Lord Gautam Buddha Biography In Hindi – भगवान गौतम बुद्ध की जीवनी

नमस्कार मित्रो आज के हमारे लेख में आपका स्वागत है ,आज हम Lord Gautam Buddha Biography In Hindi में भारत के महान दार्शनिक, वैज्ञानिक, धर्मगुरु, एक महान समाज सुधारक और बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान गौतम बुद्ध का जीवन परिचय बताने वाले है। 

भारत देश को अपने विचारो से नया रास्ता दिखाने वाले भगवान गौतम बुद्ध की शादी यशोधरा के साथ हुई और शादी से बाद एक बालक का जन्म हुआ था जिसका नाम राहुल रखा गया लेकिन विवाह के कुछ समय बाद Gautam बुद्ध ने अपनी पत्नी और बच्चे को छोड़ दिया था। आज हम gautama buddha teachings ,gautam buddha speech और when was buddha born की सम्पूर्ण जानकारी बताने वाले है। क्योकि गौतम बुद्ध की कहानियाँ बहुत प्रचलित है। 

गौतम बुद्ध के उपदेश ने संसार को जन्म, मरण और दुखों से मुक्ति दिलाने के मार्ग की तलाश करने में बहुत मदद की और सत्य दिव्य ज्ञान की खोज में रात के समय अपने राजमहल से जंगल की ओर चले गये थे।  वर्षो की कठोर साधना के बाद बोध बिहार में बोधी वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे सिद्धार्थ गौतम से गौतम बुद्ध बन गये थे। गौतम बुद्ध विचार बहुत ही नेक हुआ करते थे वह पुरे संसार का कल्याण करना चाहते थे। तो चलिए शुरू करते है। 

 नाम  सिद्धार्थ वशिष्ठ
 उपनाम  गौतम बुद्ध, सिद्धार्थ गौतम, शाक्यामुनि, बुद्धा
 जन्म   563 ई०
 जन्मस्थान   लुंबिनी, नेपाल
 पिता  शुद्धोधन
 माता  मायादेवी, महाप्रजावती उर्फ़ गौतमी (सौतेली माँ)
 पत्नी  राजकुमारी यशोधरा
 बच्चे बेटा  राहुल
 धर्म   बौद्ध धर्म
 जाती   क्षत्रिय (शाक्य)
 गृहनगर  लुंबिनी, नेपाल
 व्यवसाय  बौद्ध धर्म के संस्थापक
 मृत्यु   483 ई०
 मृत्यु स्थान  कुशीनगर, भारत
 आयु (मृत्यु के समय)  80 वर्ष

Lord Gautam Buddha Biography In Hindi –

आज हमारे पुरे भारत देश में करीब 190 करोड़ बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं और बौद्ध धर्म के अनुयायी लोगो की संख्या विश्व में 25% हैं. एक सर्वे के अनुसार इसमें – चीन, जापान, वियतनाम, थाईलेंड, मंगोलिया, कंबोडिया, साउथ कोरिया, hong-kong, सिंगापूर, भारत, मलेशिया, नेपाल, इंडोनेशिया, अमेरिका और आदि देश आते हैं जिसमे भूटान, श्रीलंका और भारत देश में बौद्ध धर्म की संख्या ज्यादा हैं। भगवान बुद्ध के अन्य नाम सिद्धार्थ हुआ करता था।

लेकिन “Gautam Buddha” गोत्र में जन्म लेने के कारण उन्हें गौतम नाम से भी पुकारा जाता था। जिसके बाद इनका पालन इनकी मौसी और राजा की दूसरी पत्नी रानी गौतमी ने की और इस बालक का नाम सिद्धार्थ रख दिया गया. इस नाम का मतलब होता हैं जो सिद्धि प्राप्ति के लिये जन्मा हो लेकिन इनको बाद में सिद्धि मिली थी. सिद्धार्थ बचपन से बहुत की दयालु थे।

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भगवान गौतम बुद्ध की शिक्षा और विवाह –

