Genghis Khan Biography In Hindi – चंगेज खान की जीवनी

नमस्कार मित्रो आज के हमारे लेख में आपका स्वागत है आज हम Genghis Khan Biography In Hindi में एक महान मंगोल शासक चंगेज खान का जीवन परिचय बताने वाले हे। 

वह अपनी क्रूरता, बर्बरता, संगठन शक्ति और आक्रामक सम्राज्य विस्तार करने के लिए पूरी दुनिया में सबसे क्रूर सेनापति के रुप में विख्यात था। चंगेज खान युद्ध से पहले ही दुश्मन के हौसले को अपनी चपलता से परास्त करने में माहिर हुआ करता था। आज genghis khan achievements ,genghis khan quotes और genghis khan wife से जुडी सभी माहिती से सबको महितगार करने वाले है। 

एक बेहतरीन घुड़सवार और तीरंदाज की ख्याति दुनिया में चारों तरफ फैली हुई थी। आपको बता दें कि बचपन में ही उनके पिता येसुजेई बगातुर को जहर देकर बर्बरता पूर्ण तरीके से मार दिया गया था, पिता की दर्दनाक मौत ने चंगेज खान को शुरु से ही कठोर और निडर बना दिया था। तो चलिए आपको बताते है की चंगेज खान कौन था और चंगेज खान का भारत पर आक्रमण किया फिर चंगेज खान ने कौन सी उपाधि धारण की थी। 

Genghis Khan Biography In Hindi –

नाम   चंगेज खान (तेमुजिन)
 जन्म   सन 1162
 जन्म स्थान   मंगोलिया के उत्तरी हिस्से के पास
 पिता   येसुजेई बगातुर (कियात कबीले का सरदार)
 माता    होयलन 
 विवाह   बोर्ते
 मृत्यु   सन 1227

Genghis Khan History –

दुनिया का सबसे निर्दयी शासक होने के साथ-साथ वह एक बेहद अनुशासित, शक्तिशाली, चतुर मंगोल शासक भी था, जिसने अपनी रणनीति और कुशलता के चलते 1206 से 1227 के बीच यूरोप और एशिया के ज्यादातर हिस्सों को जीत लिया था और अपने मंगोल सम्राज्य का विस्तार किया था, इसलिए उसकी गिनती दुनिया के महानतम शासकों में होती है।

मंगोल शासक चंगेज खान के आगे पूरी दुनिया को जीतने वाले सिकंदर और जूलियस सीजर जैसे सुरमा भी पानी भरते थे। वह खानाबदोश जिंदगी का रहनुमा था, जिसे शहरी जीवन से सख्त नफरत थी। उसने और उसकी बर्बर सेना ने कई शहरों को नष्ट कर तबाही का खौफनाक मंजर खड़ा किया था। दुनिया के सबसे क्रूर सेनापति ने लगभग पूरी दुनिया में अपनी फतह कर ली थी।

उसने सबसे पहले यूरोप और एशिया के ज्यादातर हिस्से को तबाह कर दिया था। इसके बाद उसने मंगोल के पूर्व में चीन के ‘किन सम्राज्य’ को भी खत्म कर डाला था। फिर उसने कोरिया को जीत लिया था। यही नहीं चंगेज खान के निर्दयता का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि चीन के दक्षिण के शुंग साम्राज्य ने कई युद्धों में सहायता की फिरभी उसने शुंग सम्राज्य को नहीं बख्शा था।

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चंगेज खान का जन्म –

दुनिया का सबसे क्रूर सेनापति चंगेज खान1162 ईसवी के आसपास वर्तमान मंगोलिया के उत्तरी हिस्से के स्थित ओनोन नदी के पास तेमुजिन (तेमूचिन) के रुप में जन्मा था। चंगेज खान के पिता का नाम येसूजेई बगातुर था, जो कि कियात कबीले के सरदार थे। ऐसा कहा जाता है कि चंगेज खान की दाईं हाथ की हथेली पर पैदाईशी खूनी धब्बा था। चंगेज खान के 4 सगे भाई -बहन थे।

चंगेज खान का बचपन –

चंगेज खान का बचपन बेहद मुश्किलों में बीता था, दरअसल जब वह महज 10 साल का था जब कबीलों की लड़ाई में उसके पिता येसूजेई बगातुर की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद वह हिमम्मत नहीं हारा बल्कि पिता की मौत के बाद उसके अंदर का सारा खौफ खत्म हो गया था। 

