Lord Dalhousie Biography Information – लॉर्ड डलहौजी जीवनी की जानकारी

Table of Contents

नमस्कार मित्रो आज के हमारे लेख में आपका स्वागत है आज हम Lord Dalhousie Biography Information में ब्रिटिश साम्राज्य को भारत में विस्तार करने वाले गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी का जीवन परिचय देने वाले है। 

1848 में भारत में गवर्नर जनरल के पद पर आया और 1856 तक वह गवर्नर जनरल रहा था । उसके शासन करने का तरीका साम्राज्यवाद की नीति से प्रेरित था। इस गवर्नर ने अपने शासनकाल में राज्य विस्तार की नीति अपनाई गई और बहुत से राज्यों पर जबरन अंग्रेजी हुकूमत ने कब्जा कर लिया। आज हम lord dalhousie work ,what was introduced by lord dalhousie और lord dalhousie khalsaniti से जुडी सभी रोचक माहिती बताने वाले है। 

लॉर्ड डलहौजी के कार्य की बात करे तो उसने अंग्रेज सरकार के लिए बहुत से महत्वपूर्ण काम किए। लॉर्ड डलहौजी की हड़प नीति से उसने अंग्रेज़ साम्राज्य का बहुत विस्तार किया था और लॉर्ड डलहौजी कस कार्यकाल lord dalhousie time penod 8 साल तक रहा था। उस वक्त में लॉर्ड डलहौजी सुधार किए वह बहुत ही सराहनीय रहे है । डलहौजी ने भारत की रियासतों को तीन भागों में विभाजित कर दिया। तो चलिए उसकी सभी बातो से वाकिफ कराते है।  

Lord Dalhousie Biography Information –

नाम  लॉर्ड डलहौजी
वास्तविक नाम जेम्स एंड्रू ब्राउन रामसे
जन्म 1812
जन्मस्थल स्कॉटलैंड
शिक्षा ऑक्सफ़ोर्ड और क्राइस्ट चर्च एंड हेरो 
पेशा भारत का गवर्नर
मौत 1860

लॉर्ड डलहौजी का जीवन परिचय –

डलहौजी के विषय में इतिहासकारों ने लिखा है , कि डलहौजी से पूर्व जो गवर्नर भारत में आए उनका सिद्धांत था कि जिस प्रकार भी संभव हो ब्रिटिश राज्य विस्तार ना किया जाए, परंतु डलहौजी का सिद्धांत था कि जिस प्रकार भी संभव हो ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार किया जाए। लॉर्ड डलहौज़ी, जिसे ‘अर्ल ऑफ़ डलहौज़ी’ भी कहा जाता था, गवर्नर-जनरल बनकर भारत आया। 

Lord Dalhousie Biography Information – उसका शासन काल आधुनिक भारतीय इतिहास में एक स्मरणीय काल रहा क्योंकि उसने युद्ध व व्यपगत सिद्धान्त के आधार पर अंग्रेज़ साम्राज्य का विस्तार करते हुए अनेक महत्त्वपूर्ण सुधारात्मक कार्यों को सम्पन्न किया। लॉर्ड डलहौज़ी ने भारतीय रियासतों को तीन भागों में विभाजित किया था। 

वह भारतीय रियासतों की उपाधियों व पदवियों पर सदा ही प्रहार करता रहा। डलहौज़ी ने मुग़ल सम्राट की उपाधि भी छीनने की कोशिश की थी, पर अपने इस कार्य में वह सफल नहीं हो सका। डलहौज़ी नगर, औपनिवेशक भारत के ब्रिटिश गवर्नर-जनरल, लॉर्ड डलहौज़ी के नाम पर ही पड़ा था।

इसके बारेमें भी पढ़िए :- भारतीय थल सेना की पूरी जानकारी हिंदी

लॉर्ड डलहौजी व्यक्तिगत सिद्धांत –

लॉर्ड डलहौजी के प्रशासनिक सुधर और सिद्धांत के लिए बहुत प्रसिद्ध है। इस सिद्धांत के द्वारा कुछ महत्वपूर्ण रियासतों को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया। लॉर्ड डलहौजी के अनुसार भारत में तीन प्रकार की रियासतें थी , वे जो कभी भी किसी उच्च शक्ति के अधीन न रही और न ही कर देती थी। वे भारतीय रियासतें जो मुगल सम्राट या पेशवा के माध्यम से कम्पनी के अधीन आ गई थी। 