सिद्धार्थ ने गुरु विश्वामित्र के पास वेद और उपनिषद्‌ को तो पढ़ा ही , राजकाज और युद्ध-विद्या की भी शिक्षा ली। कुश्ती, घुड़दौड़, तीर-कमान, रथ हाँकने में कोई उसकी बराबरी नहीं कर पाता। सोलह वर्ष की उम्र में सिद्धार्थ का कन्या यशोधरा के साथ विवाह हुआ। पिता द्वारा ऋतुओं के अनुरूप बनाए गए वैभवशाली और समस्त भोगों से युक्त महल में वे यशोधरा के साथ रहने लगे जहाँ उनके पुत्र राहुल का जन्म हुआ। लेकिन विवाह के बाद उनका मन वैराग्य में चला और सम्यक सुख-शांति के लिए उन्होंने अपने परिवार का त्याग कर दिया सिद्धार्थ ने अपनी शिक्षा गुरु विश्वामित्र से हासिल की थी। 

उन्होंने वेद और उपनिषद के साथ-साथ युद्ध विद्या की भी शिक्षा विश्वामित्री से प्राप्त की. सिद्धार्थ को बचपन से घुड़सवारी, धनुष – बाण और रथ चलाने का एक सारथी में कोई दूसरा मुकाबला नहीं कर सकता था भगवान बुद्ध का धर्म पूर्व के कई राष्ट्रों का धर्म है। जिसमें जापान, दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, चीन, वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड, कंबोडिया, हांगकांग, मंगोलिया, तिब्बत, भूटान, मकाऊ, बर्मा, लागोस और श्रीलंका तो बौद्ध राष्ट्र है। 

हालांकि कुछ वर्षों में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में बौद्धों पर हुए अत्याचार के चलते वहां इनकी संख्या कम हो चली है। सिद्धार्थ की शादी 16 साल की आयु में राजकुमारी यशोधरा के साथ हो गई थी और इस शादी से एक साल बाद बालक का जन्म हुआ था, जिसका नाम राहुल रखा था लेकिन उनका मन घर और मोह माया की दुनिया में नहीं लगा और वे घर परिवार को त्याग कर जंगल में चले गये थे। 

साथ ही भारत, नेपाल, मलेशिया, इंडोनेशिया, रशिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, कनाडा, सिंगापुर, फिलीपींस, ब्राजील और अफगानिस्तान में भी बौद्धों की संख्या अच्छी खासी है।

विरक्ति –

राजा शुद्धोधन ने सिद्धार्थ के लिए भोग-विलास का भरपूर प्रबंध कर दिया। तीन ऋतुओं के लायक तीन सुंदर महल बनवा दिए। वहाँ पर नाच-गान और मनोरंजन की सारी सामग्री जुटा दी गई। दास-दासी उसकी सेवा में रख दिए गए। ये सब चीजें सिद्धार्थ को संसार में बाँधकर नहीं रख सकीं। वसंत ऋतु में एक दिन सिद्धार्थ बगीचे की सैर पर निकले। उन्हें सड़क पर एक बूढ़ा आदमी दिखाई दिया। उसके दाँत टूट गए थे, बाल पक गए थे, शरीर टेढ़ा हो गया था। हाथ में लाठी पकड़े धीरे-धीरे काँपता हुआ वह सड़क पर चल रहा था।

दूसरी बार कुमार जब बगीचे की सैर को निकला, तो उसकी आँखों के आगे एक रोगी आ गया। उसकी साँस तेजी से चल रही थी। कंधे ढीले पड़ गए थे। बाँहें सूख गई थीं। पेट फूल गया था। चेहरा पीला पड़ गया था। दूसरे के सहारे वह बड़ी मुश्किल से चल पा रहा था। तीसरी बार सिद्धार्थ को एक अर्थी मिली। चार आदमी उसे उठाकर लिए जा रहे थे। पीछे-पीछे बहुत से लोग थे। कोई रो रहा था, कोई छाती पीट रहा था, कोई अपने बाल नोच रहा था। इन दृश्यों ने सिद्धार्थ को बहुत विचलित किया।