वह निडर तरीके से आगे बढ़ता चला गया वहीं इसके बाद उसका युद्ध कौशल निखरता गया। धीरे-धीरे उसने अपनी मजबूत संगठन शक्ति के बल पर खानाबदोश समुदायों को इकट्ठा किया और एक बड़ी शक्ति के रुप में उभरा था। 

चंगेज खान का विवाह –

अपनी क्रूरता के लिए पहचाने जाने वाले चंगेज खान की शादी 12 साल की छोटी सी उम्र में बोर्ते के साथ हुई थी। वहीं शादी के कुछ समय बाद ही उसकी बीबी का एक विद्रोही कबीले द्धारा अपहरण कर लिया गया था, जिसे छुड़ाने के लिए चंगेज खान को काफी संघर्ष और लड़ाईयां करनी पड़ी थी।

हालांकि इस गंभीर परिस्थिति में भी उसने अपने कुछ खास दोस्त बनाएं। जिसमें बोघूरचू के लिए उसके दिल में विशेष स्थान था। अपने दोस्तों की मदद से ही उसने अपने पत्नी बोर्ते को आजाद करवाया था। 

चंगेज खान का मजहब –

चंगेज का मजहबों के प्रति रवैया एक जैसा था ,उसकी सेना में बौद्ध, मुसलमान सब धर्मों को मानने वाले थे. उसने किसी एक महज़ब को नहीं अपनाया. नेहरू लिखते हैं कि जब मंगोलों की ताक़त बेहद बढ़ गयी थी तो वेटिकेन के पादरियों ने उन्हें ईसाई बनाने की कोशिश की थी। चंगेज नाम के पीछे ‘खान’ का मतलब यह नहीं था कि वह मुसलमान था। चंगेज शमिनिस्म धर्म का अनुयायी था।

यह धर्म मंगोलिया, साइबेरिया आदि इलाकों में प्रचलित है ,वस्सिली येन या कमलेश्वर जैसे महान साहित्यकार यही समझाते आये हैं कि किसी एक ख़ास मज़हब की इंसानियत के प्रति दुश्मनी नहीं है और यह बर्बरता मज़हबी नहीं बल्कि सियासी है. शायद यही कारण है कि मंगोलियाई चंगेज खान को शैतान की औलाद नहीं बल्कि एक महान राजा मानते हैं। 

1227 में आज के ही दिन चंगेज खान की मौत हुई थी ,उसके आखिरी शब्द थे, मैं पूरी दुनिया फतह करना चाहता था। लेकिन एक उम्र इसके लिए बहुत कम है। उसकी इच्छा थी कि मरने के बाद उसे कहां दफनाया गया, यह किसी को पता न चले ,इसलिए उसे दफनाने गए सारे सैनिकों को मार दिया गया था ,आज भी Genghis Khan की कब्र ढूंढने की कोशिशें जारी हैं। 

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सगे भाई जमूका से चंगेज खान की दुश्मनी –

Genghis Khan का सगा भाई जमूका उसका एक भरोसेमंद साथी था। हालांकि जमूका बाद में उसका बहुत बड़ा दुश्मन बन गया था। उसने अपने ताऊ ओंग खान (तुगरिल) के साथ मिलकर जमूका को बुरी तरह परास्त कर दिया था।

जमूका को हराने के बाद उसकी सैन्य शक्ति और अधिक मजबूत हो गई थी एवं वह आत्मविश्वास से भर गया था। इसके बाद वह कबीलों के खिलाफ युद्द करने के लिए निकल पड़ा था, लेकिन इससे पहले उसने अपने पिता की मौत का बदला लिया था।

चंगेज खान ने अपने पिता की मौत का बदला लिया 

चंगेज खान जब थोड़ा सा बड़ा हुआ, तब उसने खानाबदोश जातियों को इकट्ठा किया एवं कुछ कबीलों को नष्ट कर अपने पिता येसुजेई की मौत का बदला लिया। इतिहासकारों के मुताबिक चंगेज खान के पिता को उसके ताऊ ओंग खान और शक्तिशाली तार्तार कैराईट ने बेहद दर्दनाक मौत दी थी।

