Jayant Vishnu Narlikar Biography – जयंत विष्णु नार्लीकर की जीवनी

नमस्कार मित्रो आज के हमारे लेख में आपका स्वागत है आज हम jayant vishnu narlikar biography in hindi में विज्ञान को अति उत्तम बनाने वाले जयन्त विष्णु नार्लीकर  का जीवन परिचय बताने वाले है। 

विज्ञान को बेहतरीन बनाने हेतु  के लिए उन्होंने हिन्दी – मराठी और अंग्रेजी में बहुत सारे पुस्तक भी लिखे है और तो और जयन्त विष्णु नार्लीकर को भारतीय प्रसिद्ध भौतिकीय वैज्ञानिक कहा जाता हैं। आज jayant narlikar daughter ,jayant narlikar contact और jayant narlikar stories  बताने वाले है। ये ब्रह्माण्ड के स्थिर अवस्था सिद्धान्त के विशेषज्ञ हैं और फ्रेड हॉयल के साथ भौतिकी के हॉयल-नार्लीकर सिद्धान्त के प्रतिपादक हैं।

 इनके द्वारा रचित एक आत्‍मकथा चार नगरातले माझे विश्‍व के लिये उन्हें सन् 2014 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वर्ष 1988 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के द्वारा जयन्त विष्णु नार्लीकर को खगोलशास्त्र एवं खगोलभौतिकी अन्तरविश्वविद्यालय केन्द्र स्थापित करने का काम काज उनको सौपा गया था तो चलिए dr jayant narlikar information in hindi में बताते है। 

Jayant Vishnu Narlikar Biography In Hindi –

नाम

जयंत विष्‍णु नार्लीकर jayant vishnu narlikar

अन्य नाम

 जयंत नार्लीकर

जन्म

 19 जुलाई, 1938

जन्म भूमि

 कोल्हापुर, महाराष्ट्र

अभिभावक पिता

 विष्णु वासुदेव नार्लीकर

माता

 सुमति नार्लीकर

 

कर्म भूमि

  भारत

कर्म-क्षेत्र

  भौतिकी विज्ञान

भाषा

  अंग्रेज़ी, हिन्दी और मराठी

शिक्षा

  पी-एच. डी. (गणित)

विद्यालय

  बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

पुरस्कार-उपाधि

 पद्मभूषण’ (1965) तथा ‘पद्मविभूषण’ (2004)

प्रसिद्धि

 भारतीय वैज्ञानिक

विशेष योगदान

 जयंत विष्णु नार्लीकर ने विज्ञान के प्रचार-प्रसार के लिए विज्ञान साहित्‍य में भी अपना अमूल्‍य योगदान दिया।

नागरिकता

 भारतीय

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जयंत विष्णु नार्लीकर की जीवनी –

jayant vishnu narlikar का जन्म कोल्हापुर के महाराष्ट्र में 19 जुलाई 1938 में हुवा था उनके पिता का नाम विष्णु वासुदेव नार्लीकर था और जयन्त विष्णु नार्लीकर की माता का नाम सुमति नार्लीकर था | जयन्त विष्णु नार्लीकर के पिता विष्णु वासुदेव नार्लीकर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में गणित के शिक्षक थे और उनकी माता सुमति नार्लीकर की संस्कृत की विदुषी थीं

जयन्त विष्णु नार्लीकर की प्रारंभिक शिक्षा सेन्डरल हिन्दू बॉयज स्कूल CHS वाराणसी में पूरी की हुई थी । बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से जयन्त विष्णु नार्लीकर ने स्नातक की उपाधि लेने के बाद जयन्त विष्णुनार्लीकर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय गये थे । और उन्होने कैम्ब्रिज से गणित की उपाधि ली और खगोल-शास्त्र एवं खगोल-भौतिकी में दक्षता प्राप्त की।

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जयंत विष्णु नार्लीकर का शुरुआती सफर –

यह कहा जाता हे कि ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति विशाल विस्फोट के द्वारा हुई थी और तो और एक और भी कहावत हे की इसके साथ साथ ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में एक और सिद्धान्त प्रतिपादित है, और उसका नाम स्थायी अवस्था सिद्धान्त माना गया है। और इस सिद्धान्त के जनक फ्रेड हॉयल इसका श्रेय जाता है । जयन्त विष्णु नार्लीकर जब इंग्लैंड के प्रवास के दौरान, नार्लीकर ने इस सिद्धान्त पर फ्रेड हॉयल के साथ पुरे जोश के साथ काम किया।