उन्होंने सोचा कि ‘धिक्कार है जवानी को, जो जीवन को सोख लेती है। धिक्कार है स्वास्थ्य को, जो शरीर को नष्ट कर देता है। धिक्कार है जीवन को, जो इतनी जल्दी अपना अध्याय पूरा कर देता है। क्या बुढ़ापा, बीमारी और मौत सदा इसी तरह होती रहेगी सौम्य? चौथी बार कुमार बगीचे की सैर को निकला, तो उसे एक संन्यासी दिखाई पड़ा। संसार की सारी भावनाओं और कामनाओं से मुक्त प्रसन्नचित्त संन्यासी ने सिद्धार्थ को आकृष्ट किया था। 

भगवान Gautam बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति –

बुद्ध के प्रथम गुरु आलार कलाम थे,जिनसे उन्होंने संन्यास काल में शिक्षा प्राप्त की। ३५ वर्ष की आयु में वैशाखी पूर्णिमा के दिन सिद्धार्थ पीपल वृक्ष के नीचे ध्यानस्थ थे। बुद्ध ने बोधगया में निरंजना नदी के तट पर कठोर तपस्या की तथा सुजाता नामक लड़की के हाथों खीर खाकर उपवास तोड़ा। समीपवर्ती गाँव की एक स्त्री सुजाता को पुत्र हुआ।

वह बेटे के लिए एक पीपल वृक्ष से मन्नत पूरी करने के लिए सोने के थाल में गाय के दूध की खीर भरकर पहुँची। सिद्धार्थ वहाँ बैठा ध्यान कर रहा था। उसे लगा कि वृक्षदेवता ही मानो पूजा लेने के लिए शरीर धरकर बैठे हैं। सुजाता ने बड़े आदर से सिद्धार्थ को खीर भेंट की और कहा- ‘जैसे मेरी मनोकामना पूरी हुई, उसी तरह आपकी भी हो।’ उसी रात को ध्यान लगाने पर सिद्धार्थ की साधना सफल हुई।

उसे सच्चा बोध हुआ। तभी से सिद्धार्थ ‘बुद्ध’ कहलाए। जिस पीपल वृक्ष के नीचे सिद्धार्थ को बोध मिला वह बोधिवृक्ष कहलाया और गया का समीपवर्ती वह स्थान बोधगया। वैशाखी पूर्णिमा के दिन सिद्धार्थ वटवृक्ष के नीचे ध्यानपूर्वक अपने ध्यान में बैठे होते हे और तब . गाँव की एक महिला को सुजाता का एक पुत्र हुआ था। 

उस महिला ने अपने पुत्र के लिये उस वटवृक्ष से एक मन्नत मांगी थीं जो मन्नत उसने मांगी थी वो उसे मिल गयी थी ख़ुशी को पूरा करने के लिये वह महिला एक सोने के थाल में गाय के दूध की खीर भरकर उस वटवृक्ष के पास पहुंची थीं। 

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महापरिनिर्वाण –

पालि सिद्धांत के महापरिनिर्वाण सुत्त के अनुसार ८० वर्ष की आयु में बुद्ध ने घोषणा की कि वे जल्द ही परिनिर्वाण के लिए रवाना होंगे। बुद्ध ने अपना आखिरी भोजन, जिसे उन्होंने कुन्डा नामक एक लोहार से एक भेंट के रूप में प्राप्त किया था, ग्रहण लिया जिसके कारण वे गंभीर रूप से बीमार पड़ गये। बुद्ध ने अपने शिष्य आनंद को निर्देश दिया कि वह कुन्डा को समझाए कि उसने कोई गलती नहीं की है। उन्होने कहा कि यह भोजन अतुल्य है। 