वे रियासतें जिन्हें अंग्रेजों ने पुनर्जीवित कर स्थापित किया था , लॉर्ड डलहौजी का यह निश्चित मत था कि राजाओं की निजी सम्पत्ति के उत्तराधिकार के सम्बन्ध में दत्तक पुत्र की अनुमति है किन्तु राजगद्दी पर अधिकार के लिए नहीं। उसके मत में प्रथम श्रेणी की रियासतों के राजाओं द्वारा दत्तक ग्रहण के संबंध में हमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। 

किन्तु सरकार द्वितीय और तृतीय श्रेणी की रियासतों के लिए दत्तक पुत्र को गद्दी पर बिठाने की अनुमति नहीं देगी। इस प्रकार व्यक्तिगत के सिद्धान्त के अनुसार-  (1 ) सतारा (1848), ( 2 ) जैतपुर और संभलपुर (1849), ( 3 ) वघाट (1850), ( 4 ) उदयपुर (1852), ( 5 ) झांसी (1853) और ( 6 ) नागपुर (1854)  इस सभी रियासतों का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर लिया गया था। 

लॉर्ड डलहौजी की महत्वपूर्ण सफलता –

द्रितीय आंग्ल-सिख युद्ध तथा पंजाब का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय (1849 ई.) डलहौज़ी की प्रथम सफलता थी। मुल्तान के गर्वनर मूलराज के विद्रोह, दो अंग्रेज़ अधिकारियों की हत्या और हज़ारा के सिक्ख गर्वनर, चतर सिंह के विद्रोह ने पंजाब में सर्वत्र अंग्रेज़ विरोध की स्थिति पैदा कर दी थी। डलहौज़ी ने द्वितीय आंग्ल सिक्ख युद्ध के बाद 29 मार्च, 1849  के दिन घोषणा द्वारा पंजाब का विलय ब्रिटिश साम्राज्य में कर लिया। महाराजा दलीप सिंह को पेन्शन दे दी गयी।

इस युद्ध के विषय में डलहौज़ी ने कहा था कि, ‘सिक्खों ने युद्ध माँगा है, यह युद्ध प्रतिशोध सहित लड़ा जायगा। 1850 में लॉर्ड डलहौज़ी ने सिक्किम पर दो अंग्रेज़ डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाकर उस पर अधिकार  लोअर बर्मा तथा पीगू का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय डलहौज़ी के समय में ही किया गया। 1852 में ही द्वितीय आंग्ल-बर्मा युद्ध लड़ा गया, जिसका परिणाम था, बर्मा की हार तथा लोअर बर्मा एवं पीगू का अंग्रेज़ी साम्राज्य में विलय कर लिया था। 

प्रथम वर्ग – Lord Dalhousie Biography

Lord Dalhousie Biography Information – इस प्रकार की रियासतों में कोई अंग्रेज शासन नहीं था और ना ही वह किसी प्रकार का कर (टैक्स) देती थी। जयपुर और उदयपुर इस प्रकार के राज्य थे जिनका ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर लिया गया।

द्रितीय वर्ग –

इस वर्ग में ऐसी रियासते थी जो पहले मुगलों और पेशवाओ के अधीन थी पर वर्तमान में अंग्रेजों के अधीन थी। नागपुर और ग्वालियर इस प्रकार के राज्य थे जिनका विलय ब्रिटिश साम्राज्य में किया गया।

तृतीय वर्ग –

इस प्रकार के वर्ग में ऐसी रियासते थी जो अंग्रेजों के सनदो द्वारा स्थापित की गई थी। झांसी और सातारा इस प्रकार के राज्य थे जिनका ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किया गया।

