Swami Vivekananda Jayanti in Hindi – स्वामी विवेकानंद जयंती हिंदी

नमस्कार मित्रो आज के हमारे आर्टिकल में आपका स्वागत है आज हम Swami Vivekananda Jayanti in Hindi में हिन्दू धर्म के महान ज्ञानी  संत एव नेता स्वामी विवेकांनद की जन्म जयंती की जानकारी बताने वाले है।

उन्होंने रामकृष्ण मिशन और रामकृष्ण मठ की स्थापना की थी।स्वामी विवेकांनद भारत के महान ज्ञानी पुरुष थे। उन्ही की एक एक बेहतरीन खासियत थी की जब कोई भी पुस्तक पढ़ते थे इन पुस्तक का पन्ना एक बार पढ़ के वो निकाल देते थे इतने ज्ञानीपुरुष थे जो आज भी उनकी जन्म जयंती मानाते है। आज swami vivekananda speech ,swami vivekananda thoughts और swami vivekananda jayanti date से जुडी कई रोचक जानकारी से आपको ज्ञात करायेंगे। 

swami vivekananda birthday 12जनवरी केदिया मनायाजाता है , उनका जन्म कोलकाता के सीमुलिया में हुआ था वह अपने बालयकाल से ही पढ़ने में बहुत चतुर थे उनकी बुद्धिचातुर्य से उन्होंने भारत देश को बहुत योगदान दिया हुआ है।  उनका ओरिजनलनाम विश्वनाथ दत्त था। तो चलिए आपको इस महान इन्सान swami vivekananda death से जुडी सभी बातो से ज्ञात करवाते है।  

  नाम   स्वामी विवेकांनद
  उपनाम   रेन्द्र नाथ दत
  जन्म   12 जनवरी 1863 
  जन्मस्थान    कोलकाता के सीमुलिया में
  पिता   विश्वनाथ दत्त
   माता   भुवनेश्वरी देवीजी
  मृत्यु   4 जुलाई 1902
  मृत्युस्थान   बेलूर मठ, हावड़ा

Swami Vivekananda Jayanti in Hindi –

स्वामी विवेकांनद का जन्म 12 जनवरी 1863 में कोलकाता के सीमूलिया में हुवा था। उनका बचपन का नाम नरेन्द्र नाथ दत था इनके पिता जी विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट के एक प्रसिद्ध वकील थे। उनके पिता पाश्चात्य सभ्यता में भरोसा रखते थे। वे उनके पुत्र नरेन्द्र को भी अँग्रेजी पढ़ाकर पाश्चात्य सभ्यता के ढर्रे पर चलाना चाहते थे। स्वामी विवेकांनद की माता भुवनेश्वरी देवीजी धार्मिक विचारों की महिला थीं।

उनके माता का पूरा समय भगवान शिवजी की पूजा करने में ही होता था । नरेन्द्र की बुद्धि बचपन से बड़ी तीव्र थी और परमात्मा को पाने की लालसा भी प्रबल थी। इस हेतु से वो पहले ‘ब्रह्म समाज’ में गये परंतु उनके आत्म को चेन नहीं हुआ। वे वेदान्त और योग और पश्चिम संस्कृति को विख्यात करने के लिए महत्व योगदान देना चाहते थे|

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स्वामी विवेकांनद ने क्यों विवाह नहीं किया था – 

उनके विवाह की बात सुनकर मां काली के पैर पकड़ कर वे रोये थे. रोते हुए कहा था, “मां, वह सब फेर दे – मां, नरेन कहीं डूब न जाय! रामकृष्ण जब एक दिन इनके अध्ययन-कक्ष में पधारकर मुझे ब्रह्मचर्य पालन का सलाह दे रहे थे, तो उनकी दादी ने कानो से सब सुन कर मेरे माता-पिता कह दिया। सन्यासी को मिलकर मैं भी सन्यासी हो जाऊंगा इस दिन से स्वामी विवेकांनद के विवाह की बात करते थे। 

परंतु बात करने से क्या होता है श्ररामकृष्ण की प्रबल इच्छा के विरुद्ध उन लोगों की सारी बाते बह गयीं। सभी विवाह की बात तेय होजाने के बाद भी दोनों के परिवार में मत भेद होने लगा और विवाह का संबंध टूट गया।  स्वामी विवेकांनद हर औरत को माता के रूप ही देखते हु लेकिन विवाह क्यों करूं? मैं सब त्याग करता हूँ? क्यों की में सांसारिक बंधनों व आसशक्तियो मुक्त करने के लिए, ताकि मेरा पुनर्जन्म न हो. मृत्यु के बाद मैं केवल परमात्मा को मिला देना चाहता हूं, परमात्मा के साथ एक को जाना चाहता हूं. मैं ‘बुद्ध’ हो जाऊंगा.