जिसके बाद 1203 ईसवी में चंगेज खान ने अपने पिता के हत्यारे ओंग खान के खिलाफ युद्ध छेड़ा था। और 1206 ईसवी में अपने सगे भाई और सबसे बड़े दुश्मन जमूका को हराने के बाद वह स्टेपी क्षेत्र का सबसे ताकतवर और शक्तिशाली योद्धा बन गया था।

चंगेज खान को विश्व सम्राट की उपाधि से नवाजा गया –

चंगेज खान की अद्भुत ताकत को देखते हुए जम्कुआ और केरियित उसके सबके बड़े दुश्मन बन गए थे। बाद में उन्हें चंगेज खान ने मार गिराया था। वहीं 1206 ईसवी में उसके प्रभुत्व को देखते हुए मंगोलों की सभा कुरिल्ताई ने उसे अपना सरदार बना दिया था। उसे ‘कैगन (सम्राट या सरदार) या सार्वभौम शासक (विश्व सम्राट) की उपाधि दी थी। इसके साथ ही उसे महानायक भी घोषित कर दिया गया था। जो आगे चलकर चंगेज खान के नाम से मशूहर हो गया।

चंगेज खान ने कई कबीलों को अपने अधीन कर की विजय अभियानों की शुरुआत –

मंगोलों की सभा कुरिल्ताई का सरदार बनने के बाद चंगेज खान बेहद ताकतवर शासक बन चुका था, जिसने अपने सैन्य और युद्ध कौशल से एक विशाल सेना तैयार की थी। उसकी सेना जहां से गुजरती थी, उसके पीछे तबाही की कई कहानियां छोड़ जाती थी। दुनिया के इस सबसे खूंखार दरिंदे चंगेज खान ने सबसे पहले चीन में तबाही का बेहद खौफनाक मंजर तैयार किया था।

चंगेज खान की क्रूर मंगोल सेना ने 1209 ईसवी में चीन के उत्तर -पश्चिमी प्रांत के तिब्बती मूल के सी-लिया लोग को बुरी तरह पराजित कर दिया था, इसके बाद 1215 में पेकिंग (वर्तमान बीजिंग) पर जीत हासिल कर अपना मंगोल सम्राज्य स्थापित कर लिया था। उसने दक्षिण के शुंग साम्राज्य, जिसने उसकी कई लड़ाईयों में मदद की थी, बाद में उसने इसे भी तहस-नहस कर डाला था।

1234 ईसवी तक चीनी राजवंश के खिलाफ उसने जमकर विद्रोह किया। बाद वह वापस मंगोलिया लौट गया था। फिर चंगेज खान ने अपने विजय अभियान के साथ यूरोप की तरफ कूच किया। 1218 ईसवी में कारा खितई को हरा देने के बाद उसने ख्वारिज्म की तरफ अपना विजय अभियान को आगे बढ़ाया। 

1206 से 1227 तक चंगेज खान ने चीन से लेकर समरकंद (उज्बेकिस्तान), बुखारा (उज्बेकिस्तान), मर्व, निशापुर, ओट्रार, बल्ख, हेरात और गुरगंज जैसे विश्व के कई बड़े राज्यों को जीतकर अपना मंगोल सम्राज्य स्थापित कर लिया था। विश्व के करीब 3 करोड़, 30 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल पर राज करने वाला सबसे पहला शासक था। चंगेज खान के बाद आज तक कोई भी शासक विश्व के इतने बड़े क्षेत्र में अपना शासन नहीं कर सका है। 

चंगेज खान का यूरोप कूच –

मंगोलिया के पश्चिम में उस वक़्त कारा खितई नाम का एक राज्य चंगेज खान के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा था. लिहाज़ा, उसने पश्चिम का रुख कर लिया और यहीं से पश्चिम एशिया की तकदीर हमेशा के लिए बदल गयी। कारा खितई को हरा देने के बाद उसने ख्वारिज्म की ओर रुख किया. पहले-पहल चंगेज ने अपने कुछ व्यापारी और व्यापारी के भेस में अपने जासूस ख्वारिज्म के मुहम्मद शाह के दरबार में भेजे थे। 

ख्वारिज्म साम्राज्य के ओर्त्रार नामक प्रांत के गवर्नर को कुछ शक हुआ। लिहाज़ा उसने उन सब व्यापारियों और उनके भेस में छिपे जासूसों की हत्या कर माल लूट लिया था। जब चंगेज को यह मालूम हुआ तो उसने भुनभुनाकर अपने राजदूत को शाह के पास भेजा और कहा कि ओर्त्रार के गवर्नर को उसके हवाले किया जाए. शाह ने उस राजदूत का सर काट कर चंगेज को पेश कर दिया था। 