इसके बारेमें भी पढ़िए :-

लॉर्ड डलहौजी ने की गोद प्रथा पर निषेध –

भारतीय राज्यों को हड़पनेके लिए डलहौजी ने गोद प्रथा निषेध की नीति लागू की। इस नीति के अनुसार संतान हीन राजाओं, नरेश जो ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन थे। जिनका अस्तित्व कंपनी के कारण हुआ था या कंपनी पर निर्भर थे वह किसी दूसरे पुत्र को गोद लेकर राजा नहीं बना सकते थे। इस तरह के राज्यों को ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन कर लिया जाता था। 

झाँसी सन 1853 –

सन 1843 में झांसी के राजा गंगाधर राव का देहांत हो गया। देहांत से पूर्व उन्होंने दामोदर राव नामक बालक को गोद ले लिया और भावी राजा बना दिया। परंतु 20 फरवरी सन 1854 को डलहौजी ने यह निर्णय बदल दिया। उसके अनुसार झांसी का दत्तक पुत्र राज्य का अधिकारी नहीं हो सकता है। झांसी की रानी लक्ष्मी बाई ने डलहौजी को सन 1817 की संधि याद दिलाई पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा।सन 1853 में झांसी का ब्रिटिश राज्य में विलय कर लिया गया।

सतारा सन 1848 – Lord Dalhousie Biography

डलहौजी ने गोद-प्रथा निषेध बनाया था। इस सिद्धांत का प्रथम प्रयोग सतारा राज्य के लिए किया गया। सतारा के राजा अप्पा साहेब ने अपनी मृत्यु से पूर्व एक दत्तक पुत्र को राजा बना दिया था। डलहौजी ने इसे कम्पनी आश्रित राज्य घोषित कर 1848 में सतारा राज्य का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर लिया। जोसेफ ह्नूम ने कॉमन सभा में इस विलय को “जिसकी लाठी उसकी भैंस” की संज्ञा दी थी।

संबलपुर और जैतपुर 1849 –

उड़ीसा के संबलपुर राज्य के राजा नारायण सिंह की मृत्यु निःसन्तान हो गई। मरने से पूर्व वह कोई पुत्र गोद नहीं ले सका। इसलिए उसकी विधवा रानी ने शासन अपने हाथों में ले लिया। परंतु डलहौजी ने सिंहासन पर रानी के अधिकार को अस्वीकृत कर दिया। संबलपुर और जैतपुर राज्य को हड़प लिया। 1849 में इसे ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर लिया गया।

नागपुर 1854 – Lord Dalhousie Biography

Lord Dalhousie Biography Information – नागपुर के राजा राघो जी भोसले बिना किसी संतान के ही मृत्यु को प्राप्त हो गए। उनकी मृत्यु के पूर्व उन्होंने यशवंतराव को गोद लिया। लेकिन डलहौजी ने उसे भी अस्वीकृत कर दिया। 1854 को नागपुर राज्य का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर लिया।

पंजाब का विलय 1849 –

1846 में मुल्तान के गवर्नर मूलराज के साथ किए गए व्यवहार के कारण पंजाब में अंग्रेजों के खिलाफ सर्वत्र विरोध हो रहा था। डलहौजी ने 1849 में युद्ध के द्वारा इस विरोध को कुचल दिया और पंजाब का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया था। 

लोअर बर्मा (पीग का राज्य) का विलय 1852 –

यन्दाबू की संधि (1826) के पश्चात् बहुत से अंग्रेज व्यापारी बम के दक्षिण तट और रंगुन में बस गए थे बर्मा के राजा ने अंग्रेजों से उनकी आशाओं के अनुकूल व्यवहार नहीं । लॉर्ड डलहौजी ने बर्मा पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने के लिए अपने “फॉक्स” नामक युद्ध पोत के अफसर कॉमेडोर लेम्बर्ट को रंगून भेजा। लेम्बर्ट ने बर्मा के राजा का एक पोत पकड़ लिया और अंग्रेजों और बर्मा के महाराजा के मध्य युद्ध हुआ। युद्ध में बर्मा का राजा हार गया। 20 दिसम्बर 1852 की घोषणा के द्वारा लोअर बर्मा का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय  हुआ। 

