Aurangzeb Biography In Hindi – औरंगजेब की जीवनी हिंदी

आज के हमारे लेख में आपका स्वागत है। नमस्कार मित्रो आज हम Aurangzeb Biography In Hindi,में मुग़ल सल्तनज के छठ्ठे एव अंतिम शासक औरंगजेब का जीवन परिचय देने वाले है। 

औरंगजेब को ‘आलमगीर’ की शाही उपाधि भी मिली थी जिसका अर्थ होता है ‘विश्वविजेता’| औरंगजेब का जन्म 4 नवम्बर, 1618 को दाहोद, गुजरात में हुआ था। आज हम aurangzeb full name,aurangzeb religious policy और aurangzeb son की माहिती बताने वाले है। उनका पूरा नाम अबुल मुजफ्फर मूही-उद-दीन मुहम्मद बिन औरंगजेब था। 

aurangzeb father शाहजहाँ और मुमताज़ की छठी संतान और तीसरा बेटा था। उसके पिता उस समय गुजरात के सूबेदार थे। जून 1626 में जब उसके पिता द्वारा किया गया विद्रोह असफल हो गया। तो उसके भाई दारा शिकोह को उनके दादा जहाँगीर के लाहौर वाले दरबार में नूर जहाँ द्वारा बंधक बना कर रखा गया। 26 फरवरी, 1628 को शाहजहाँ को मुग़ल सम्राट घोषित किया गया था। तो चलिए औरंगजेब की कहानी शुरू करते है।

Aurangzeb Biography In Hindi –

 नाम  अबुल मुज़फ्फर मोहीउद्दीन मोहम्मद औरंगजेब     आलमगीर
 जन्म  3 नवंबर 1618
 जन्म स्थान  दाहोद मुगल साम्राज्य (गुजरात)
 पिता  शाहजहां
 माता   मुमताज महल
 भाई  दारा शिकोह , सुजा
 शासन काल  31 जुलाई 1658 से 3 मार्च 1707
 मृत्यु   3 मार्च सन 1707

औरंगजेब का इतिहास – 

मुगल साम्राज्य बहुत बड़ा था और मुगल राजाओं के नाम भी बहुत है लेकिन उसका छठा शासक औरंगजेब आलमगीर कोन था। यह बताने वाले है। उसमे अकबर ही ऐसे बादशाह थे। जिनके समय में मुगल साम्राज्य अपने स्वर्ण युग में था। उनका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा अपने मुगल साम्राज्य का विस्तार करने पर था। वह एक कुशल बादशाह था। आप इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि इन्होंने लगभग आधी शताब्दी तक राज किया था। 

उसने दक्षिणी भारत में मुगल साम्राज्य का विस्तार करने का बहुत ही प्रयास किया इस के इस प्रयास से दक्षिणी भारत पर विजय प्राप्त की थी। उस समय मुगल साम्राज्य 1200000 वर्ग मील में फैला हुआ था मुगल सम्राट औरंगजेब अपने समय में कुल 15 करोड़ लोगों पर शासन करता था। उसने अपना पूरा शासनकाल शरीयत या इस्लामिक कानून पर चलाया औरंगजेब के किस्से में वह एक कट्टर सुन्नी मुसलमान था। 

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शरीयत कानून –

aurangzeb badshah चाहता था। उसका शासन इस्लामिक कानून की तरह चले यहां तक की सजा देने का प्रावधान भी शरीयत कानून के हिसाब से हो औरंगजेब एक महान योद्धा था। उन्होंने अपने नाम को आलमगीर शब्द से जोड़ा जिसका मतलब होता है विश्व विजेता और वह एकमात्र ऐसे मुगल बादशाह थे जिसके गैर मुसलमान लोगों पर भी शरीयत कानून लागू किया था।

औरंगजेब की धार्मिक निति  बहुत ख़राब थी। उन्होंने काफी हिंदू धर्म के मंदिरों को नष्ट करवाया उसी समय से मुगल सम्राट औरंगजेब की छवि गैर मुस्लिम समाज में खराब होने लगी थी। जहां मुगल सम्राट अकबर हिंदू मुस्लिम एकता का पैगाम देते थे। वही औरंगजेब इन सबसे अलग थे,वह एक कट्टर मुसलमान थे |

