Kabir Das Biography In Hindi | महान कवि संत कबीर दास जी का जीवन परिचय

नमस्कार दोस्तों Kabir Das Biography In Hindi में आपका स्वागत है। आज हम एक महान समाज सुधारक, कवि और संत कबीर दास जी का जीवन परिचय बताने वाले है। संत कबीरदास हिन्दी साहित्य के भक्ति काल के ज्ञानमार्गी शाखा के कवि हैं। उन्होंने आजीवन लोगों पर समाज के बीच व्याप्त आडंबरों पर कुठाराघात किया था। कबीर दास के जन्म के संबंध में सभी लोगों द्वारा अनेक प्रकार की बातें कही जाती हैं। उनके दोहों और पदों में हिंदी भाषा की झलक दिखलाई पड़ती है। 

भारत देश के महान संत और आध्यात्मिक कवि कबीर दास का जन्म वर्ष 1440 में हुआ था। कबीर पन्थियों की मान्यता है कि कबीर का जन्म काशी में लहरतारा तालाब में उत्पन्न कमल के मनोहर पुष्प के ऊपर बालक के रूप में हुआ था। संत कबीर दास जी की रचनाओं में ब्रज, राजस्थानी, पंजाबी, हरयाणवी और हिंदी खड़ी बोली की प्रचुरता देखने को मिलती है। आज हम Kabirdas jivan parichay में Saint के Kabir das ka jivan parichay संबंधित जानकारी बताने वाले है। 

Kabir Das Biography In Hindi

पूरा नाम – संत कबीरदास

अन्य नाम – कबीरा, कबीर साहब

जन्म सन – सन 1398 (विक्रमी संवत 1455 अंदाजित)

जन्म भूमि – लहरतारा ताल, काशी, वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत 

मृत्यु – सन1518 (विक्रमी संवत 1551अंदाजित)

मृत्यु स्थान – मगहर, उत्तर प्रदेश, भारत  

पिता का नाम – नीरू जुलाहे

माता का नाम – नीमा जुलाहे

गुरु – गुरु रामानंद जी

पत्नी – लोई

संतान – कमाल (पुत्र), कमाली (पुत्री)

कर्म भूमि – काशी, बनारस, भारत 

कर्म-क्षेत्र – समाज सुधारक कवि, भक्त, (सूत कातकर) कपड़ा बनाना

मुख्य रचनाएँ – साखी, सबद, रमैनी, बीजक

विषय – सामाजिक, आध्यात्मिक

भाषा – अवधी, सधुक्कड़ी, पंचमेल खिचड़ी, हिन्दी

शिक्षा – निरक्षर

नागरिकता – भारतीय

काल – भक्ति काल

विधा – कविता, दोहा, सबद

आन्दोलन – भक्ति आंदोलन  

साहित्यिक आन्दोलन – प्रगतिशील लेखक आन्दोलन

प्रभाव – सिद्ध, गोरखनाथ, रामानंद

प्रभावित – दादू, नानक, पीपा, हजारी प्रसाद द्विवेदी

Kabir Das Images
Kabir Das Images

Kabir Das का जन्म

कबीरदास के जन्म के संबंध में अनेक किंवदन्तियाँ हैं। कबीर दास  का जन्म 1398 ई० में हुआ था। मगर कबीर दास के जन्म के बारे में लोगों द्वारा अनेक प्रकार की बातें कही जाती हैं। कुछ का कहना है कि वह गुरु रामानंद स्वामी जी के आशीर्वाद से काशी की एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से जन्मे थे। उसके बाद ब्राह्मणी नवजात शिशु के रूप में ही उन्हें को लहरतारा ताल के पास फेंक आई थी।

उस समय वहां से नीरू नाम का जुलाहा अपने घर ले गया था। और उसी ने ही उनका पालन पोषण किया था। कुछ लोगों का कहना है कि कबीर जन्म से मुसलमान थे। युवावस्था में स्वामी रामानंद के प्रभाव से उन्हें हिंदू धर्म की बातें मालूम हुई थी।  कबीर पन्थियों के मुताबिक कबीर का जन्म काशी में लहरतारा तालाब में उत्पन्न कमल के मनोहर पुष्प के ऊपर से बालक के रूप में हुआ था। 

Kabir Das की शिक्षा

मान्यता के मुताबिक कहा जाता है कि कबीर दास अनपढ़ थे। यानी वह पढ़े-लिखे नहीं थे। मगर दूसरे बच्चों से बिल्कुल अलग थे। क्योकि गरीबी के कारण उनके माता-पिता उन्हें मदरसे में नहीं भेज सके थे। इसलिए कबीरदास जी किताबी शिक्षा नहीं ले सके थे। कबीर की शिक्षा के बारे में कहा जाता हैं कि कबीर को पढने की रूचि नहीं थी। और बालयकाल में खेलों का भी शौक नहीं था।

