Tana RiRi Biography In Hindi – ताना रीरी का जीवन परिचय

आज के हमारे लेख में आपका स्वागत है। नमस्कार मित्रो आज हम tana riri biography in hindi बताएँगे। संगीत महासम्राग्नी ताना रीरी की जीवनी बताने वाले है। 

1580 के आसपास ताना रीरी का माना जाता है। हम tana riri history आपको बताएँगे। आज हम tanariri vadnagar , tana riri garden और tanariri samadhi place की जानकारी बताने वाले है। स्थान गुजरात में महेसाणा जिले के वडनगर शहर में उपस्थित है। आज हम माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रभाई मोदी के गांव वडनगर के एक Tample Tanariri history in Gujarat से वाकिफ कराने जारहे है।  

tana and riri मंदिर शहर से करीबन 1 किलोमीटर की दुरी पर है। उनका मंदिर का जिणोद्वार और हालही मे बहोत बड़ा गार्डन बनाया गया है। तानारिरि समाधी के स्थान पर हर साल tanariri mahotsav मनाया जाता है। जिन्हे national festival का दर्जा दिया गया है। उनके मंदिर के आसपास तीन तालाब मौजूद होने के कारन उनका नजारा बहुत ही लाजवाब दिखाई देता है। 

Tana RiRi Biography In Hindi – 

नाम  ताना और रीरी 
माता  Sharmishtha
राग  मल्हार राग 
उपलब्धि  सांगित साम्राग्नि बेलड़ी 
जन्म  1580
जाती (cast) नागर ब्राह्मण 
शास्त्रों में उल्लेख  महाकवि नरसिह मेहेता की नाती 
राष्ट्रीयता  भारतीय 

ताना – रीरी का जीवन परिचय –

वडनगर मे महान गायिका ताना-रीरी का जन्म हुआ था | जब तानसेन ने अकबर दरबार में राग दीपक गाया था। तो उनका शरीर पूरी तरह से जुलस गया था। तब इन दोनों बहनो के गाए राग मल्हार के बाद उनका ताप कम हुआ था। ताना अवं रीरी बैजू की पुत्रिया थी | वो दोनों बहने थी उन दोनों की गाथा आज भी गाई जाती है। ताना – रीरी वे दोनों संगीत में निपूर्ण थी। उनकी बराबरी कोई नहीं कर सकता था | ताना -रीरी ” मल्हार राग ” के सुर छेड़ती थी। संगीत के ग्रंथों में परस्पर विरोधाभास नें आज संगीत के छात्रों के सम्मुख बड़ा ही भ्रमात्मक स्थिति उत्पन्न कर दिया है।

ग्रंथों में इतने मतभेद हैं की समझ में नहीं आता की सच किसे माना जाए.संगीत के छात्रों में शास्त्र के प्रति अरुचि होने की प्रमुख वजह एक ये भी है। जो भी थोड़ा बहुत रूचि लेतें हैं। वो इस मतभेद और विरोधाभास के आगे हाथ खड़ा कर अपना सारा ध्यान रियाज पर केन्द्रित कर देतें हैं। गुरुमुखी विद्या और प्रारम्भ में शास्त्रों के प्रति उदासीनता होने के कारण उत्पन्न इस मतभेत से संगीत की विभिन्न विधाएं आज भी प्रभावित हैं।

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ताना – रीरी का व्यक्तित्व – 

एक छोटा उदहारण लें ,ख्याल गायन की सबसे मजबूत कड़ी ‘तराना’ है। जो साधरणतया मध्य और द्रुत लय में गाया जाता है। जिसमें ‘नोम ,तोम ,ओडनी ,तादि,तनना, आदी शब्द प्रयोग किये जाते हैं।कुछ लोग इसकी उत्पत्ति कर्नाटक संगीत के तिल्लाना से मानतें हैं। तो कुछ का मानना है। की तानसेन ने अपनी पुत्री के नाम पर इसकी रचना की.संगीत के सबसे मूर्धन्य विद्वानों में से एक ठाकुर जयदेव सिंह की मानें तो इसके अविष्कारक अमीर खुसरो हैं। 

