Prafulla Chaki Biography In Hindi – प्रफुल्ल चौकी की जीवनी

नमस्कार मित्रो आज के हमारे आर्टिकल में आपका स्वागत है ,आज हम Prafulla Chaki Biography In Hindi में भारतीय स्वतन्त्र सेनानी जिनका नाम मुजफ्फरपुर बम कांड में था ऐसे प्रफुल्ल चाकी का जीवन परिचय देने वाले है। 

चंद्रशेखर आजाद ने जिस तरह जीते जी अंग्रेजों के हाथ न आने की प्रतिज्ञा की थी ठीक उसी तरह प्रफुल्ल चंद चाकी भी एक ऐसे क्रांतिकारी थे, जिन्होंने ब्रितानिया हुकूमत के हाथ न आने की अपनी कसम निभाई और 20 साल की उम्र में ही खुद को गोली मारकर जान दे दी। आज हम मुजफ्फरपुर बम कांड के महानायक का नाम के साथ prafulla chaki and khudiram bose , किंग्स फोर्ड की हत्या और prafulla chaki books की माहिती बताने वाले है।

भारत देश को आजाद करने हेतु कई नौ जवानो ने अपने प्राणो की आहुति देनी पड़ी थी जैसे की शहीद वीर भगत सिंह राजगुरु और khudiram bose इतनाही नहीं लेकिन अपने भारत के लाखो जवानो ने अपनी जान देदी तब जाके भारत को आजादी मिली थी आज की पोस्ट में मुजफ्फरपुर हत्याकांड 1908 , अनुशीलन समिति के बारे में और अलीपुर षड्यंत्र की सभी बातो से सबको ज्ञात करवाने वाले है तो चलिए शुरू करते है।  

नाम प्रफुल्लचंद चाकी
जन्म  10 दिसंबर, 1888
जन्म भूमि बंगाल
आंदोलन  भारतीय स्वतंत्रता संग्राम
धर्म हिन्दू
नागरिकता भारतीय
 मृत्यु 1 मई, 1908
मृत्यु स्थान कलकत्ता

Prafulla Chaki Biography In Hindi –

प्रफुल्ल का जन्म उत्तरी बंगाल के बोगरा जिला (अब बांग्लादेश में स्थित) के बिहारी गाँव में हुआ था। जब प्रफुल्ल दो वर्ष के थे तभी उनके पिता जी का निधन हो गया। उनकी माता ने अत्यंत कठिनाई से प्रफुल्ल का पालन पोषण किया। विद्यार्थी जीवन में ही प्रफुल्ल का परिचय स्वामी महेश्वरानन्द द्वारा स्थापित गुप्त क्रांतिकारी संगठन से हुआ। प्रफुल्ल ने स्वामी विवेकानंद के साहित्य का अध्ययन किया और वे उससे बहुत प्रभावित हुए। अनेक क्रांतिकारियों के विचारों का भी प्रफुल्ल ने अध्ययन किया इससे उनके अन्दर देश को स्वतंत्र कराने की भावना बलवती हो गई।

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प्रफुल्ल चाकी का परिचय –

बंगाल विभाजन के समय अनेक लोग इसके विरोध में उठ खड़े हुए। अनेक विद्यार्थियों ने भी इस आन्दोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रफुल्ल ने भी इस आन्दोलन में भाग लिया। वे उस समय रंगपुर जिला स्कूल में कक्षा ९ के छात्र थे। प्रफुल्ल को आन्दोलन में भाग लेने के कारण उनके विद्यालय से निकाल दिया गया। इसके बाद प्रफुल्ल का सम्पर्क क्रांतिकारियों की युगान्तर पार्टी से हुआ। इसी बीच बंगाल का विभाजन हुआ जिसके विरोध में लोग उठ खड़े हुए | विद्यार्थियों ने भी इस आन्दोलन में आगे बढकर भाग लिया |