आपके मनमे कोई ख्याल आया होगा कि मेरे अंदर काली तांत्रिक शक्ति होगी. तो कही आप लोगों को चाहूंगा कि मेरा अंदर एक शक्ति है और वह कि मैंने अपने जीवन में कभी एक बार भी यौन- विषयक विचार को प्रश्रय नहीं दिया है। मैंने अपने मन को, चिंतन को प्रशिक्षित किया और जिन शक्तियों को व्यक्ति उस दिशा में प्रेरित करता है, उन्हें मैंने एक उच्चतर दिशा में उन्नीत किया; और यह एक ऐसी प्रबल शक्ति में विकसित हुआ, जिसे कोई भी रोक नहीं सकता। 

स्वामी विवेकानंद का बालिका छात्रवृत्ति – 

स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल बानसूर के 17 स्टूडेण्ट ने नेशनल मीन्स कम मेरिट स्कॉलरशिप चयन में बाजी मारकर परचम लहराया है। प्रधानाचार्य डॉ. रामवतार अरुण ने बताया केंद्र सरकार प्रवर्तित नेशनल मीन्स कम मेरिट स्कॉलरशिप चयन परीक्षा में स्कूल के 17 स्टूडेण्ट चयन हुआ है। इस दौरान आयोजित कार्यक्रम में चयनित स्टूडेण्ट का प्रोसाहित किया गया। इस मौके पर कार्यवाहक प्रधानाचार्य मुकेश मीणा, राजेश यादव, संदीप कुमार सहित स्टाफ मौजूद थे।

थानागाजी राउमावि रुपुकाबास में अध्ययनरत चार बालकों का छात्रवृत्ति चयन किया गया है। वह छात्रवृत्ति राजस्थान राज्यमें शैक्षणिक संस्था अनुसार एवं शैक्षणिक संस्था उदयपुर द्वारा आयोजित नेशनल रेंक क्रम मीन्स स्कॉलरशिप परीक्षा 2018 में घोषित परिणाम में 6 विद्यार्थियों का चयन हुआ है। प्रधानाचार्य गोपाल कृष्ण शर्मा ने बताया कि विद्यालय के योगेश, विजय, अनीश, डिम्पल, रीठीता एवं प्रीति गंगावत का स्कॉलरशिप के लिए चयन होने पर ग्रामीणों ने विद्यार्थियों का स्वागत किया।

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स्वामी विवेकानंद के उद्धरण – 

Swami Vivekananda Jayanti जब सुनाते हैं कि जिस समय मेरे को यह मालूम पड़ गया कि हर व्यक्ति के दिल में ईश्वर हैं तभी से मैं मेरे आगे आने वाले हर व्यक्ति में ईश्वर की छवि देखने लगा हूं और उसी पल मैं हर बंधन से छूट गया। हर उस चीज से जो बंद रखती है, धूमिल हो जाती है और मैं तो आजाद हूं। स्वामी विवेकानंद सुनाते हैं कि ईसा मसीह की जैसे दिमाग से सोचना चाहिए और तुम ऐसा हो जाओ बुद्ध की तरह सोचिए और तुम बुद्ध की तरह हो जाओ ।

जिंदगी बस महसूस होने का नाम है। अपनी ताकत, हमारी कला-कौशल का नाम है जिनके बिना ईश्वर तक पहुंचना नामुमकिन है। बाहर की जगत कुछ ऐसी है, कि हम दिल से विचारत हैं। अपने विचार ही चीजों को सुशील और बहुति गटिया बनाते हैं। पूरी दुनिया हमारे दिल में है, बस जरूरत है चीजों को सही रोशनी में रखकर देखने की। वो आप व्यक्ति को पैसा व्यक्ति की बडिया काम करने में हेल्प करता है तो पैसा महत्व है, पर अगर वे दूसरे की मदद नहीं करता तो लेकिन यह पैसा किसी काम का नहीं होता है। 