धर्म-चक्र-प्रवर्तन –

80 वर्ष तक अपने धर्म का संस्कृत के बजाय उस समय की सीधी सरल लोकभाषा पली में प्रचार करते रहे और की धर्म लोकप्रियता तेजी से बढ़ने लगी 4 सप्ताह तक बोधिवृक्ष के नीचे रहकर धर्म के स्वरुप का चिंतन करने के बाद बुद्ध धर्म का उपदेश करने निकल पड़े थे और गौतम बुद्ध ने पहले 5 मित्रों को अपना अनुयायी बनाया और फिर उन्हें धर्म प्रचार करने के लिये भेज दिया। 

सिद्दांत के सूत्र के अनुसार बुद्ध ने 80 वर्ष की आयु में यह घोषणा की थी Gautam बुद्ध ने अपना आखिरी भोजन जिसे उन्होंने कुंडा नामक एक लोहार से एक भेंट के रूप में प्राप्त हुवा था और उसे ग्रहण किया, जिसके कारण वे गंभीर रूप से बीमार पड़ गये Gautam बुद्ध ने अपने शिष्य आनंद को एक निर्दश दिया था और कहा कि वह कुंडा को समझाए कि उसने कोई गलती नहीं की हैं, उन्होंने कहा कि यह भोजन महान और अतुलनीय हैं। 

बौद्ध धर्म एवं संघ –

बुद्ध के धर्म प्रचार से भिक्षुओं की संख्या बढ़ने लगी। बड़े-बड़े राजा-महाराजा भी उनके शिष्य बनने लगे। भिक्षुओं की संख्या बहुत बढ़ने पर बौद्ध संघ की स्थापना की गई। बाद में लोगों के आग्रह पर बुद्ध ने स्त्रियों को भी संघ में ले लेने के लिए अनुमति दे दी, यद्यपि इसे उन्होंने उतना अच्छा नहीं माना। भगवान बुद्ध ने ‘बहुजन हिताय’ लोककल्याण के लिए अपने धर्म का देश-विदेश में प्रचार करने के लिए भिक्षुओं को इधर-उधर भेजा।

अशोक आदि सम्राटों ने भी विदेशों में बौद्ध धर्म के प्रचार में अपनी अहम्‌ भूमिका निभाई। मौर्यकाल तक आते-आते भारत से निकलकर बौद्ध धर्म चीन, जापान, कोरिया, मंगोलिया, बर्मा, थाईलैंड, हिंद चीन, श्रीलंका आदि में फैल चुका था। इन देशों में बौद्ध धर्म बहुसंख्यक धर्म है।

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Gautam बुद्ध के उपदेश –

भगवान बुद्ध ने लोगों को मध्यम मार्ग का उपदेश किया। उन्होंने दुःख, उसके कारण और निवारण के लिए अष्टांगिक मार्ग सुझाया। उन्होंने अहिंसा पर बहुत जोर दिया है। उन्होंने यज्ञ और पशु-बलि की निंदा की। बुद्ध के उपदेशों का सार इस प्रकार है

महात्मा Gautam ने सनातन धरम के कुछ संकल्पनाओं का प्रचार किया, जैसे अग्निहोत्र तथा गायत्री मन्त्र

  • ध्यान तथा अन्तर्दृष्टि
  • मध्यमार्ग का अनुसरण
  • चार आर्य सत्य
  • अष्टांग मार्ग

भगवान बुद्ध के संबंध में कुछ अनसुनी बातें –

यह संयोग है या कि प्लानिंग कि वैशाख पूर्णिमा के दिन बुद्ध का जन्म नेपाल के लुम्बिनी वन में ईसा पूर्व 563 को हुआ। उनकी माता महामाया देवी जब अपने नैहर देवदह जा रही थीं, तो कपिलवस्तु और देवदह के बीच नौतनवा स्टेशन से 8 मील दूर पश्चिम में रुक्मिनदेई नामक स्थान के पास उस काल में लुम्बिनी वन हुआ करता था वहीं पुत्री का जन्म दिया। इसी दिन (पूर्णिमा) 528 ईसा पूर्व उन्होंने बोधगया में एक वृक्ष के ‍नीचे जाना कि सत्य क्या है। और इसी दिन वे 483 ईसा पूर्व को 80 वर्ष की उम्र में दुनिया को कुशीनगर में अलविदा कह गए बुद्ध का जन्म नाम सिद्धार्थ रखा गया।