औरंगजेब का प्रारंभिक जीवन – Aurangzeb Biography

3 नवंबर 1618 को मुगल सम्राज्य दाहोद जो कि वर्तमान समय में गुजरात में है वहां हुआ औरंगजेब शाहजहां और मुमताज महल की छठी संतान थी वह भाइयों में तीसरा था। औरंगजेब ने अरबी फारसी भाषा को आगरा में रहकर सीखा जब शाहजहां को 1628 मैं मुगल सम्राट घोषित किया गया। aurangzeb height बहुत लम्बी चौड़ी थी। 

उसके बाद मुगल प्रथाओं के अनुसार यानी कि बादशाह के बेटे या शहजादे उसके साम्राज्य को बराबर बराबर संभालेंगे इसी लिए शाहजहां ने औरंगजेब को 1634 में दक्कन का सूबेदार बना दिया था। aurangzeb wife कीबात करे तो उनको तीन पत्निया के नाम नवाब बाई , दिलरस बानू बेगम और औरंगाबादी महल थे। 

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औरंगजेब के शासन की शुरुआत –

बादशाह औरंगजेब के शासन की शुरुआत 1634 को मान सकते हैं जब उसके पिता शाहजहां ने उसे दक्कन का सूबेदार बनाया था। वैसे तो औरंगजेब बचपन से ही युद्ध कला में निपुण था और एक अनुशासित बादशाह था। उसके भाई दारा शिकोह और सुजा जिसमें से दारा शिकोह शाहजहां का सबसे प्रिय पुत्र था। जब औरंगजेब दक्कन का सूबेदार था। तो इधर शाहजहां ने दारा शिकोह को अपने मुगल दरबार का कामकाज सौंप दिया था। 

जब औरंगजेब आगरा आया तो उसने यह देखा तो बहुत क्रोधित हुआ क्रोध के कारण ही शाहजहां ने उसे दक्कन के सूबेदार पद से बर्खास्त कर दिया। तथा कुछ समय बाद शाहजहां ने उसे दक्कन को छोड़ गुजरात का सूबेदार बना दिया गुजरात का सूबेदार बनने के बाद उसने उस पर रहते हुए बहुत अच्छा काम किया था। 

जिसकी वजह से शाहजहां ने उसे उत्तरी अफगानिस्तान उज्बेकिस्तान (यह सभी स्थान आज के इन नामो से जाने जाते हैं) का सूबेदार बना दिया था। इसके बाद औरंगजेब के पद में लगातार उन्नति होती रही उसे बाद में मुल्तान व सिंध का गवर्नर बना दिया था।  इस समय तक औरंगजेब शासन व्यवस्था को बनाए रखने मे अपने दोनों भाइयों से कुशल हो गया था। 

शाहजहां को कैद किया –

1652 को शाहजहां की तबीयत खराब हो गई तब सभी को ऐसा लग रहा था। मुगल सम्राट शाहजहां की मृत्यु हो जाएगी ऐसा देखकर तीनों भाइयों के बादशाह बनने की होड़ लग गई। जिससे गद्दी पर बैठने के लिए संघर्ष होना शुरू हो गया था। औरंगजेब ने अपने भाई दाराशिकोह को फांसी दे दी उसने अपने भाई सुजा जो कि बंगाल का गवर्नर था। उसको हरा दिया। और शाहजहां को आगरा के लाल किले में कैद करवा दिया था।

कहा जाता है,की औरंगजेब द्वारा शाहजहां को कैद करवाने का मुख्य कारण शाहजहां के शासनकाल के अंतिम समय में ताजमहल निर्माण कार्य में अपार धन व्यय होने से था। शासन में वित्तीय व्यवस्था बिगड़ गई थी जिसके कारण औरंगजेब नाखुश था इसलिए औरंगजेब ने शाहजहां को कैद कर लिया था। 