सिवाय एक बुराई के। इसीलिए इससे जितनी जल्दी पीछा छूटे, उतना ही अच्छा चारों तरफ से बस प्रेम ही प्रेम है। प्यार फैलाव है, तो स्वार्थ सिकुड़न है। अत: वल्द का बस एक ही नियम रहना चाहिए, प्रेम… प्रेम… प्रेम…! जो प्रेम करता है, प्रेम से रहता है, यही सही मायने में जीता है। जो दिल में जीता है वो मर रहा है इसलिए प्यार पाने के लिए प्यार करो, क्योंकि यही जिंदगी का नियम है। 

पहले यह पूरी तरह से पहचान लो कि कोई बात के पीछे एक सवाल होता है। इस दुनिया की हर चीज बहुत अच्छी है, सुंदर है। अगर आपको कुछ बुरा दिखाई देता है तो इसका मतलब यह नहीं कि वो बुरा है। इसका मतलब यह है कि आपने उसे सही रोशनी में नहीं देखा। आप किसी को भी दोष मत दो। जो आप खुद की हथेली आगे निकालकर दुसरो की हेल्प कर सकते हो तो करो, जो आप नहीं कर सकते हो तो अपने हाथ बांधकर खड़े रहो।

अपने वालों को शुभकामनाएं दो और उन्हें उनके रास्ते जाने दो। आप दोष देने वाले कोई नहीं होते हैं। आप कभीभी अपने मनमे यह मत सोचना कि आपकी आत्मा को कोई चीज नामुमकिन है। यह सोचकर आप और भी ज्यादा दुखी हो जाते है। अगर आपके मनमे कुछ पाप है, तो वो सिर्फ और सिर्फ अपने आपको या दूसरों को कमजोर मानना है।

स्वामी विवेकानंद कहते है की आप अपने आप से सीखना है की सब तुम्हें कोई और नहीं सीखा पाता आपको और मनुष्य आध्यात्मवादी नहीं बना पाता आपको सब सिखा सकता है तो यह आपकी आत्मा है। स्वामी विवेकानंद कहते है की सच्चाई के लिए आपको कुछ भी त्याग कर देना चाहिए पर किसी और के लिए अपनी सच्चाई का त्याग मत करना। 

स्वामी विवेकानंद शिकागो भाषण शून्य पर ही क्यों बोले –

Swami Vivekananda Jayanti यह एक मशहूर कहानी है। विवेकानंद ई.स1893 में शिकागो में की गई विश्व धर्म की धर्ममहासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व करने के लिए गए थे। जब वो वहां पहुंचे तो आयोजकों ने उनके नाम के आगे शून्य लिख दिया था। जानकारी के मुताबिक ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि कुछ लोग उन्हें परेशान करना चाहते थे।

जानकारी के मुताबिक विवेकानंद जब भाषण देने के लिए खड़े हुए तब उनके सामने दो पेड़ों के बीच में एक सफेद कपड़ा बंधा हुआ पाया जिसके बीच में एक ब्लैक डॉट था। स्वामी विवेकानंद पूरी बात को अच्छे से भांप चुके थे। इसलिए उन्होंने यहां पर अपने भाषण की शुरूआत शून्य से ही की।

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स्वामी विवेकानंद जयंती की यात्राएं – 

25 वर्ष की अवस्था में स्वामी जी ने केसरी वस्त्र धारण कर लिए थे। तदुपरांत स्वामीजीने चलकर ही पूरे भारत में यात्रा की।स्वामी जी ने 31 मई ई.स 1893 को अपनी यात्रा प्रारंभ की और जापान के कई शहरों (नागासाकी, कोबे, योकोहामा, ओसाका, क्योटो और टोक्यो समेत) का दौरा किया,चीन और कनाडा होते हुए अमेरिका के शिकागो पहुँचे सन्‌ 1893 में शिकागो (अमरीका) में विश्व धर्म परिषद् हो रही थी।