सिद्धार्थ के पिता शुद्धोदन कपिलवस्तु के राजा थे और उनका सम्मान नेपाल ही नहीं समूचे भारत में था। सिद्धार्थ की मौसी गौतमी ने उनकी देख भाल कि थी क्योंकि सिद्धार्थ के जन्म के सात दिन बाद ही उनकी मां का देहांत हो गया था। गौतम बुद्ध शाक्यवंशी क्षत्रिय थे। शाक्य वंश में जन्मे सिद्धार्थ का सोलह वर्ष की उम्र में दंडपाणि शाक्य की कन्या यशोधरा के साथ विवाह हुआ। यशोधरा से उनको एक पुत्र मिला जिसका नाम राहुल रखा गया। बाद में यशोधरा और राहुल दोनों बुद्ध के भिक्षु हो गए थे।

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प्रमुख कार्य और बौद्ध धर्म –

बौद्ध धर्म में Gautam बुद्ध एक विशेष व्यक्ति थे बौद्ध धर्म का धर्म अपनी शिक्षाओं में अपनी नीवं रखता हैं. बौद्ध धर्म के 8 गुना पथ का प्रस्ताव रखा गया था और वर्ल्ड के महान धर्मो में से एक बौद्ध धर्म के प्रवर्तक महात्मा गौतम बुद्ध ने देश ही नहीं विदेशों में भी अपना अमिट प्रभाव छोड़ा हुवा था

  • – चोट लगने पर दर्द होगा और कष्ट विकल्प हैं। 
  • – हमेशा याद रखे एक गलती दिमाग पर उठाएं वह भारी बोझ के समान हैं। 
  • – आप तक रास्ते पर नहीं चल सकते जब तक आप खुद अपना रास्ता नहीं बना लेते। 