औरंगजेब का शासनकाल कब तक चला – 

औरंगजेब ने शाहजहां को कैद कर 1659 में अपना राज्यभिषेक करवाया था। औरंगजेब एक कट्टर मुसलमान बादशाह था। मुगल साम्राज्य की अगर बात करें तो अकबर के बाद सभी बादशाह गैर मुस्लिमों के प्रति उदार रहे थे। औरंगजेब इन सब से विपरीत था। उसने अपना शासक इस्लामिक कानून यहां शरियत के अनुसार चलाया था। उसके गैर मुस्लिमों पर तीर्थ कर जजिया जो अकबर ने हटवाया था। 

वह उसने फिर से प्रारंभ किया तथा इसने हिंदू देवी देवताओं के काफी मंदिरों को नष्ट करवा दिया। उसने सती प्रथा का अंत किया तथा कश्मीरी ब्राह्मणों को जबरन इस्लाम कबूल करने को कहा जो कि इस्लाम के सख्त खिलाफ है। इस्लाम में यह कभी नहीं कहा जाता की कोई गैर मुस्लिम इस्लाम को जबरन कबूल करें इसके बाद कश्मीरी पंडित सिक्खों के नौवे गुरु तेग बहादुर के पास गए।

उन्होंने भी इसका विरोध किया जिसके कारण औरंगजेब ने तेग बहादुर का सर कलम करवा दिया था। यदि अगर औरंगजेब के शासनकाल की बात की जाए तो उस समय काफी उतार-चढ़ाव वाला शासक रहा इसका मुख्य कारण यह था कि उत्तरी भाग में उस समय सिखों का शासक मजबूत हो रहा था। दक्षिण भाग में मराठाओं का इन दोनों ने ही औरंगजेब के नाक में दम कर रखा था।

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साम्राज्य का विस्तार –

औरंगजेब और अकबर मुगल साम्राज्य में केवल यही दो बादशाह थे। जिन्होंने अपना शासन केवल और केवल विस्तार करने पर जोर दिया था। एक बादशाह से दूर अगर इनके व्यक्तिगत जीवन कि अगर हम बात करें तो मानो ऐसा लगता है। कि वह दो व्यक्ति हैं एक जो बादशाह है और दूसरा वह जो साधारण जीवन व्यतीत करता है। जी हां वह बहुत ही सीधा सादा जीवन व्यतीत करते थे।

वह हमेशा एक बादशाह की तरह फिजूलखर्ची नहीं करते थे। क्योंकि वह अपने शासन को शरीयत के हिसाब से चलाते थे। और खुद भी उस शरीयत का पालन करते थे। उन्होंने परिवहन तथा चुंगी कर को समाप्त कर दिया था। जो कि शरीयत के खिलाफ था वह ज्यादा फिजूलखर्ची नहीं करते थे। वह वक्त निकालकर कुरान की नकल की प्रतियों और टोपियों को सीकर तथा उन्हें बेचकर पैसे कमा लेते थे। 

रानी सारंधा की वीरता और औरंगजेब की कहानी – 

aurangzeb history में बादशाह औरंगजेब के बारे में कई बातों का उल्लेख मिलता है। उसमें अच्छी और बुरी सभी तरह की बातों का उल्लेख है। मुगल बादशाहों में औरंगजेब सबसे ज्यादा विवादित बादशह था। उसकी एक कहानी यहां प्रस्तुति है जिसके बारे में इतिहासकारों में मतभेद हैं। बादशाह औरंगजेब रानी सारंधा से अपने अपमान का बदला लेना चाहता है।

रानी सारंधा के पति ओरछा के राजा चंपतराय थे। बादशाह ने हिन्दू सुबेदार शुभकरण को चंपतराय के विरुद्ध युद्ध अभियान पर भेजा। शुभकरण बचपन में चंपतराय का सहपाठी भी थी। दुर्भाग्यवश चंपतराराय के कई दरबारी भयवश उससे टूटकर औरंगजेब से जा मिले थे। पर राजा चंपतराय और रानी सारंधा ने अपना धैर्य और साहस नहीं छोड़ा। उन्होंने डटकर मुकाबला किया लेकिन बादशाह के सैनिकों की संख्‍या बढ़ती ही जा रही थी।