स्वामी विवेकानन्द उसमें भारत के प्रतिनिधि के रूप में पहुँचे। योरोप-अमरीका के लोग उस समय पराधीन भारतवासियों को बहुत हीन दृष्टि से देखते थे। वहाँ लोगों ने बहुत प्रयत्न किया कि स्वामी विवेकानन्द को सर्वधर्म परिषद् में बोलने का समय ही न मिले। परन्तु अमेरिकन प्रो केप्रयत्न से उन्हें थोड़ाटाइम मिला। उस सभा में स्वामीजी के विचार सुनकर सभी प्रो आस्चर्य चकित हो उठे। बाद में तो अमरीका मेंस्वामी विवेकानंद का स्वागत हुआ।

वहाँ उनके भक्तों का एक बड़ा समुदाय बन गया। तीन वर्ष वे अमरीका में रहे और वहाँ के लोगों को भारतीय तत्वज्ञान की अद्भुत ज्योति प्रदान की। उनकी वक्तृत्व-शैली तथा ज्ञान को देखते हुए वहाँ के मीडिया ने उन्हें साइक्लॉनिक हिन्दू का नाम दिया। अध्यात्म-विद्या और भारतीय दर्शन के बिना विश्व अनाथ हो जायेगा” यह स्वामी विवेकानन्द का दृढ़ विश्वास था। अमरीका में उन्होंने रामकृष्ण मिशन की अनेक शाखाएँ स्थापित कीं।

अनेक अमरीकी विद्वानों ने उनका शिष्यत्व ग्रहण किया। वे सदा अपने को ‘गरीबों का सेवक’ कहते थे। भारत के गौरव को देश-देशान्तरों में उज्ज्वल करने का उन्होंने सदा प्रयत्न किया।

रामकृष्ण परमहंस से स्वामीजी का परिचय कैसे हुवा –

श्री रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद की पहली मुलाकात उनके दोस्त के घर पर हुवा था । वहा से गुरु रामकृषण और शिष्य विवेकानंद के बिच चुम्बकीय आकर्षण का अध्याय शुरु किया गया था। जब कभी घर गृहस्ती के काम के कारण नरेंद्र (स्वामी विवेकानंद का बचपन का नाम) रामकृष्ण से मिलने दक्षिणेश्वर नहीं जा पाते तो, रामकृष्ण व्याकुल हो जाते थे।

एक बार बहुत दिनों तक नरेंद्र उनसे मिलने नही गये उसी दौरान किसी ने कहा कि, नरेन्द्र का चाल-चलन बिगड़ गया है, यह बात श्री रामकृष्ण को सही नहीं लगी और उन्होने अपने भक्तों से कहा कि जाकर के उसका हालचाल लेकर आओ, क्यों नहीं आ रहा है? कई भक्त नरेन्द्र के घर चले और उसे तरह-तरह के सवाल पूछने लगे, तो नरेंद्र को लगा कि यह लोग मेरे पर वेहम करते हैं और गुरु रामकृष्ण भी शक करते हैं इसिलिये उन्होंने इन लोगों को मेरे बारे में जानने के लिए भेजा है।

ये सोचकर नरेन्द्र को गुस्सा आ गया। नरेन्द्र के इस व्यवहार से जो शिष्य आए थे उन्हे भी लगा कि नरेंद्रनाथ का चरित्र बिगड़ गया है और उन लोगों ने जाकर के रामकृष्ण जी से कहा कि, अब तो नरेंद्र का चरित्र भी बिगड़ गया है। यह सुनकर रामकृष्ण बहुत परेशान हो गए और उन्होंने कहाकी ; “चुप रहो मेरे को मां ने बताया है यह कभी वेशा नहीं हो सकता फिर ऐसी बात कहोगे तो मैं आप सभी लोगों का चहेरा तक न देखूंगा।“ नरेंद्र पर श्री रामकृष्ण का कितना दृढ़ विश्वास था यह समझ पाना कठिन है।

Swami Vivekananda Jayanti 2020 –

Swami Vivekananda Jayanti  यानी राष्ट्रीय युवा दिन के आज भी पुरे भारत देश में कही बड़े बड़े उत्सव मनाते हैं। स्वामी विवेकानंद जी को पूरा भारत देश याद करता हैं और उनकी अपनी श्रद्घांजिल अर्पित कर रहे हैं। स्वामी विवेकानंद भारत देश के महान ज्ञाननी धर्म गुरुओं में से एक हैं। स्वामी विवेकानंद का जीवन और उनका संदेश व प्रवचन दुनिया के लाखों लोगों को प्रभावित किया है।