कक्षा 9 के छात्र प्रफुल्ल आन्दोलन में भाग लेने के कारण स्कूल से निकाल दिए गये | इसके बाद ही ऊनका सम्पर्क क्रान्तिकारियो की युगांतर पार्टी से हो गया | उन दिनों कोलकाता का चीफ प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट किंग्स्फोर्ड राजनितिक कार्यकर्ताओ को अपमानित और दंडित करने के लिए बहुत बदनाम था | क्रांतिकारियों ने उसे समाप्त करने का काम प्रफुल्ल चाकी (Prafulla Chaki) और खुदीराम बोस को सौंपा था |

सरकार ने किंग्स्फोर्ड के प्रति लोगो के आक्रोश को भांपकर उसकी सुरक्षा की दृष्टि से उसे सेशन जज बनाकर मुजफ्फरपुर भेज दिया पर दोनों क्रांतिकारी भी उसके पीछे पीछे यही पहुच गये | किंग्स्फोर्ड की गतिविधियों का अध्ययन करने के बाद उन्होंने 30 अप्रैल 1908 को यूरोपियन क्लब से बाहर निकलते ही किंग्स्फोर्ड की बग्घी पर बम फेंक दिया किन्तु दुर्भाग्य से उस समान आकार-प्रकार की बग्घी में दो युरोपियीन महिलाये बैठी थी और वे मारी गयी थी। 

मुजफ्फरपुर काण्ड –

उन दिनों कोलकाता का चीफ प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड राजनीतिक कार्यकर्त्ताओं को अपमानित और दंडित करने के लिए बहुत बदनाम था। क्रांतिकारियों ने उसे समाप्त करने का काम प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस को सौंपा। सरकार ने किंग्सफोर्ड के प्रति लोगों के आक्रोश को भांपकर उसकी सुरक्षा की दृष्टि से उसे सेशन जज बनाकर मुजफ्फरपुर भेज दिया। पर दोनों क्रांतिकारी भी उसके पीछे-पीछे पहुँच गए।

किंग्सफोर्ड की गतिविधियों का अध्ययन करने के बाद उन्होंने 30 अप्रैल, 1908 को यूरोपियन क्लब से बाहर निकलते ही किंग्सफोर्ड की बग्घी पर बम फेंक दिया। किन्तु दुर्भाग्य से उस समान आकार-प्रकार की बग्घी में दो यूरोपियन महिलाएँ बैठी थीं जो कि पिंग्ले कैनेडी नामक एडवोकेट की पत्नी और बेटी थी, वे मारी गईं। क्रांतिकारी किंग्सफोर्ड को मारने में सफलता समझ कर वे घटना स्थल से भाग निकले थे ।

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प्रफुल्ल चाकी का बलिदान –

प्रफुल्ल ने समस्तीपुर पहुँच कर कपड़े बदले और टिकट ख़रीद कर ट्रेन में बैठ गए। दुर्भाग्यवश उसी डिब्बे में पुलिस सब इंस्पेक्टर नंदलाल बनर्जी बैठा था। बम कांड की सूचना चारों ओर फैल चुकी थी। इंस्पेक्टर को प्रफुल्ल पर कुछ संदेह हुआ। उसने चुपचाप अगले स्टेशन पर सूचना भेजकर चाकी को गिरफ्तार करने का प्रबंध कर लिया।  पर स्टेशन आते ही ज्यों ही प्रफुल्ल को गिरफ्तार करना चाहा वे बच निकलने के लिए दौड़ पड़े। पर जब देखा कि वे चारों ओर से घिर गए हैं तो उन्होंने अपनी रिवाल्वर से अपने ऊपर स्वयं को फायर करके मोकामा के पास प्राणाहुति दे दी।