लगातर आक्रमण के चलते राजा और रानी ने ओरछा से निकल जाना ही उचित समझा। ओरछा से निकलकर राजा तीन वर्षों तक बुंदेलखंड के जंगलों में भटकते रहे। महाराणा प्रताप की तरह ऐसे कई राजाओं ने अपने स्वाभिमान के लिए कई वर्षों तक जंगल में बिताने पड़े थे। चंपतराय भी जंगलों में घूम रहे थे।

चंपतराय को गिरफ्‍तार किया –

रानी सारंधा भी अपना पत्नी धर्म निभा रही थी। वह भी अपने पति और परिवार के हर सुख दुख में साहसपूर्ण तरीके से साथ देती थी। औरंगजेब ने चंपतराय को बंदी बनाने के अनेक प्रयास किए, लेकिन असफल हुए। अंत में उसने खुद की चंपतराय को ढूंढ निकालने और गिरफ्‍तार करने का फैसला किया।

तलाशी अभियान में लगी बादशाही सेना हटा ली गई, जिससे चंपतराय को यह लगा की बादशाह औरंगजेब ने हार मानकर तलाशी अभियान खत्म कर दिया है। तब ऐसे में राजा अपने किले ओरछा में लौट आए। औरंगजेब इसी बात कर इंतराज कर रहा था। उसने तत्काल ही ओरछा के किले को घेर लिया। वहां उसने खूब उत्पात मचाया।

किले के अंदर लगभग 20 हजार लोग थे। किले की घेराबंदी को तीन सप्ताह हो गए थे। राजा की शक्ति दिन प्रतिदिन क्षीण होती जा रही थी। रसद और खाद्य सामग्री लगभग समाप्त हो रही थी। राजा उसी समय ज्वार से पीढ़ित हो गया। एक दिन ऐसा लगा की शत्रु आज किले में दाखिल हो जाएंगे।

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सारंधा के साथ विचार विमर्ष किया –

सारंधा ने किले से बाहर निकल जाने का प्रस्ताव राजा के समक्ष रखा। राजा इस दशा में अपनी प्रजा को छोड़कर जाने के लिए सहमत नहीं थे। रानी ने भी संकट के समय प्रजा को छोड़कर जाने को बाद में उचित नहीं समझा। तब रानी ने अपने पुत्र छत्रसाल को बादशाह के पास संधि पत्र लेकर भेजा, जिससे निर्दोष लोगों के प्राण बचाए जा सके। अपने देशवासियों की रक्षा के लिए रानी ने अपने प्रिय पुत्र को संकट में डाल दिया।

 औरंगजेब ने छत्रसाल को अपने पास रखा लिया और प्रजा से कुछ न कहने का प्रतिज्ञापत्र भिजवाने का सुनिश्चित किया। रानी को यह प्रतिज्ञा पत्र उस वक्त मिला जब वह मंदिर जा रही थी। उसे पढ़कर प्रसन्नता हुई लेकिन पुत्र के खोने का दुख भी थी। अब सारंधा के समक्ष एक ओर बीमार पति तो दूसरी ओर बंधक पुत्र था। फिर भी उसने साहस से काम लिया और अब चंपतराय को अंधेरे में किले से निकालने की योजना बनाई। 

सारंधा का बलिदान –

अचेतावस्त्रा में रानी अपने राजा को किले से 10 कोस दूर ले गई। तभी उसने देखा कि पीछे से बादशाह के सैनिक आ रहे हैं। राज को भी जगाया। राजा ने कहा कि मैं बादशाह का बंधक बनसे से अच्‍छा है कि यही वीरगती को प्राप्त होऊ। राजी के साथ कुछ लोग थे जिन्होंने बादशाह के सैनिकों से मुकाबला किया और रानी का अंतिम सैनिक भी जब वीरगती को प्राप्त हो गया।