इसके साथ ही उन्होंने आइंस्टीन के आपेक्षिकता सिद्धान्त और माक सिद्धान्त को मिलाते हुए हॉयल-नार्लीकर सिद्धान्त का प्रतिपादन भी किया था । जयन्त विष्णु नार्लीकर संन 1970 के दशक में भारत वापस चले आये थे तब फिर उन्होंने टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान में कार्य करना चालू किया था । उन्होने यहाँ से 2003 में अवकाश ग्रहण कर लिया। अब वे वहीं प्रतिष्ठित अध्यापक हैं।

जयंत विष्णु नार्लीकर वैज्ञानिक –

जयंत विष्णु नार्लीकर स्टीफन हॉकिंग को खूब अच्छी तरह से पहचान ते थे। क्योंकी जयंत विष्णु नार्लीकर के दोस्त स्टीफन हॉकिंग उनके साथ केंब्रिज विश्वविद्यालय मे एक ही विभाग ने एक ही साथ पढते थे लेकिन , उस समय स्टीफन हॉकिंग केंब्रिज विश्वविद्यालय मे जयंत विष्णु नार्लीकर से कक्षा मे दो तीन साल पीछे थे। जयंत विष्णु नार्लीकर को अपने देश भारत के प्रति बहुत ही लगाव था और वो अपने देश भारत के लिए बहुत कुछ करने की भावना से वे सन 1972 मे वे भारत वापस आए। 

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामैंटल रिसर्च मे खगोल विभाग के प्रमुख के रूप मे काम करने लगे। सन 1988, पुणे मे इंटर यूनिवरसिटि सेंटर फॉर अस्ट्रॉनॉमी अँड अस्ट्रोफ़िज़िक्स संस्था मे डायरेक्टर के रूप मे काम करने लगे। जयंत विष्णु नार्लीकर ने अपने जीवन मे बहुत सारी कल्पित और अकल्पित विषयों पर आधारित किताबे लिखी है। dr jayant narlikar ने स्थायी अवस्था सिद्धान्त के जनक सर फ्रेड हॉएल के साथ मिलकर कन्फॉर्मल ग्रॅव्हिटी थिअरी (हॉयल-नार्लीकर सिद्धान्त) को इस दुनिया से अवगत करवाया।

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इंस्टीट्यूट ऑफ थेरोटिकल अस्ट्रॉनॉमी के स्टाफ सदस्य –

वे केंब्रिज विश्वविद्यालय मे सन 1966 मे इंस्टीट्यूट ऑफ थेरोटिकल अस्ट्रॉनॉमी के स्टाफ के सदस्य चुने गए थे। सन 1960 मे फ्रेड हॉएल की सिफारिश सेवे अनुसंधान विद्यार्थी के रूप मे नियुक्त किए गए थे। dr jayant narlikar ने कई राष्ट्रीय समितियों में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

जयंत विष्णु नार्लीकर अपने जीवन के 19 वर्ष बनारस मे गुजारे, और बनारस मे उन्होने अपना बचपन भी बिताया था | 15 साल केंब्रिज विश्वविद्यालय मे, 18 साल मुंबई शहर मे और 20 साल महाराष्ट्र के पुणे शहर मे गुजारे है। वे अभी अपने परिवार के साथ पुणे शहर मे रहते है।

जयंत विष्णु नार्लीकर ने अपनी किताबों के माध्यम से विज्ञान आधारित समाज के निर्माण का प्रयास किया है। उनका हमेशा यह कहना था की पुरानी मान्यताओं से बाहर निकलने के लिए हमे एक नए वैज्ञानिक दृष्टिकोण की जरूरत है।

जयन्त विष्णु नार्लीकर के पुस्तकें एवं प्रकाशन –

जयंत विष्णु नार्लीकर को बहुत सारे इनाम और ट्रॉफी ओ से सम्‍मानित किया गया है और जयंत विष्णु नार्लीकर ने विज्ञान के प्रचार-प्रसार के लिए विज्ञान साहित्‍य में भी अपनी अहम् भूमिका निभाई है | विज्ञान के प्रसार – प्रचार द्वारा प्रकाशति हुवे सद्य प्रकाशि‍त संग्रह ‘कृष्ण विवर और अन्य विज्ञान कथाएं जयन्त विष्णु नार्लीकर की हे उनकी 14 विज्ञान कथाओं को संग्रहीत किया गया है, जिसमें उनकी चर्चित कहानियां कृष्ण विवर, नौलखा हार और धूमकेतु भी शामिल हैं।