उनके माता-पिता गरीब होने से दिन भर कबीर को भोजन की व्यवस्था करने के लिए दर-दर भटकना पड़ता था। आज हम जिस कबीर के दोहे के बारे में पढ़ते हैं वह स्वयं कबीर ने नहीं मगर उनके शिष्यों ने लिखे हैं। संत कबीर के मुख से कहे गए दोहे का लेखन कार्य उनके शिष्यों ने किया था। उनके शिष्यों का नाम कामात्य और लोई था। क्योकि लोई का नाम कबीर के दोहे में कई बार प्रयोग हुआ हैं।

Kabir Das Photos
Kabir Das Photos

Kabir Das का वैवाहिक जीवन

संत कबीर का विवाह वनखेड़ी बैरागी की पालिता लड़की लोई के साथ हुआ था। संत कबीर दास जी की कमल और कमली नामक दो संतानें थी। मगर कबीर को कबीर पंथियो के जरिए बाल ब्रह्मचारी कहा जाता है। उसके पंथ के मुताबक कमल उसका शिष्य था और कमली एव लोई भी उनकी शिष्या थी। लोई शब्द का प्रयोग कबीर जी ने कई समय किया है। 

उनकी पुस्तक साहिब के एक श्लोक से अनुमान होता है कि उनका पुत्र कमल कबीर दास के मत का विरोधी था।कबीर जी के घर में साधु-संतों की निरंतर आवाजाही से बच्चों को भी भोजन मिलना मुश्किल हो गया था। उससे कबीर की पत्नी को गुस्सा आता था। बाद में कबीर त्नी को समझाते थे। 

Kabir Das के विचार

कबीर दास जी के मुताबिक हिंदू हो मुस्लिम सभी एक ही ईश्वर की संतान हैं। 

उन्होंने बाह्य आडंबरों और पाखंडों को कटु शब्दों से कोसा है।

ईश्वर की प्राप्ति के लिए सभी धर्मों में अपनाए जाने वाले तौर-तरीकों को नकारा है।

उन्होंने वैष्णव व सूफीवाद को मान्यता दी है।

उनके माता अनुसार भगवान हर व्यक्ति, हर चीज में मौजूद है।

कबीर साहब आत्मिक उपासना या मन की पूजा पर विश्वास करते थे।

उन्होंने ईश्वर की  दिखावटी पूजा, नवाज, व्रत और आडंबरों के प्रति व्यंग्य किया है।

उनके मुताबिक ब्रह्म का स्मरण करने से मनुष्य का अहंकार मिटता है।

कबीर दास की फोटो गैलरी
कबीर दास की फोटो गैलरी

Kabir Das का व्यक्तित्व

हमारे हिंदी साहित्य के इतिहास में कबीर साहब जैसा व्यक्तित्व लेकर कोई लेखक ने जन्म नहीं लिया है। उसका व्यक्तित्व तुलसीदास से मिलता मगर लेकिन थोड़ा अंतर था। क्योकि वह कबीर की वाणी में अनन्य असाधारण जीवन रस था। उनके व्यक्तित्व के कारण ही उनकी उक्तियां श्रोता को बलपूर्वक आकर्षित करती हैं। आपको बतादे की संत कबीर दास ने स्वयं ग्रंथ नहीं लिखे है। कबीर दास ने मुंह से बोला और उनके शिष्यों ने ग्रंथों को लिखा है।

वह एक ही ईश्वर को मानते थे और कर्मकांड के घोर विरोध करते थे। वह अवतार, मूर्ति, रोजा, ईद, मस्जिद और मंदिर को नहीं मानते थे। कबीर के नाम से मिले ग्रंथों की संख्या लेखों के मुताबिक भिन्न है। एच. एच. विल्सन के मुताबिक आठ ग्रंथ और विशप जी. एच. वेस्टकाॅट के मुताबिक 74 ग्रंथों की सूची कबीर के नाम पर मौजूद हैं। कबीर की वाणी का संग्रह बीजक के नाम से प्रसिद्ध है।

Kabir Das का साहित्यिक परिचय

संत कबीर साहब प्राचीन कल के एक संत, कवि और समाज सुधारक हुआ करते थे। उनकी कविता का प्रत्येक शब्द पाखंडीयों के पाखंडवाद और धर्म के नाम पर ढोंग करने वालो को ललकारता है। कबीर ने उसके असत्य और अन्याय की पोल खोलकर रख दी थी। कबीर का अनुभूत सत्य अंधविश्वासों पर बारूदी मुकाबला था। कबीर जी ने बोला वह निशाना बनकर चोट करता और खोट भी निकालता था।