इसके बारेमें भी पढ़िए :- पृथ्वीराज चौहान की जीवनी

गोद प्रथा निषेध नीति की समीक्षा

इस नीति को हड़प नीति के नाम से भी जाना जाता है। नैतिक मूल्यों पर यह नीति सही नहीं थी। यह न्यायिक और निष्पक्ष नहीं थी। परंतु लॉर्ड डलहौजी ने ब्रिटिश साम्राज्य को मजबूत और बड़ा बनाने के लिए इसका प्रयोग किया। यह नीति स्वार्थ से भरी हुई थी। इस नीति का यह परिणाम निकला कि सन 1857 में भारत में क्रांति की शुरुआत हो गई। अंत में अंग्रेजों को भारत छोड़कर जाना पड़ा।

लॉर्ड डलहौजी ध्वारा रेलवे का प्रारम्भ –

भारत में रेलवे की नींव डालने वाला डलहौजी ही था। भारत मे उसके लक्ष्य विशाल राज्य की रक्षा हेतु तीव्र साधन चाहिए थे। भारत के सभी भागो मे बसी सैन्य छावानियों हेतु संचार का तीव्र और सस्ता साधन चाहिए था। ब्रिटेन का माल बेचने हेतु, भारत से कच्चा माल निकालने हेतु आधुनिक यातायात जरूरी था ताकि इस उपनिवेश से अधिकतम लाभ उठाया जा सके। इस वक्त तक ब्रिटेन वित्तीय पूँजी के काल मे प्रवेश कर चुका था उसके पूँजीपती पूँजी निवेश का लाभदायक स्थान चाहते थे।

जो भारत मे मिल गया उनकी पूँजी पर 5 % लाभ की गारंटी दी गयी थी इस से भारत तो गरीब हुआ लेकिन ब्रिटेन अमीर हो गया। रेलवे का विकास करने से ब्रिटेन के लोहा इस्पात उधोग को भारी मात्रा मे काम मिला उनके इंजन उद्योग, ठेकेदारी फर्मों को भारी लाभ हुआ।प्रशासन के निरीक्षण हेतु भी यातायात के साधन चाहिए थे।

लॉर्ड डलहौजी ने उपाधियों और पेन्शनों को बंद किया –

1853 में कर्नाटक के नवाब की मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारियों को पेन्शन देने से मना कर दिया गया। 
इसी प्रकार 1853 में पेशवा बाजीराव की मृत्यु के बाद उसके दत्तक पुत्र नाना साहिब को पेन्शन देने से मना कर दिया गया। 
1856  की साल में अवध का विलय हुआ अवध जैसे प्रदेशों में व्यपगत का सिद्धांत लागू न हो सका तो डलहौजी ने “अच्छे प्रशासन” की आड़ में अवध का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर लिया। 
इस संबंध में देशी राजाओं का विचार था कि उनके प्रदेश केवल व्यपगत सिद्धांत के कारण ही नहीं वरन् “नैतिक व्यपगत” के कारण भी ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिए गए हैं। 

लॉर्ड डलहौजी द्वारा किये गए सुधार – 

सुधार कार्य :

अपने प्रशासनिक सुधारों के अन्तर्गत लॉर्ड डलहौज़ी ने भारत के गवर्नर-जनरल के कार्यभार को कम करने के लिए बंगाल में एक लेफ्टिनेंट गर्वनर की नियुक्ति की व्यवस्था की। उन नये प्रदेशों, जिन्हे हाल में ही ब्रिटिश साम्राज्य में मिलाया गया था, के लिए डलहौज़ी ने सीधे प्रशासन की व्यवस्था की, जिसे ‘नॉन रेगुलेशन प्रणाली’ कहा गया। इसके अन्तर्गत प्रदेशों में नियुक्त कमिश्नरों को प्रत्यक्ष रूप से गर्वनर जनरल के प्रति उत्तरदायी बनाया गया।

