Tipu Sultan Biography In Hindi – टीपू सुल्तान की जीवनी

आज के हमारे लेख में आपका स्वागत है। नमस्कार मित्रो आज हम Tipu Sultan Biography In Hindi बताएँगे। उसमे  भारत के 18 वीं शताब्दी के सबसे महान शाशक  टीपू सुल्तान का जीवन परिचय बताने वाले है। 

टीपू सुल्तान के बारे में बहुत सारे विवाद चल रहा थे। लेकिन भारतीय इतिहास के पन्नो से टीपू सुल्तान का नाम हटाना मुश्किल ही नहीं ना मुकिन है। आज हम tipu sultan ki rajdhani ,tipu sultan ki talwar और tipu sultan real story से जुडी सारी बातो से सबको वाकिफ करने वाले है। टीपू सुल्तान का पूरा नाम फ़तेह अल्ली खान साहेब था। ऐसा कहा जाता है। की उन्होंने भारत देश की रक्षा के लिए जैसे राजपूत महाराजाओ ने भारत के लिए अपने शीश कटवा दिए इस तरह टीपू सुल्तान का इतिहास भी यही बात दोहराता है। की मातृभूमि के लिए उन्होंने लड़ते हुए अपना जीवन व्यतीत किया। 

tipu sultan family की बात करे तो टीपू सुल्तान के पिता मैसूर सम्राजय के एक सैनिक थे। लेकिन टीपू सुल्तान के पिता में उतनी बहादुरी और ताकत थी। की बाद में मैसूर के शासक बन गए। टीपू सुल्तान एक योद्धा के रूप में माना जाता हे। 18 वी शताब्दी की अंतिम चरण में टीपू सुल्तान के पिता को कैंसर की बीमारी से मोत हो गयी। टीपू सुल्तान के पिता की मोत होने से पूरा मैसूर राज्य में एक गहरी चोट आयी थी। तो चलिए tipu sultan history in hindi बताना शुरू करते है। 

Tipu Sultan Biography In Hindi –

पूरा नाम सुल्तान सईद वाल्शारीफ़ फ़तह अली खान बहादुर साहब टीपू
जन्म 20 नवंबर 1750
जन्म स्थान देवनहल्ली, (वर्तमान समय में बेंगलौर, कर्नाटका)
माता फ़ातिमा फख्र – उन – निसा
पिता हैदर अली
पत्नी सिंध सुल्तान
cast इस्लाम, सुन्नी इस्लाम
राज्य  मैसूर साम्राज्य के शासक
राष्ट्रीयता भारतीय
मृत्यु 4 मई 1799
मृत्यु स्थान श्रीरंगपट्टनम, (वर्तमान का कर्नाटका)

Tipu Sultan का शासन – 

tipu sultan birth place देवनहल्ली था जो वर्तमान का समय में बेंगलौर, कर्नाटका कहा जाता है। टीपू सुल्तान के उनके पिता ही उनका एक मात्र सहारा थे। लेकिन उनकी मोत हो जाने से टीपू सुल्तान के एकलोता सहारा भी छूट चूका था। अपने पिता के तत्काल मोत से टीपू सुल्तान अकेले हो गये थे। बाद में उन्होंने अपने राज्य का कार्य कल संभाला था। और अपने मैसूर राज्य की रक्षा करने के लिए 18 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में टीपू एक ऐसा महान शासक था। जिसने अंग्रेजो को भगाने के लिए और भारत देश से निकाल ने के लिये पूरा प्रयत्न किया था। और उनके युद्ध कौशल्य के कारन अंग्रेज भी भयभीत हुए थे। 

टीपू सुल्तान से आगमन से अंग्रेजो पे गहरी चोट आयी जहाँ एक ओर ईस्ट इंडिया कम्पनी अपने नवजात ब्रिटिश सम्राजय के विस्तार के लिए प्रयत्न सील थी और दूसरी तरह टीपू सुल्तान अपने मैसूर राज्य की रक्षा के लिए अंग्रेजो को सामने खड़े हो गए थे। tipu sultan  के पिता की मृत्यु हो जाने के बाद 1782 में टीपू सुल्तान मैसूर की गद्दी पे बेठ गये थे।  टीपू सुल्तान के पिता अंग्रजो के सामने एक बार युद्ध हार गये थे। उनके पिता के हार जाने से टीपू सुल्तान अपने पिता का बदला लेना चाहते थे। 