यह विद्वता औरसारी सिख के बड़े श्रोत माने जाते हैं। वह अपने धार्मिक ज्ञान से किसी के भी दिल में जगह बनाने के और अपने शक्तिशाली विचारों तर्कयुक्त विचारों से किसी सोचने का नजरिया बदलने की क्षमता रखते थे। उनके इसे खूब प्रभास की और दुनिया में भारत की एक अलग पहचान बनाने के लिए देश उन्हें उनकी जयंती पर नमन करता है। स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। इसे मौके पर उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू और पदुच्चेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

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स्वामी विवेकानंद की मृत्यु कैसे हुई- 

स्वामी विवेकानंद 1887 में अधिक तनाव और खाने की कमी के कारण वो बीमारी पड़ गए थे। उसी कारण वह पित्त में पथरी और दस्त से भी पीड़ित हुए थे । उनके निधन की वजह तीसरी बार दिल का दौरा पड़ना था। शंकर ने उस बात का भी सबके सामने खुले से बात किया था कि स्वामी विवेकानंद ने भारत वापस आने से के लिए अपनी मिस्र की यात्रा में कटौती क्यों की थी।

दरअसल विवेकानंद ने मिस्र में घोषणा की थी कि 4 जुलाई को उनका देहांत हो जाएगा। उनका कहना था कि मृत्यु के समय वे भारत में अपने गुरुभाइयों के समीप रहना चाहते हैं। वहीं मठकर्मियों का मानना है कि स्वामी विवेकांनद जी ने समाधि ली थी| हालांक‍ि मेडिकल रिपोर्ट में स्वामी विवेकानंद की मौत की वजह दिमाग की नसें फटना बताई गई है।

Swami Vivekananda Jayanti Video –

Swami Vivekananda Jayanti Fact –

  • स्वामी विवेकांनद के पिता का नाम विश्वनाथ दत्त था और माता का नाम भुवनेश्वरी देवीजी था। 
  • वे सदा अपने को ‘गरीबों का सेवक’ कहते थे। भारत के गौरव को देश-देशान्तरों में उज्ज्वल करने का उन्होंने सदा प्रयत्न किया।
  • मेडिकल रिपोर्ट में स्वामी विवेकानंद की मौत की वजह दिमाग की नसें फटना बताई गई है।
  • स्वामी विवेकानंद कहते है की आप अपने आप से सीखना है की सब तुम्हें कोई और नहीं सीखा पाता आपको और मनुष्य आध्यात्मवादी नहीं बना पाता आपको सब सिखा सकता है। 
  • विवेकानंद ई.स1893 में शिकागो में की गई विश्व धर्म की धर्ममहासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व करने के लिए गए थे। 

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स्वामी विवेकानंद के प्रश्न –

1 .विवेकानंद की पत्नी कौन है ?

उन्होंने शादी नहीं की थी उन्ही की कोई भी पत्नी नहीं थी। 

2 .हम राष्ट्रीय युवा दिवस क्यों मनाते हैं ?

स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन को मनाने के लिए राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है।

3 .विवेकानंद की मृत्यु क्या हुई?

उनकी मृत्यु 4 जुलाई 1902 के बेलूर मठ, हावड़ा में हुई थी। 

4 .स्वामी विवेकानंद की बचपन की महत्वाकांक्षा क्या थी?

उन्होंने अपने तर्कसंगत दिमाग से और मां अपने धार्मिक स्वभाव से अपनी माँ से उन्होंने आत्म-नियंत्रण की शक्ति सीखी

5 .किस उम्र में विवेकानंद की मृत्यु हो गई?

स्वामी विवेकानंद की मौत 39 वर्ष की उम्र में हुई थी। 

निष्कर्ष – 

दोस्तों आशा करता हु आपको मेरा यह आर्टिकल Swami Vivekananda Jayanti Hindi आपको बहुत अच्छी तरह से समज आ गया होगा। इस लेख के जरिये  हमने swami vivekananda death date और  swami vivekananda wife और के सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दे दी है अगर आपको इस तरह के अन्य व्यक्ति के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है तो आप हमें कमेंट करके जरूर बता सकते है। और हमारे इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द ।

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