जयन्त विष्णु नार्लीकर jayant narlikar द्वारा लिखे गए संग्रह अतिरिक्त में विज्ञान कथाएं ओ को भी शामिल किया गया हैं लास्ट विकल्प, दाईं सूंड के गणेशजी, टाइमस मशीन का करिश्मा, पुत्रवती भव, अहंकार, वायरस, ताराश्म, ट्राय का घोड़ा,छिपा हुआ तारा, विस्फोट एवं यक्षों की देन।

यद्यपि उनकी एक अन्य चर्चित विज्ञान कथा ‘हिम प्रलय’ इस संग्रह में शामिल नहीं है, तथापि इसे एक तरह से नार्लीकर की प्रतिनिधि विज्ञान कथाओं का संग्रह कहा जा सकता है। आलोच्य संग्रह में शामिल रचनाओं में नौलखा हार, दाई सूंड के गणेशजी, पुत्रवती भव एवं ट्राय का घोड़ा बेहद रोचक कहानियां हैं। इसके अतिरिक्त अन्य रचनाएं भी विषय के स्तर पर विविधता लिए हुए हैं और पहले ही पैराग्राफ से पाठक को बांधने में सक्षम हैं। 

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जयंत विष्णु नार्लीकर को मिले सम्मान एवं पुरस्कार –

अपने जीवन के सफर में जयंत विष्णु नार्लीकर को अनेक पुरस्कारों से नवाज़ा गया। इन पुरस्कारों में प्रमुख हैं जयंत विष्णु नार्लीकर ने 1962 में ‘स्मिथ पुरस्कार’, 1967 में ‘एडम्स पुरस्कार’ प्राप्त किए। जयंत विष्णु नार्लीकर ने शांतिस्वरूप पुरस्कार (1979) प्राप्त किया था जयंत विष्णु नार्लीकर को इन्दिरा गांधी पुरस्कार (1990) मिला था jayant vishnu narlikar को कलिंग पुरस्कार (1996) प्राप्त हुवा था जयंत विष्णु नार्लीकर को महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार (2010) में उनको दिया गया था। 

जयंत विष्णु नार्लीकर को कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले, जिनमें भटनागर पुरस्कार, एम.पी. बिड़ला पुरस्कार तथा कलिंग पुरस्कार प्रमुख हैं। उन्हें भारत सरकार द्वारा 1965 में ‘पद्मभूषण’ तथा 2004 में ‘पद्मविभूषण’ से सम्मानित किया गया। जयंत विष्णु नार्लीकर को मात्र विज्ञान में किये हुई कार्यो के लिए ही नहीं बल्कि विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए भी पहचाने जाते हैं। जयंत विष्णु नार्लीकर को अक्सर दूरदर्शन या रेडियो पर विज्ञान के लोकप्रिय भाषण देते हुऐ और तो और विज्ञान पर सवालों के जवाब बरसाते हुए भी देखा गया है और सुना भी जा सकता है। 

जयंत विष्णु नार्लीकर की अंतरिक्ष संबंधी कहानियाँ –

  • अंतराळातील भस्मासुर
  • अभयारण्य
  • टाइम मशीनची किमया
  • प्रेषित
  • यक्षांची देणगी
  • याला जीवन ऐसे नाव
  • वामन परत न आला
  • व्हायरस

जयंत विष्णु नार्लीकर jayant narlikar ने अपने जीवन काल के दौरान बहुत सारे विज्ञानकथा ओ का भी उल्लेख किया था  और इन सब विज्ञानकथा ओ की भी माहिती भी दी थी। 

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डॉ जयंत नारळीकर जी की विज्ञान संबंधी किताब – (Jayant Narlikar Books)

  • आकाशाशी जडले नाते
  • गणितातील गमतीजमती
  • युगायुगाची जुगलबंदी गणित अन्‌ विज्ञानाची (आगामी)
  • नभात हसरे तारे (सहलेखक : डॉ॰ अजित केंभावी आणि डॉ॰ मंगला नारळीकर)
  • विज्ञान आणि वैज्ञानिक
  • विज्ञानगंगेची अवखळ वळणे
  • विज्ञानाची गरुडझेप
  • विश्वाची रचना
  • विज्ञानाचे रचयिते
  • सूर्याचा प्रकोप
  • Facts And Speculations In Cosmology
  • Seven Wonders Of The Cosmos
  • जयंत विष्णु नार्लीकर का आत्मचरित
  • चार नगरांतले माझे विश्व