यह 1 मई, 1908 की घटना है। कालीचरण घोष ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ ‘रोल ऑफ आनर’ में प्रफुल्ल कुमार चाकी का विवरण अन्य प्रकार से दिया है। उनके अनुसार प्रफुल्ल ने खुदीराम बोस के साथ किंग्सफोर्ड से बदला लेते समय अपना नाम दिनेश चंद्र राय रखा था। घटना के बाद जब उन्होंने अपने हाथों अपने प्राण ले लिए तो उनकी पहचान नहीं हो सकी। पर स्टेशन आते ही Prafulla Chaki को गिरफ्तार करना चाहा वे बच निकलने के लिए दौड़ पड़े। पर जब देखा कि वे चारों ओर से घिर गए हैं। 

तो उन्होंने अपनी रिवाल्वर से अपने ऊपर स्वयं को फायर करके मोकामा के पास प्राणाहुति दे दी। यह 1 मई, 1908 की घटना है। कालीचरण घोष ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ ‘रोल ऑफ आनर’ में प्रफुल्ल कुमार चाकी का विवरण अन्य प्रकार से दिया है। उनके अनुसार प्रफुल्ल ने खुदीराम बोस के साथ किंग्सफोर्ड से बदला लेते समय अपना नाम दिनेश चंद्र राय रखा था। घटना के बाद जब उन्होंने अपने हाथों अपने प्राण ले लिए तो उनकी पहचान नहीं हो सकी। प्रफुल्लचंद चाकी इसलिए अधिकारियों ने उनका सिर धड़ से काट कर स्पिरिट में रखा और उसे लेकर पहचान के लिए कोलकाता ले गए। वहाँ पता चली कि यह दिनेश चंद्र राय और कोई नहीं, रंगपुर का प्रसिद्ध क्रांतिकारी प्रफुल्ल कुमार चाकी था।

खुदीराम बोस की गिरफ्तारी –

अब प्रफुल्ल चाकी की तो मौत हो गयी थी अब आपको बताते है किस तरह खुदीराम बोस को गिरफ्तार किया गया मुज्जफरनगर घटना के बाद वो घटना स्थल से तो भाग गये थे। अब अंग्रेजो ने सभी जगह पुलिस तैनात कर दी और ब्रिटिश सरकार ने खुदीराम बोस को पकड़ने वाले को 1000 रूपये का इनाम देने की घोषणा की थी। अब जैसे ही खुदीराम बोस को पता चला कि पुलिस उनका पीछा कर रही है उन्होंने रेलवे स्टेशन जाने के बजाय मेदिनीपुर भागने लगे | अब ओयेनी में पानी पीने के लिए रुके और तभी कांस्टेबल उसके पास आये और उसके इतने तेज भागकर आने का कारण पूछा था। 

अब Khudiram Bose खुदीराम फंस गया था और उसने बिना सोचे समझे अपने कपड़ो से दो पिस्तौले निकाली और अंधाधुंध 37 गोलिया चलायी थी। केवल 18 वर्ष के खुदीराम ने हवलदारो के दात खट्टे कर दिए लेकिन अंत में उनको गिरफ्तार कर लिया गया | 1 मई 1908 को मुजफ्फरपुर हत्या के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया गया था। जब उनको ले जाया जा रहा था वो जोर जोर से “वन्दे मातरम ” का नारा लगा रहे थे और लोग उस युवा को देखकर आस्चर्य कर रहे थे जब उनको मुज्जफरनगर ले जाया गया तब उन्होंने ह्त्या का दोषी होना कबूल कर लिया |

पुलिस ने उसके साथी का नाम और क्रांतिकारी संघठन का नाम बताने को कहा लेकिन खुदीराम ने कुछ नही बताया |हालंकि बाद में प्रफुल्ल चाकी के मृत शरीर को जब उनके सामने लाया गया तो उनकी आँखों में आसू आ गये क्योंकि जिनके साथ वो इतने दिन आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे उसी की लाश उनके सामने थी। अब अंग्रेजो की बर्बरता इतनी थी कि उन्होंने प्रफुल्ल चाकी के मृत शरीर के टुकड़े कर दिए और आगे की जांज के लिए कलकता भेज दिया गया था। 