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 टिपु सुल्तान का इतिहास –

अंग्रेजो टीपू सुल्तान से भयभीत रहते थे| क्योकि अंग्रेजो ने टीपू सुल्तान के पिता को हराये थे| इस लिए अंग्रेजो टीपू सुल्तान से भयभीत रहते थे। अंग्रेजो को टीपू सुल्तान की आकृति में नोपोलियन की तस्वीर दिखाई देती हे|वह उनके भाषाओ के ज्ञाता थे जब टीपू सुल्तान के पिता जीवित थे। तब टीपू सुल्तान ने युद्ध लड़ने के लिए अस्त्र और शस्त्र विध्या सिखने के लिए पारंभ कर दिया था| परन्तु टीपू सुल्तान के महत्व कारण उनके पिता का पराजय था। 

टीपू सुल्तान नाम उर्दू पत्रकारिता के अग्रणी के रूप में भी याद किया जाएगा| क्योंकि उनकी सेना का साप्ताहिक बुलेटिन उर्दू में था, यह सामान्य धारणा है। कि जाम-ए-जहाँ नुमा, 1823 में स्थापित पहला उर्दू अखबार था। वह गुलामी को खत्म करने वाला पहला शासक था। कुछ मौलवियों ने इस उपाय को थोड़ा बहुत बोल्ड और अनावश्यक माना। tipu sultan  अपनी बंदूकों से चिपक गया। उन्होंने पूरे जोश के साथ उस लाइन को लागू करने के फैसले को लागू कर दिया था। 

जिसमें उनके देश में प्राप्त स्थिति को इस उपाय की आवश्यकता थी। टीपू सुल्तान फारसी,कन्नड़ और कुरान बोल सकते थे, लेकिन उन्होंने ज्यादातर फ़ारसी में बात की जो उन्होंने आसानी से लिखी थी। उन्हें विज्ञान, चिकित्सा, संगीत, ज्योतिष और इंजीनियरिंग में दिलचस्पी थी। लेकिन धर्मशास्त्र और सूफीवाद उनके पसंदी विषय थे। कवि यों और विद्वानों ने उसके दरबार को सुशोभित किया,और वह उनके साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा करने के शौकीन थे। 

टीपू सुल्तान की बड़ी लड़ाई – 

टीपू सुल्तान की सबसे पहली लड़ाई द्वितय एंग्लो-मैसूर लड़ाई थी| टीपू सुल्तान एक बहादुर योद्धा थे। टीपू सुल्तान ने मैसूर युद्ध में अपनी क्षमता को भी साबित किया था| ब्रिटिश सेना से लड़ने के लिए उनके पिताने ने उसको युद्ध लड़ने के लिए भेजा था इस युद्ध में टीपू सुल्तान ने काफी प्रदशन बताया था। युद्ध में मध्य में ही टीपू सुल्तान के पिता को कैंसर नाम जैसी बीमारी थी| तो टीपू सुल्तान के पिता उसी कारण उनकी मृत्यु हो गयी थी।  इसके बाद टीपू सुल्तान मैसूर की गद्दी पे बैठे थे। 

सन 1784 मंगलौर की संधि के साथ युद्ध की समाप्ति की और युद्ध की प्राप्ति की थी। tipu sultan  की द्रुतिय बड़ी लड़ाई हुवी वो लड़ाई ब्रिटिश सेना के खिलाफ ही थी| इस लड़ाई में टीपू सुल्तान की बड़ी हार हुयी थी| युद्ध श्रीरंगपट्ट्नम की संधि के साथ समाप्त हो गया था। जिसके परिणामस्वरूप उन्हें अपने प्रदेशो का आधा हिस्सा हस्ताक्षरकर्ताओ और साथ ही हैदराबाद के निजाम एवं मराठा सम्राज्य के प्रतिनिधि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कपनी के लिए छोड़ना पड़ा था। 

सन 1799 में हुई चौथी एंग्लो-मैसूर लड़ाई थी जो कि टीपू सुल्तान की तीसरी बड़ी लड़ाई थी| इस में टीपू सुल्तान ब्रिटिश सेना के सामने युद्ध लड़े थे| परन्तु इस युद्ध में टीपू सुल्तान ने मैसूर को खो दिया और इस युद्ध में टीपू सुल्तान की मोत हो गई| टीपू सुल्तान ने उनके जीवन में तीन बड़ी लड़ाई ओ लड़ी थी| 

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टीपू सुल्तान का मंदिरो में दान –