Gautam Buddha History Video-

भगवान गौतम बुद्ध से जुड़े कुछ रोचक तथ्य –

  • गौतम के जन्म के सात दिन बाद ही उनकी माता मायादेवी का निधन हो गया था। उसके बाद उनका पालन पोषण उनकी मौसी (सौतेली माँ) और शुद्दोधन की दूसरी रानी महाप्रजावती (गौतमी) ने किया।
  • जब गौतम बुद्ध के जन्म समारोह को आयोजित किया गया, तब उस समय के प्रसिद्ध साधु दृष्टा आसित ने एक भविष्यवाणी की, कि यह बच्चा या तो एक महान राजा बनेगा या एक महान पथ प्रदर्शक।
  • उन्होंने गुरु विश्वामित्र से वेद और उपनिषद्‌ की शिक्षा प्राप्त की। यही-नहीं वेदों की शिक्षा के अलावा उन्होंने कुश्ती, घुड़दौड़, तीर-कमान जैसी कला को एक क्षत्रिय की भांति सीखा।
  • कम उम्र में शिक्षा दीक्षा ग्रहण करने के बाद गौतम बुद्ध का विवाह 16 वर्ष की आयु में कोली वंश की कन्या यशोधरा से हुआ था।
  • उनके पिता ने सिद्धार्थ के लिए भोग-विलासिता का भरपूर प्रबंध किया हुआ था। उनके लिए तीन ऋतुओं के आधार पर अलग-अलग तीन महल बनवा दिए गए थे।
  • जहां नाच-गाना और मनोरंजन की भरपूर व्यवस्था थी। इसके साथ-साथ हर समय दास दासी सेवा करने में होते रहते थे। परन्तु, ये सब व्यवस्था सिद्धार्थ को सांसारिक मोह-माया में बांध नहीं सकी।
  • शुरुआत में, गौतम बुद्ध ने केवल तिल-चावल खाकर तपस्या शुरू की, उसके बाद कुछ भी खाए तपस्या शुरू की
  • छः साल तक तपस्या करने के बाद भी सिद्धार्थ की तपस्या सफल नहीं हुई।
  • एक दिन बुद्ध के मध्यम मार्ग से होकर कुछ स्त्रियाँ गुजरती हैं, जहाँ Gautam बुद्ध तपस्या कर रहे थे। उन स्त्रियों का एक गीत सिद्धार्थ के कान में पड़ा- ‘वीणा के तारों को ढीला मत छोड़ो, ढीला छोड़ देने से उनका सुरीला स्वर नहीं निकलेगा।
  • पर तारों को इतना भी मत कसो कि वे टूट जाएँ।’ यह बात सिद्धार्थ को जँच गई और मान गए कि नियमित आहार-विहार से ही योग सिद्ध होता है।
  • 80 वर्ष की उम्र में, उन्होंने अपने धर्म का संस्कृत की जगह उस समय की सरल भाषा “पाली” में प्रचार किया।
  • कुछ समय के बाद वह काशी के पास मृगदाव (वर्तमान में सारनाथ) पहुँचे। जहाँ उन्होंने सबसे पहले धर्मोपदेश दिया।
  • पाली सिद्धांत के अनुसार 80 वर्ष की आयु में गौतम बुद्ध ने घोषणा की कि वह जल्द ही परिनिर्वाण के लिए रवाना होंगे। जहां गौतम बुद्ध ने एक लोहार के घर अपना आखिरी भोजन ग्रहण किया,
  • जिससे उनकी तबीयत ख़राब हो गई थी। तभी बुद्ध ने अपने शिष्य आनंद को कहा कि वह कुन्डा (लोहार) को कहे कि उनसे कोई गलती नहीं हुई है और उनका भोजन भी ठीक है।
  • हिन्दू धर्म के अनुसार, गौतम बुद्ध को भगवन विष्णु का अवतार माना जाता है।
  • दुनिया का ऐसा कोई हिस्सा नहीं बचा था जहां बौद्ध भिक्षुओं के कदम न पड़े हों। दुनिया भर के हर इलाके से खुदाई में भगवान बुद्ध की प्रतिमा निकलती है।
  • दुनिया की सर्वाधिक प्रतिमाओं का रिकॉर्ड भी बुद्ध के नाम दर्ज है। बुत परस्ती शब्द की उत्पत्ति ही बुद्ध शब्द से हुई है। बुद्ध के ध्‍यान और ज्ञान पर बहुत से मुल्कों में शोध जारी है।

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भगवान गौतम बुद्ध के प्रश्न –

1 .गौतम बुद्ध किसके अवतार थे ?

भगवान बुद्ध विष्णु का अवतार माना जाता है वह दशावतार में  9 वा अवतार बुद्ध को माना जाता है।

2 .गौतम बुद्ध का वास्तविक नाम क्या था ?

भगवान बुद्ध का वास्तविक नाम राजकुमार सिद्धार्थ था। 

3 .गौतम बुद्ध का पुराना नाम क्या था?

भगवान बुद्ध का बालयकाल का नाम सिद्धार्थ था। 

4 .बुद्ध को ज्ञान कहाँ प्राप्त हुआ ?

महात्मा बुद्ध ने अपना पहला उपदेश सारनाथ में दिया था 

5 .गौतम बुद्ध के पुत्र का क्या नाम था ?

भगवान बुद्ध पुत्र का नाम राहुल था। 

निष्कर्ष – 

दोस्तों आशा करता हु आपको मेरा यह आर्टिकल Lord Gautam Buddha Biography In Hindi आपको बहुत अच्छी तरह से समज आ गया होगा और पसंद भी आया होगा । इस लेख के जरिये हमने गौतम बुद्ध वंशावली और गौतम बुद्ध के सिद्धांत से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दे दी है अगर आपको इस तरह के अन्य व्यक्ति के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है तो आप हमें कमेंट करके जरूर बता सकते है। और हमारे इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे। जय हिन्द ।

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