Jayant Vishnu Narlik Video –

Jayant Vishnu Narlikar 7 Interesting Facts –

  • उनके पिता का नाम विष्णु वासुदेव नार्लीकर था और जयन्त विष्णु नार्लीकर की माता का नाम सुमति नार्लीकर था 
  • जयंत विष्णु नार्लीकर ने अपने जीवन में बहुत सारे विज्ञानकथा औ में भी उल्लेख किया हे | और इन सब विज्ञानकथा ओ की भी माहिती भी दी थी | 
  • जयंत विष्णु नार्लीकर को अक्सर दूरदर्शन या रेडियो पर विज्ञान के लोकप्रिय भाषण देते हुऐ और तो और विज्ञान पर सवालों के जवाब बरसाते हुए भी देखा गया है और सुना भी जा सकता है
  • 15 साल केंब्रिज विश्वविद्यालय मे, 18 साल मुंबई शहर मे और 20 साल महाराष्ट्र के पुणे शहर मे गुजारे है। वे अभी अपने परिवार के साथ पुणे शहर मे रहते है।
  • सन 1988, पुणे मे इंटर यूनिवरसिटि सेंटर फॉर अस्ट्रॉनॉमी अँड अस्ट्रोफ़िज़िक्स संस्था मे डायरेक्टर के रूप मे काम करने लगे।
  • जयंत विष्णु नार्लीकर को अपने देश भारत के प्रति बहुत ही लगाव था और वो अपने देश भारत के लिए बहुत कुछ करने की भावना से वे सन 1972 मे वे
  • जयन्त विष्णु नार्लीकर के पिता विष्णु वासुदेव नार्लीकर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में गणित के शिक्षक थे और उनकी माता सुमति नार्लीकर की संस्कृत की विदुषी थीं

जयंत विष्‍णु नार्लीकर के बारे में कुछ प्रश्नों –

1 .जयंत विष्‍णु नार्लीकर का उपनाम का्य था ?

जयंत विष्‍णु नार्लीकर का उपनाम जयंत नार्लीकर था

2 .जयंत विष्‍णु नार्लीकर की जन्म भूमि कौन सी थी?

जयंत विष्‍णु नार्लीकर की जन्म भूमि कोल्हापुर, महाराष्ट्र थी

3 .जयंत विष्‍णु नार्लीकर के पिता का नाम क्या था?

जयंत विष्‍णु नार्लीकर के पिता का नाम विष्णु वासुदेव नार्लीकर है

4 .जयंत विष्‍णु नार्लीकर की माता का नाम क्या है?

जयंत विष्‍णु नार्लीकर की माता का नाम सुमति नार्लीकर है

5 .जयंत विष्‍णु नार्लीकर की जन्म भूमि कोनसी है?

जयंत विष्‍णु नार्लीकर की जन्म भूमि भारत है

6 .जयंत विष्‍णु नार्लीकर का कर्म-क्षेत्र कोन सा है ?

जयंत विष्‍णु नार्लीकर का कर्म-क्षेत्र भौतिकी विज्ञान है

7 .जयंत विष्‍णु नार्लीकर कोन कोन सी लेंग्वेज में माहिर थे ?

नार्लीकर अंग्रेज़ी, हिन्दी और मराठी यह तीन लेंग्वेज पढ़ने में लिखने में और बोलने में भी बहुत माहिर कार थे

8 .जयंत विष्‍णु नार्लीकर ने कोन सी शिक्षा प्राप्त की थी ?

jayant vishnu narlikar पी-एच. डी. (गणित) की शिक्षा प्राप्त की थी

9 .जयंत विष्‍णु नार्लीकर ने कोन सी विद्यालय में एडमिशन लिया था ?

जयंत विष्‍णु नार्लीकर ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया था

10 .जयंत विष्‍णु नार्लीकर को कोन से पुरस्कार और उपाधि से संबोधित किया था?

जयंत विष्‍णु नार्लीकर को पद्मभूषण’ (1965) तथा ‘पद्मविभूषण’ (2004) पुरस्कार और उपाधि से संबोधित किया था

11 .जयंत विष्णु नार्लीकर मुत्यु कब हुए थी ?

जयंत विष्णु नार्लीकर मुत्यु करीबन 31 ओक्टोबर 1992 में हुए थी

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Conclusion –

दोस्तों आशा करता हु आपको मेरा यह आर्टिकल jayant vishnu narlikar biography in hindi  पूरी तरह से समज आ गया होगा। इस लेख के जरिये  हमने brahmand ki rachna jayant vishnu narlikar और jayant vishnu narlikar in hindi से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दे दी है अगर आपको इस तरह के अन्य व्यक्ति के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है तो आप हमें कमेंट करके जरूर बता सकते है। और हमारे इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द।

2 thoughts on “Jayant Vishnu Narlikar Biography – जयंत विष्णु नार्लीकर की जीवनी”

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