1219 की गर्मियों में एक ऐतिहासिक जंग लड़ी गयी। रॉबर्ट ग्रीन ने अपनी किताब ‘जंग की तैंतीस रणनीतियां’ में इस जंग का बड़ी तफसील से बयान किया है कि कैसे चंगेज ने रणनीति के तहत पहले एक जंग शाह से हारी ख्वारिज्म के पूर्वी हिस्से में हुई जीत के बाद शाह को अपनी 40 हज़ार की सेना पर यकीन हो गया। बस यही चंगेज चाहता था। शाह को उसके पलटकर फिर पूर्व में ही आने की उम्मीद थी। 

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गवर्नर को मारा –

चंगेज ने उत्तर की तरफ से हमला बोलकर ओर्तार के उसी गवर्नर को मार दिया जिसे वह अपने हवाले चाह रहा था। बाद में हुई लड़ाई में शाह को हैरत में डालते हुए चंगेज खान समरकंद के पश्चिम में बुखारा के किले के सामने आ गया। शाह को कतई उम्मीद नहीं थी कि ऐसा करने में वह बीच में पड़ने वाले किज़िल कुम रेगिस्तान को पार कर लेगा। 

बुखारा तहस-नहस कर डाला गया। साथ में बल्ख, निशापुर, हेरात और समरकंद बर्बाद की ऐसी दास्तां के निशान बन गए कि यहां के इतिहासकारों ने चंगेज खान को ‘शैतान की औलाद’ तक कह डाला। जैसा कि हमने पहले कहा कि इतिहास में नायकों और घटनाओं को रेफरेन्स पॉइंट या परिप्रेक्ष्य में देखा जाता है। इसी समरकंद से बाद में तैमूर लंग निकला जिसने हिंदुस्तान और यूरोप में भयंकर तबाही मचाई। इतिहासकार चंगेज को कोसते हैं। तैमूर को एक महान सुल्तान की उपाधि देते हैं। 

तैमुर तो खैर महान नहीं था पर इसी समरकंद से एक और नायक निकला जिसे दुनिया ने बाबर के नाम से जाना और जिसके वंशज अकबर को अकबर महान की उपाधि से नवाजा गया। बाबर की रगों में चंगेजी और तैमूरी खून था। उसकी मां चंगेजों की तरफ से थी और बाप तैमूरों के खानदान से था। बाबर खुद को तैमूरी कहलवाना पसंद करता था। पर यह अजीब इत्तेफ़ाक है कि उसके वंशजों को हिंदुस्तान में मुगल कहा गया। 

चंगेज खान का सैन्य-युद्ध कौशल और सफलता का रहस्य –

दुनिया का सबसे क्रूर सेनापति चंगेज खान अपने युद्ध कौशल से अपना सम्राज्य स्थापित करना चाहता था, अद्भुत युद्ध कौशल की वजह वो उसे जीत लेता था। दरअसल चंगेज खान बेहद होश्यारी और सावधानी पूर्वक अपनी लड़ाईयां लड़ता था। वह अपने सैनिकों को खास ट्रेनिंग देता था। वहीं उस समय युद्द में तेजी के लिए घोड़ों का इस्तेमाल होता था। ह अपने सभी घोड़ों को भी युद्द के लिए तैयार रखता था।

अगर युद्ध में उसके किसी सैनिक का घोड़ा मर जाता था, तो वह फौरन दूसरा घोड़ा अपने सैनिक के पास भेजता था। अपनी क्रूरता के लिए मशहूर मंगोल शासक चंगेज खान ने कई ऐसी लड़ाईयां भी लड़ीं जिसमें उसका सैन्य बल, विरोधी की सेना से कम था, लेकिन उसके बेहतरीन संगठन शक्ति और अनुशासन की वजह से चंगेज खान की सेना की ही ज्यादातर जीत होती थी।