डोली में बैठे राजा ने रानी से कहा आप मुझे मार दें क्योंकि में बंधक नहीं बनना चाहता। रानी ने भारी मन से ऐसा ही किया। बादशाह के सैनिक रानी के साहस को देखकर दंग रह गए। कुछ ही देर बाद उन्होंनें देखा की रानी ने भी अपनी उसी तलवार से स्वयं की गर्दन उड़ा दी।

औरंगजेब की मृत्यु – Aurangzeb Death 

दक्षिण में मराठाओं का साम्राज्य बढ़ गया और उनकी सेना को मराठाओं पर सफलता नहीं मिल रही थी। आपको जानकर हैरानी होगी कि औरंगजेब ने अपनी सेना को लेकर मराठाओं का वर्चस्व कम करने के लिए वह अपनी राजधानी से दूर रहे थे तथा अपने शासनकाल के अंतिम 25 साल उन्होंने इसी अभियान में लगा दिए थे।

औरंगजेब की मृत्यु 3 मार्च सन 1707 में, लगभग नब्बे साल की उम्र में मर गया और औरंगाबाद (खुल्दाबाद, औरंगाबाद से 25 किमी दूर) में एक सड़क के किनारे उसे एक मामूली औरंगजेब का मकबरा (aurangzeb tomb) में दफनाया गया था| उसका साम्राज्य लंबे समय तक उनकी मृत्यु के पश्चात जीवित नहीं रह सका था। 

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Mughal Emperor Aurangzeb History Video –

Aurangzeb Facts –

  • औरंगजेब ने जहाँगीर को लाहौर वाले दरबार में नूर जहाँ द्वारा बंधक बना के रखा था ।
  • सम्राट औरंगजेब का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा  मुगल साम्राज्य का विस्तार करने का था।
  • औरंगजेब उनके पिताजी को शाहजहां को कैद कर 1659 में अपना राज्यभिषेक करवाया था।
  • मुगल साम्राज्य 1200000 वर्ग मील और कुल 15 करोड़ लोगों पर मुगल सम्राट औरंगजेब ने शासन करता था।
  • औरंगजेब ने अरबी और फारसी की औपचारिक शिक्षा प्राप्त की हुई थी। 

Aurangzeb Questions 

1 .aurangajeb ka makabara kisane banavaaya tha ?

बहादुर शाह जफ़र ने औरंगजेब का मकबरा बनवाया था।

2 .aurangajeb kis ka putr tha ?

 शाहजहाँ और मुमताज़ का तीसरा पुत्र औरंगजेब था

3 .aurangajeb kis ka putr tha ?

उसके भाई दारा शिकोह ने औरंगजेब की हत्या करदी थी। 

4 .aurangajeb ke bete kitane the ?

सम्राट औरंगजेब के पांच बेटे थे। 

5 .aurangajeb kee betee ka naam ?

 ज़ेब-अन-निसा, मिहर-अन-निसा बेगम ,जीनत-उन-nissa ,जुबैद-उन-निसा और बदर-अन-निसा बेगम औरंगजेब की बेटिया थी। 

6 .aurangajeb ka uttaraadhikaaree kaun tha ?

उसके बाद मुगल साम्राज्य का पतन हो गया था। 

7 .kaun sa mugal baadashaah sharaab nahin peeta tha ?

मुगल बादशाह औरंगजेब शराब नही पीता था ।

इसके बारेमे भी जानिए :- जहाँगीर की जीवनी हिंदी

Conclusion –

आपको मेरा यह आर्टिकल Babu aurangzeb history hindi बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। इस लेख के जरिये  हमने औरंगजेब के पिता का नाम और औरंगजेब का जन्म कब हुआ से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दे दी है।  अगर आपको इस तरह के अन्य व्यक्ति के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है।  तो आप कमेंट करके जरूर बता सकते है। हमारे इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द ।

2 thoughts on “Aurangzeb Biography In Hindi – औरंगजेब की जीवनी हिंदी”

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error: Sorry Bro
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