अब स्वाभाविक समस्या है। की सच किसे मानें ? हमारा भी दिमाग चकराया ,फिर इन तमाम विषयों पर कई लोगों को पढ़ा,उन्हें नोटिस किया,लगा की आज औपचारिक शोध के दौर में कुछ लोग बेहतर कार्य कर रहें हैं। नित नये खोज और जानकारियाँ एकत्र कर संगीत के भंडार को समृद्ध कर रहें हैं.उन्हीं में से एक नाम है,डा हरी निवास द्विवेदी जी का जिनकी किताब ‘तानसेन जीवनी कृतित्व एवं व्यक्तित्व’ ने मुझे प्रभावित किया। 

पढने के बाद कई अनछुए और अनसुलझे पहलू उजागर हुए..तानसेन के बारे में कई भ्रम दूर हुए तो कई जगह बेवजह महिमामंडन और भ्रांतियां दूर हुईं। इसी किताब में वर्णित एक मार्मिक घटना ने तराना की उत्पति के सम्बन्ध में फैले मतभेद को कुछ हद तक जरुर कम किया है।

दिल्ही सल्तनज का बुलावा –

1580 के आस पास की है। जब दिल्ही सल्तानज पर सम्राट अकबर का सम्राज्य शाशन विस्तार जारी था। अपने पराक्रम से सम्राट ने अनेक राज्य जीते थे। 1587 में जब गुजरात विजय अभियान की शुरुवात हुई थी। उस अभियान में तानसेन भी अकबर के साथ थे। एक दिन शाही सेना अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे पड़ाव डाले हुई थी| तब बादशाह की संगीत प्रेम से प्रभावित एक स्थानीय संगीतकार नें बैजू की दो पुत्रियों के अदभुत गायन और कला निपुणता की खबर पहुँचाई। 

ये सुनकर अकबर से रहा न गया उसने बुलावा भेजा और गायन के लिए आमंत्रित किया था। बैजू की मृत्यु के बाद उत्पन्न विषाद और विपन्नता की स्थिति से गुजर रहीं उनकी दो पुत्रीयों ने भारी मन से आमंत्रण स्वीकार किया था। कहतें हैं उस अदभूत गायन को सुनकर अकबर क्या तानसेन भी रोने लगे थे | भारत वर्ष के संगीतकारों के बीच ये खबर पहुंच गई ,सब जानने के लिए उत्साहित की आखिर वो कौन है,जिसने तानसेन को रुला दिया था। 

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Vadnagar History –

वडनगर 2500 सालो से जीवित शहर रहा है | आपको भी वड़नगर के समृद्ध इतिहास के बारे में हम बताएँगे | वडनगर अत्यदिक प्राचीन शहर है | पूरातत्ववेत्ता ओके मुताबिक यह शहर में हजारो साल पहले खेती होती थी। खुदाई के दौरान यहाँ से मिट्टी के बर्तन , गहने , और तरह -तरह के हथियार मिलते रहते है |वडनगर का जिक्र पुराणों में भी कई बार आया है। 7 वी शताब्दी में भारत आये चीनी यात्री ह्यु -एन -त्सांग के यात्रा विवरण में भी वडनगर का भी उल्लेख मिलता है।

इतिहास में वडनगर के कई नाम मिलते है | इनमेसे 1 स्नेहपुर , 2 विमलपुर ,3 आनंदपुर ,4 आनर्तपुर, 5 जेरियो टिम्बो आदि नामोंसे जाना जाता था | ऐसा कहा जाता है की प्राचीन समय में वडनगर गुजरात की राजधानी थी। यह प्राचीन शहर में हालीमे 1 अर्जुनबारी 2 नादिओल 3 घोसकोल 4 पिठोरी 5 अमरथोल 6 बी – एन, इन 6 प्राचीन गेटो से घिरा है | इनमे सबसे प्राचीन गेट अमरथोल है | कपिला नदी भी वडनगर से होकर गुजरती थी |

तानसेन ने गाया दीपक राग –

एक दिन अकबर ने तानसेन को दीपावली के दिन पुरे महल में ” दीपग राग ” छेड़ कर दीपक जलाने को कहा | तानसेन ने दीपक राग छेड कर पुरे महल में दीपक तो जला दिया लेकिन उनके शरीर में मानो आग जल रही हो। यह आग दीपक राग कोई छेड़े और बारिश आये तब तानसेन के शरीर की आग शांत हो सकती है | वो ठूँठता – ठूँठता गुजरात में आ पहुँचता है | और ताना -रीरी को खोजते हुवे आनंदपुर ( वडनगर ) में आ पहुँचता है | और ताना -रीरी से विनती करता है। 