विश्व के सबसे ज्यादा हिस्सों पर राज करने वाला निर्दयी सुल्तान चंगेज खान की सफलता का श्रेय उसकी सेना की चपलता को मानते है। उसकी सेना का सिर्फ एक ही मकसद पूरी दुनिया को जीतना था। इसके अलवा उसके बेहतरीन घुड़सवार, युद्ध में आग के गोलों के इस्तेमाल से भी उसकी सफलता की राहें आसान हो गईं थी। सम्राट चंगेज खान के कहने पर टैक्स देने को तैयार हो जाते थे, उन शासकों को चंगेज खान नुकसान नहीं पहुंचाता था।

उसने जितने भी प्रांतों पर मंगोल सम्राज्य स्थापित किया था, उसने उन प्रांतों की जिम्मेदारी भरोसेमंद,अनुशासित और काबिल व्यक्तियों को सौंपी थी। यह भी उसके विश्व के इतने बड़े हिस्से पर राज करने की प्रमुख वजहों में से एक थी।

बर्बरतापूर्ण करीब 4 करोड़ लोगों को उतारा था मौत के घाट –

चंगेज खान को विश्व के सबसे बर्बर और क्रूर सेनापति इसलिए कहा जाता है, क्योंकि वह जिन क्षेत्रों से गुजरता उस शहर को  तहस-नहस कर देता था, और बर्बरतापूर्वक मासूम बच्चों, युवाओं और महिलाओं को जान से मार देता था। उसकी क्रूरता के किस्से रौंगटे खड़े कर देने वाले हैं। ईरान में अपने विजय अभियान के दौरान उसने  करीब 75 फीसदी आबादी की जान ले ली थी।

उसने लाशों और तबाहीं का ऐसा मंजर खड़ा किया था। जो शायद ही कोई कल्पना भी नहीं कर सकता है। चंगेज खान ने निर्दयतापूर्ण उज्बेकिस्तान के सबसे बड़े शहर बुखारा और समरकंद को जला दिया था, वहीं उसके इस कुकर्म से हजारों लोग जिंदा ही जलकर राख में मिल गए थे। उसकी बेपनाह बर्बरता को देखकर लोग खौफ में जीने लगे थे। 

वहीं लाखों महिलाओं को भी उसकी निर्दयता का शिकार होना पड़ा था। दुर्दान्त चंगेज खान ने लाखों महिलाओं का बलात्कार और शोषण किया था। पूरे विश्व में उसका इतना खौफ था कि उसका नाम सुनकर भी लोग सहम उठते थे।

भारत को रौंदना चाहता था चंगेज खान लेकिन वापस लौट गया –

दुनिया के सबसे बर्बर और निर्दयी शासक चंगेज खान ने ईरान में ख्वारिज्म वंश के जिस शासक पर आक्रमण किया था, तब उसका उत्तराधिकारी जलालुद्दीन मंगवर्नी इसके भय से वह सिंध नदी के तट पर पहुंच गया था उसने उस समय दिल्ली के तल्ख पर विराजित सुल्तान इल्तुतमिश से सहायता मांगी, लेकिन चंगेज खान से भय से इल्तुतमिश ने जलालुद्धीन को सहायता देने से मना कर दिया था।

इतिहासकारों के मुताबिक दुनिया का सबसे बर्बर शासक इल्तुतमिश पहले भारत को रौंदते हुए असम के रास्ते मंगोलिया वापस जाना चाहता था। लेकिन इल्तुततमिश के हार मानने और भीषण गर्मी और अपनी बीमारी की वजह से वह भारत आते-आते वापस लौट गया। और इस तरह भारत दुर्दान्त चंगेज खान की बर्बरता और भयानक बर्बादी से बच गया।

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Genghis Khan Death –

दुनिया का सबसे खौफनाक शासक चंगेज खान की 1227 ईसवी में मृत्यु हो गई और उसकी मृत्यु को लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं। हालांकि कुछ इतिहासकारों का कहना है कि चंगेज खान की मौत घोड़े से गिरने की वजह से हुई थी। वहीं चंगेज खान के बारे में ऐसा भी कहा जाता है कि वे चाहते थे कि मरने के बाद किसी को उसकी कब्र के बारे में पता नहीं चले। 

इसलिए उसकी इस इच्छा को पूरा करने के लिए उसके शव को दफनाने गए सभी सैनिकों को मार दिया गया गया था। चंगेज खान की मौत के बाद उसका बेटा ओगताई उसका उत्तराधिकारी बना, जो कि चंगेज खान के विपरीत एक शांतिप्रिय और दयालु शासक था। वहीं उसकी मौत के कई सालों बाद भी मंगोल साम्राज्य का शासन रहा था।  