महान कवि संत कबीर दास जी का जीवन परिचय
महान कवि संत कबीर दास जी का जीवन परिचय

कबीर दास जी की विशेषताए

संत कबीर दास अपने बचपन से एकांत प्रिय व्यक्ति थे। 

मूर्ति-पूजा और आडंबरों को नकारते हुए सबको एक ही ईश्वर की संतान कहा हैं। 

वह एक चिंतनशील व्यक्ति थे। 

एकांतप्रिय स्वभाव से उसकी बुद्धिमता का विकास ज्यादा हुआ था।

इतिहासकारों के अनुसार कबीर जी आजीवन अविवाहित थे। 

कबीर दास का अधिकांश समय काव्य रचना और सोच विचार पर जाता था।

 वह समाज में व्याप्त बुराइयों पर चिंतन करके कटु काव्य की रचना करते थे।

कबीर दास की रचनाएं मार्मिक और स्पष्टवादी हैं।

उन्होंने साधारण और लोकमानस भाषा का प्रयोग किया है।

कबीर दास जी गुरु और साधुसेवा को सबसे बड़ा मानते थे।

Kabir Das Death कबीर दास की मृत्यु

कबीर दास ने अपना सारा जीवन काशी शहर में बिताया था। मगर उसकी मृत्यु के समय वह मगहर गए थे। ऐसा कहा जाता है कि उस समय लोगों का मानना ​​था कि काशी में प्राण त्यागने से स्वर्ग और मगहर में मरने से नर्क मिलता है। उसके कारन कबीर को अपनी मौत का अंदाजा होने से और लोगों की धारणा तोड़ने के लिए मगहर गए थे। ऐसा भी कहा जाता था की कबीर के दुश्मनों ने मगहर जाने को मजबूर किया था। वह चाहते थे कि कबीर को मुक्ति नहीं मिलनी चाहिए। 

Kabir Das ke Dohe कबीर दास के दोहे

मानुष जन्म दुलभ है, देह न बारम्बार।
तरवर थे फल झड़ी पड्या,बहुरि न लागे डारि॥

जाता है सो जाण दे, तेरी दसा न जाइ।
खेवटिया की नांव ज्यूं, घने मिलेंगे आइ॥

मान, महातम, प्रेम रस, गरवा तण गुण नेह।
ए सबही अहला गया, जबहीं कह्या कुछ देह॥

कबीर प्रेम न चक्खिया,चक्खि न लिया साव।
सूने घर का पाहुना, ज्यूं आया त्यूं जाव॥

सत्य की महिमा – कबीर की वाणी

साँच बराबर तप नहीं, झूँठ बराबर पाप।

जाके हिरदे साँच है, ताके हिरदे आप॥

साँच बिना सुमिरन नहीं, भय बिन भक्ति न होय।

पारस में पड़दा रहै, कंचन किहि विधि होय॥

उपदेश : कबीर के दोहे

कबीर आप ठगाइये, और न ठगिये कोय।

आप ठगे सुख ऊपजै, और ठगे दुख होय॥

अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।

अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥

प्रेम पर दोहे

प्रेम न बाड़ी ऊपजै, प्रेम न हाट बिकाय।

राजा-परजा जेहि रुचै, सीस देइ लै जाय॥

प्रेम-प्रेम सब कोइ कहै, प्रेम न चीन्हे कोय।

आठ पहर भीना रहे, प्रेम कहावै सोय॥

कबीर वाणी

माला फेरत जुग गया फिरा ना मन का फेर

कर का मनका छोड़ दे मन का मन का फेर

मन का मनका फेर ध्रुव ने फेरी माला

धरे चतुरभुज रूप मिला हरि मुरली वाला

कहते दास कबीर माला प्रलाद ने फेरी

धर नरसिंह का रूप बचाया अपना चेरो

कबीर भजन

उमरिया धोखे में खोये दियो रे।

धोखे में खोये दियो रे।

पांच बरस का भोला-भाला

बीस में जवान भयो।

तीस बरस में माया के कारण,

देश विदेश गयो। उमर सब ….

चालिस बरस अन्त अब लागे, बाढ़ै मोह गयो।

धन धाम पुत्र के कारण, निस दिन सोच भयो।।

Kabir Das History In Hindi Video

FAQ

Q .कबीर दास का जन्म कब हुआ था?

कबीर दास जी का जन्म 1398 ईस्वी को काशी में हुआ था। 

Q .कबीर दास की पत्नीकौन हैं?

लोई

Q .कबीर दास जी की रचनाएं क्या हैं?

कबीर बीजक साखी, सबद, रमैनी 

Q .क्या कबीर दास जी विवाहित थे?

विवादास्पद

Q .कबीर दास जी क्यों प्रसिद्ध हैं?

एक महान समाज सुधारक थे उसके कारन कबीर दास जी प्रसिद्ध है।

Q .कबीर दास जी की मृत्यु कब हुई थी?

कबीर दास जी की मृत्यु 1518 ईस्वी को उत्तर प्रदेश के मगहर में हुई थी। 

Q .संत कबीर दास का मूल नाम क्या है?
संत कबीरदास, कबीरा, कबीर साहब

Conclusion

आपको मेरा Kabir Das Biography In Hindi बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। 

लेख के जरिये हमने Kabir das ji ke dohe, Who is kabir das

और कबीर दास की कहानी इन हिंदी से सम्बंधित जानकारी दी है।

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Note

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