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ताना रीरी का मल्हार राग – Tana Riri Malhar Rag

ताना -रीरी शर्मिठा तालाब के किनारे वो दोनों मल्हार राग  छेड़ती है.और बारिश बरसने लगती है और तानसेन के शरीर में लगी आग शांत हो जाती है | और तानसेन उन दोनों का आभार मानके वह चला जाता है। कहतें हैं इससे अकबर बड़ा प्रभावित हुआ और तानसेन को आदेश दिया की इनको फतेहपुर सीकरी के दरबार में लाया जाय | तानसेन को ज्ञात हुआ की ये तो राजा मानसिंह तोमर संगीतशाला के वरिष्ठ आचार्य बैजू की पुत्रियाँ हैं

जिनका नाम बैजू ने बड़े प्रेम से “ताना – रीरी” रखा था | तानसेन न चाहते हुए भी शाही फरमान को मानने के लिए विवश थे| अकबर ने तानसेन सैनिको के साथ फतेहपुर सिकरी के दरबार मे स्थान लेने के लिए आमंत्रण भेजा वो दोनों बहने ना चाहते हुवे भी अकबर के आमंत्रण को स्वीकार किया | इस प्रस्ताव को भारी विपत्ति समझ बैजू की दोनों पुत्रियों ने तानसेन से अकबर को ये खबर भिजवाया की ,वो दो दिन बाद आ जायेंगी। ठीक दो दिन बाद बादशाह द्वारा सुसज्जीत पालकियां भेजी गयी। 

ताना रीरी का आत्मसमर्पण – Tana RiRi Death

फतेहपुर सीकरी आकर पर्दा उठाया गया तो ताना – रीरी के शव प्राप्त हुए | इसके बाद तो कहतें हैं की बादशाह को इतना दुःख हुआ जितना जीवन में कभी न हुआ था | उसने पश्चाताप करने के लीये अनेक जियारतें और तीर्थयात्राएँ की। इस घटना के बाद तानसेन को सामान्य होने में वक्त लगा था | इसी घटना से व्याकुल होकर ताना – रीरी की याद में ‘तराना’ गायन प्रारम्भ किया ।आज भी कभी-कभी मैं ख्याल सुनतें वक्त तराना के समय असहज हो जाता हूँ। आँखे नम होकर उन दो महान वीरांगनाओं को याद करने लगती हैं।  इतिहास की किताबे इन दो वीरांगनाओके बलिदान को कभी नहीं भूल पाएंगे। 

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Tana RiRi Information Video –

Tana RiRi Facts –

  • ताना रीरी समाधि आज भी वडनगर शहर से एक किलोमीटर की दूर उपस्थित है। 
  • tana riri mahotsav 2020 awards अनुराधा पौडवाल और वर्षा बेन त्रिवेदी को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया था। 
  • tana riri awards के रूप में विजय रुपाणी ने दो व्यक्तिओ को 2.50 लाख रुपए और शॉल,ताम्रपत्र दे करके सम्मानित किया था। 
  • ताना रीरी मल्हार राग का अलाप करते थे तब बारिश की शुरूआत हुआ करती थी। 
  • vadnagar tanariri garden में प्रति वर्ष जुलाई के प्रथम सप्ताह में आयोजित किया जाने वाला महोत्सव है। 

Tana RiRi Questions –

1 .tanariri award started year kaun sa hai ?

ताना रीरी अवार्ड्स की शुरुआत नरेंद्र मोदी ने 2003 की साल में की थी। 

2 .tanariri story kya hai ?

ताना रीरी एक समय की संगीत में निपुण दो बालिकाएं थी जिनके गाने से बारिश हुआ करती थी। 

3 .tanariri samadhi place kaha hai ?

ताना रीरी समाधी गुजरात के वडनगर शहर में है। 

4 .tanariri award winner list bataaye ?

अब तक ताना रीरी अवार्ड अनुराधा पौडवाल और वर्षा बेन त्रिवेदी को मिला है। 

5 .tanariri mahotsav start from which year ?

तानिरि महोत्सव की शुरूआत 2003 की साल में हुई थी।

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Conclusion –

मेरा आर्टिकल tana riri biography in hindi बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा।  लेख के जरिये  हमने tanariri mahotsav start from which year और Tanariri festival History से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दी है। अगर आपको अन्य व्यक्ति के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है। तो कमेंट करके जरूर बता सकते है। हमारे आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द।

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