उनके मोत होने से पहले टीपू सुल्तान ने कही हिन्दू मंदिरो में काफी सारे तोफे दिए थे। मेलकोट के मंदिरो में सोने और चांदी के बर्तन हे वो टीपू सुल्तान ने ही दिया है और उनके शिलालेख बताते हे की ये टीपू ने ही भेट किया हे सन 1782 और 1799 के बिच अपनी जागीर को मंदिरो को 34 दान के सनद दिये इन में टीपू सुल्तान ने इन में से कही को सोने और चांदी की थाली काफी सरो को तोफे पेश किये थे। tipu sultan history hindi  .एक मुस्लिम सुल्तान होने के बावजूद उन्हों ने काफी सारे हिन्दू मंदिरो में सोने और चांदी जैसे थाली को काफी मंदिरो में दान किया था

टीपू सुल्तान की मृत्यु – Tipu Sultan Death

tipu sultan  ने उनके जीवन में तीन बड़ी लड़ाई ओ लड़ी थी और तीसरी बड़ी लड़ाई में टीपू सुल्तान की मोत हो गयी थी| tipu sultan date of death 4 मई 1799 थी। टीपू सुल्तान की मृत्यु मैसूर की श्रीरंगपट्टनम में हो गई थी| अंग्रेजो ने टीपू सुल्तान की मोत हो जाने के बाद अंग्रेजो ने टीपू सुल्तान की तलवार पे लिखा था| ” की मालिक मेरी साहेता कर की में काफिरो का सफाया कर दू” वो तलवार भी ब्रिटिश ले गये थे और मैसूर राज्य भी अंग्रजो के हाथ में आ गया था। 

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Tipu Sultan Biography In Hindi –

Tipu Sultan Facts –

  • टीपू सुल्तान की तलवार का इतिहास बताये तो 26 मार्च के दिन मैसूर के शासक की बेशकीमती तलवार की लिलामि हुई थी। 
  • tipu sultan sword weight 0.85 KG बताया जाता है। 
  • टीपू सुल्तान की जंग तो अच्छी लड़ते ही थे उनके अलावा वो विद्वान भी था। उनकी वीरता से प्रभवित होकर उनके पिता हैदर अली ने उन्हें उन्हें शेर-ए-मैसूर की उपाधि से सन्मानित किया था।
  • राजा टीपू सुल्तान और दलितऔरतों को शरीर के ऊपरी भाग पर कपड़ा नहीं ढकना ऐसे राज्य पर आक्रमण करके सबको सामान अधिकार दिया था। 
  • टीपू सुल्तान का महल बंगलौर स्थित टीपू समर पैलेस से ख्यात नाम है। उन्हें टीपू अबोड ऑफ हैपीनेस कहते थे। 

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Tipu Sultan Questions –

1 .tipu sultan kaun tha ?

टीपू सुल्तान मैसूर के शासक जिनसे अंग्रेज भयभीत हुआ करते थे ऐसे महान यौद्धा थे। 

2 .tipu sultan ki mrtyu kaise hue ?

1799 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने निजामों और मराठों से मिलकर मैसूर पर आक्रमण कियावही चौथे आंग्ल-मैसूर युद्ध में टीपू की हत्या करदी गयी थी। 

3 .angrej tipu sultan se kyon bhayabheet the ?

अंग्रेज टीपू सुल्तान से भयभीत थे क्योकि टीपू सुल्तान को नेपोलियन बोना पार्ट समझते थे। 

4 .tipu sultan ki mrtyu kab hue ?

टीपू सुल्तान की मृत्यु आंग्ल-मैसूर युद्ध में 4 मई 1799 केदिन उनकी हत्या करदी गयी थी। 

5 .tipu sultan ki upalabdhiyon ka varnan kijie ?

टीपू सुल्तान की उपलब्धियों में वह भारत का पहला स्वतंत्रता सेनानी माना जाता है। 

 6 .tipu sultan ko kisane mara ? 

इस्ट इंडिया कंपनी,मराठा और निजामों ने साथ मिलकर टीपू सुल्तान को किसने मारा था। 

7 .tipu sultan ki aakhari ladai ko si thi ?

टीपू सुल्तान की आखिरी लड़ाई आंग्ल-मैसूर युद्ध था।

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Conclusion –

आपको मेरा Tipu Sultan Biography In Hindi बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा।  लेख के जरिये  हमने tipu sultan family और tipu sultan cast से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दी है। अगर आपको अन्य व्यक्ति के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है। तो कमेंट करके जरूर बता सकते है। हमारे आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द।

2 thoughts on “Tipu Sultan Biography In Hindi – टीपू सुल्तान की जीवनी”

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