाराज की रक्षा भी करते थे।

न्यायधीश और पंडितराव –

  • ये  न्याय में और धार्मिक अनुदान के  प्रभारी था।

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शिवाजी की मृत्यु – Shivaji Maharaj Death

Shivaji महाराज की मृत्यु 3 अप्रेल 1680 में हुई थी। छत्रपति शिवाजी के सभी अधिकार उनके पुत्र संभाजी के पास थे। दूसरी पत्नी से राजा राम नाम एक दूसरा पुत्र था। इस समय राजाराम की उम्र 10 साल की थी। मराठाओ ने संभाजी को राजा मान लिया था।  Shivaji की मृत्यु होने के बाद राजा ओरंगजेब ने निर्णय किया की अब में भारत देश पे राज करुगा। राजा ओरंगजेब पांच लाख सेना लेकर उत्तर भारत की ओर निकल पड़ा।

औरंगजेब ने अब  जोरदार तरीके से संभाजी के ख़िलाफ़ आक्रमण करना शुरु किया। उसने 1689 में संभाजी के बीवी के सगे भाई याने गणोजी शिर्के की मुखबरी से संभाजी को मुकरव खाँ द्वारा बन्दी बना लिया। औरंगजेब ने राजा संभाजी से बदसलूकी की और बुरा हाल कर के मार दिया। अपनी राजा कि औरंगजेब द्वारा की गई बदसलूकी और नृशंसता द्वारा मारा हुआ देखकर पूरा मराठा स्वराज्य क्रोधित हुआ।

उन्होने अपनी पुरी ताकत से राजाराम के नेतृत्व में मुगलों से संघर्ष जारी रखा। 1700  में राजाराम की मृत्यु हो गई। उसके बाद राजाराम की पत्नी ताराबाई 4 वर्षीय पुत्र शिवाजी द्वितीय की संरक्षिका बनकर राज करती रही। आखिरकार 25 साल मराठा स्वराज्य के युद्ध लड के थके हुये औरंगजेब की उसी छ्त्रपती शिवाजी के स्वराज्य में दफन हुये।

Shivaji Maharaj – Life Story of The Legend

Shivaji Maharaj Interesting Facts –

  • पानीपत का युद्ध सन 1659 में छत्रपति शिवाजी और बीजापुर के सुल्तान के बीच हुआ था।
  • shivaji maharaj death date 3 April 1680 थी।
  • शिवाजी महाराज ने सिर्फ 16 साल की उम्र मे ही सबसे पहेला  टोरणा किला जीत था।
  • भारत के वीर सपूतो और हिन्दू हृदय सम्राट शिवाजी महाराज को उनके शासन से उन्हें श्रीमंत छत्रपति शिवाजी महाराज की उपाधि दी थी। 
  • भारत में हिन्दुओ का अब भी रहना और हिन्दू धर्म को मिटता बचाने वाले शिवाजी महाराज किलो के साथ हिन्दू हृदय सम्राट भी कहे जाते थे। 

Shivaji Maharaj Questions – 

1 .शिवाजी के पुत्र का नाम क्या था ?

छत्रपति शिवजी के बेटे के नाम संभाजी, राजाराम, सखुबाई निम्बालकर, रणुबाई जाधव, अंबिकाबाई महादिक और राजकुमारबाई शिर्के था। 

2 .शिवाजी महाराज का इतिहास क्या है ?

19 फरवरी, 1630 को शिवनेरी दुर्ग में जन्मे शिवाजी महाराज हिंदुओं के ह्रदय सम्राट थे।  

3 .shivaji maharaj height and weight कितना था ?

शिवाजी महाराज का वजन अनुमानित 72 किलो था। 

4 .शिवाजी महाराज का जन्म कब हुआ था ?

19 फरवरी, 1630 के दिन शिवाजी महाराज का जन्म कब हुआ था। 

5 .शिवाजी महाराज की मृत्यु कैसे हुई ?

उनकी मौत उनकी आखरी युद्ध जितने के बाद हुई और राज्य सांभाजी महाराज को मिला था। 

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Conclusion –

आपको मेरा Shivaji Maharaj Biography In Hindi बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। 

लेख के जरिये shivaji maharaj jayanti और shivaji maharaj death reason से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दी है।

अगर आपको अन्य व्यक्ति के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है। तो कमेंट करके जरूर बता सकते है।

हमारे आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द।

3 thoughts on “Shivaji Maharaj Biography In Hindi – शिवाजी महाराज का जीवन परिचय”

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