चंगेज खान इतिहास में सबसे जालिम, क्रूर और निर्दयी शासक के रुप में मशहूर हुआ। दुनिया के कई हिस्सों में बर्बरतापूर्ण अपना सम्राज्य स्थापित किया था। और कई बड़े शहरों को तहस-नहस कर एक बड़ी आबादी का सफाया किया था। तबाही और मौत का भयावह मंजर खड़ा किया था। चंगेज खान की क्रूरता के किस्से सुनकर आज भी लोगों की रुंह कांप उठती है।

41 साल की उम्र में चंगेज खान ने अपने विजय अभियान की शुरुआत की और अपनी मजबूत संगठन शक्ति और ताकत से दुनिया के ज्यातर हिस्सों में राज किया। चंगेज खान भले ही इतिहास का सबसे दुर्दान्त शासक था। लेकिन उसके सैन्य -युद्ध कुशलता, समझदारी, अनुशासन,काम के प्रति ईमानदारी, निष्ठा और मजबूत संगठन शक्ति की वजह से वह अपने मंगोल सम्राज्य को दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में स्थापित करने में कामयाब हो सका था।

Genghis Khan History In Hindi –

Genghis Khan Interesting Facts –

ज़ुर्गादै नाम का एक तीरंदाज जो मंगोलों के खिलाफ लड़ाई में शामिल था तब बैटल ऑफ़ थर्टीन साइड्स के दौरान ज़ुर्गादै ने एक तीर छोड़ा जो चंगेज खान की गर्दन पर लगा था।

युद्ध को मंगोलों ने जीत लिया परन्तु चंगेज तीर के वार से घायल हो गया ,बाद यह पुछा गया कि आखिर वो तीर किसने चलाया था, तब ज़ुर्गादै नाम का तीरंदाज खुद सामने आया और यह कबूल किया कि उसी के तीर से चंगेज खान घायल हुए है। 
ज़ुर्गादै को मौत की कठोर सजा सुनाई गयी. परन्तु चंगेज खान ज़ुर्गादै की इमानदारी से बड़े प्रभावित हुए. उन्होंने ज़ुर्गादै की मौत की सजा माफ़ कर दी और उसे अपनी फ़ौज में जेनरल का दर्जा दिया था।
ज़ुर्गादै को उसने नया नाम दिया जेबे जिसका अर्थ तीर होता है। बाद में ज़ुर्गादै मंगोल साम्राज्य के 4 प्रमुख जनरल में से एक थे। 
चंगेज खान के बारे में ऐसी कई कहानियां हैं जिससे यह साबित होता है कि चंगेज खान ने इमानदारी और निष्ठां को पुरस्कृत किया।  भरोसेमंद लोगों की फ़ौज कड़ी कर के ही उसने विश्व के इतने बड़े हिस्से पर शासन किया था। 

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Genghis Khan Questions –

चंगेज खान की मौत कैसे हुई ?
युद्ध में घोड़े से गिरजाने की वजह से चंगेज खान की मौत हुई थी। 
चंगेज खान का प्रारंभिक नाम क्या था ?
उनका पहले से ही नाम चंगेज खान था लेकिन उनकी क्रूरता से पहचान जाता था। 
चंगेज खान ने कौन सी उपाधि ग्रहण की थी ?
उपाधि ग्रहण कर सके ऐसे उसके तेवर नहीं थे लेकिन उनके हरिफ तैमूर को  महान सुल्तान  उपाधि मिली थी। 
चंगेज खान की मृत्यु कब हुई थी ? 
18 अगस्त 1227 के दिन चंगेज खान की मृत्यु हुई थी। 
चंगेज खान के उपरांत मंगोल साम्राज्य का क्या हुआ ? 
उनकी मौत के बाद उनके बेटे ओगताई ने उनके साम्राज्य की भागदौड़ संभाली वह बहुत दयालु सम्राट साबित हुआ था। 

Conclusion –

दोस्तों आशा करता हु आपको मेरा यह आर्टिकल Genghis Khan Biography In Hindi बहुत अच्छी तरह से समज आ गया होगा। इस लेख के जरिये  हमने genghis khan meaning और genghis khan death cause से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दे दी है अगर आपको इस तरह के अन्य व्यक्ति के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है तो आप हमें कमेंट करके जरूर बता सकते है। और हमारे इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द ।

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