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क्रांतिकारी गतिविधियों –

बरिन घोष ने प्रफुल्ल को कोलकाता में लाया और उन्हें जुगंतार पार्टी में शामिल किया गया। उनका पहला काम सर जोसेफ बाम्पफील्ड फुलर (1854-19 35) को मारना था, जो पूर्वी बंगाल और असम के नए प्रांत के पहले लेफ्टिनेंट गवर्नर थे। हालांकि, योजना को अमल में लाना नहीं था। अगला, प्रफुल्ला, खुदीराम बोस के साथ कलकत्ता प्रेसीडेंसी मैजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड की हत्या और बाद में, बिहार के मुजफ्फरपुर के मजिस्ट्रेट के लिए चुना गया था।

प्रफुल्ला और खुदीराम ने भागने के लिए अलग-अलग मार्गों का फैसला किया। प्रफुल्ल ने कोलकाता के लिए छिपाने और चढ़ाई की ट्रेन ली। समस्तपुर रेलवे स्टेशन पर प्रफुल्ल संदिग्ध, पुलिस उप-निरीक्षक नंदलाल बनर्जी एक हंगामा और एक छोटा पीछा हुआ। प्रफुल्ल को जल्द ही जब वह सिर पर गोली मारकर अपना जीवन ले लिया था, तो उसे पकड़ लिया गया था। खुदीराम को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें फांसी पर लटका दिया गया।

Prafulla Chaki Biography Video –

Prafulla Chaki Facts –

  • प्रफुल्ल चौकी दो वर्ष के थे तभी उनके पिता जी का निधन हो गया। उनकी माता ने अत्यंत कठिनाई से प्रफुल्ल का पालन पोषण किया था ।
  • उनका पहला काम सर जोसेफ बाम्पफील्ड फुलर को मारना था, जो पूर्वी बंगाल और असम के नए प्रांत के पहले लेफ्टिनेंट गवर्नर थे।
  • प्रफुल्ल चौकी को अंग्रेजो की बर्बरता इतनी थी कि उन्होंने प्रफुल्ल चाकी के मृत शरीर के टुकड़े कर दिए और आगे की जांज के लिए कलकता भेज दिया गया था। 
  • 1 मई 1908 को मुजफ्फरपुर हत्या के जुर्म में प्रफुल्ल चौकी को गिरफ्तार कर लिया गया था। जब उनको ले जाया जा रहा था वो जोर जोर से “वन्दे मातरम ” का नारा लगा रहे थे। 

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प्रफुल्ल चाकी के प्रश्न –

1 .प्रफुल्ल चौकी कौन है ?

भारतीय स्वतन्त्र सेनानी जिनका नाम मुजफ्फरपुर बम कांड में उनका नाम लिया जाता है। 

2 .प्रफुल्ल चौकी का जन्म कब हुआ था ?

10 दिसंबर, 1888 के दिन बंगाल में प्रफुल्ल चौकी का जन्म हुआ था। 

3 .प्रफुल्ल चाकी की मौत कैसे हुआ था ?

मुज्जफरनगर हत्या कांड केर लिए उन्हें फांसी की सजा सुनाई थी लेकिन प्रफुल्ल चाकी ने अपने आप को गोली मारदी थी। 

4 .प्रफुल्ल चाकी के पिताजी की मौत कब हुई ?

प्रफुल्ल चाकी के पिताजी उनको सिर्फ दो साल की उम्र में ही हो चुकी थी। 

5 .प्रफुल्ल चौकी का मौत कब हुआ था ?

1 मई 1908 के दिन प्रफुल्ल चौकी  मृत्यु हुई थी। 

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निष्कर्ष – 

दोस्तों आशा करता हु आपको मेरा यह आर्टिकल Prafulla Chaki Biography In Hindi आपको बहुत अच्छी तरह से समज आ गया होगा और पसंद भी आया होगा । इस लेख के जरिये  हमने Anushilan Samiti और prafulla chaki death से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दे दी है अगर आपको इस तरह के अन्य व्यक्ति के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है तो आप हमें कमेंट करके जरूर बता सकते है। और हमारे इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द ।

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