सैन्य सुधारों के अन्तर्गत डलहौज़ी ने तोपखाने के मुख्यालय को कलकत्ता से मेरठ स्थानान्तरित किया और सेना का मुख्यालय शिमला में स्थापित किया। यह सब कार्य डलहौज़ी ने 1856 ई. में किया। डलहौज़ी ने सेना में भारतीय सैनिकों की कटौती एवं ब्रिटिश सैनिकों की वृद्धि की। उसने पंजाब में नई अनियमित सेना का गठन एवं गोरखा रेजिमेंट के सैनिकों की संख्या में वृद्धि की।

इसके बारेमें भी पढ़िए :- राजा रणजीत सिंह की जीवनी

लॉर्ड डलहौजी द्वारा प्रशासनिक सुधार –

गवर्नर जनरल के कार्यभार को हल्का करने के लिए लॉर्ड डलहौजी ने बंगाल में एक लेफ्टिनेंट गवर्नर की नियुक्ति की.कम्पनी द्वारा प्राप्त किए गए नवीन प्रदेशों में “नॉन रेग्यूलेशन पद्धति” को लागू किया गया। इस पद्धति के अनुसार प्रत्येक नए प्रदेश में एक कमिश्नर नियुक्त किया गया.कमिश्नर सीधे गवर्नर जनरल के प्रति उत्तरदायी होता था.

लॉर्ड डलहौजी द्वारा सैनिक सुधार –

साम्राज्य में निरन्तर होते विस्तार को देखते हुए सैन्य व्यवस्था में भी सुधार किए गए.बंगाल तोपखाने का मुख्य कार्यालय कलकत्ता से मेरठ में स्थानांतरित किया गया.1865 में शिमला में एक सैन्य मुख्यालय स्थापित किया गया।  सेना में तीन और रेजिमेंटें बनाई गई.पंजाब में एक नई अनियमित सेना का गठन किया गया.यह सेना सीधे पंजाब प्रशासन के अधीन थी.इस सेना की परिपाटी और अनुशासन भी भिन्न था.

शैक्षणिक सुधार –

डलहौजी के शासन काल में शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण सुधार हुए.1853 में टामसन की व्यवस्था के अनुसार समस्त उत्तर-पश्चिमी प्रान्त (आधुनिक उत्तर प्रदेश), लोअर बंगाल और पंजाब में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार भारतीय भाषाओं में शिक्षा का प्रस्ताव स्वीकार किया गया।  जुलाई, 1854 में सर चार्ल्स वुड ने भारत सरकार को शिक्षा की एक नई योजना भेजी थी। 

इस योजना के अनुसार प्राथमिक शिक्षा से लेकर विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा के लिए एक व्यापक योजना बनाई गई | इसके अलावा इस योजना के अनुसार जिलों में एंग्लो-वर्नेक्यूलर स्कूलों, प्रमुख नगरों में सरकारी कॉलेजों तथा तीनों प्रेजिडेन्सी नगरों में एक-एक विश्वविद्यालय की स्थापना का भी प्रावधान था। 

रेलवे विभाग –

भारत में सर्वप्रथम लार्ड डलहौजी के काल में 1853 में प्रथम रेलवे लाइन बम्बई से थाना तक बिछाई गई.अगले ही वर्ष कलकत्ता से रानीगंज कोयला क्षेत्र तक एक लाइन बिछाई गई.भारत में रेलवे लाइन बिछाने के काम में सरकार का नहीं वरन्, ब्रिटिश पूंजीपतियों का पैसा लगा हुआ था। 

विद्युत तार –

लार्ड डलहौजी को भारत में विद्युत तार का प्रारंभकर्ता माना जाता है.1852 में विद्युत तार विभाग के अधीक्षक के पद पर नियुक्त किए गए.ओ. औंघनैसी के अथक प्रयासों से लगभग 4000 मील लम्बी तार लाइन बिछा दी गई.जिससे कलकत्ता से पेशावर बम्बई और मद्रास तक देश के विभिन्न भागों को तार द्वारा मिला दिया गया.

डाक सुविधा –

आधुनिक डाक व्यवस्था का आधार लार्ड डलहौजी के शासन काल में रखा गया था.1854 में एक नया डाकघर अधिनियम पारित किया गया.सारे देश में कहीं भी 2 पैसे की दर पर पत्र भेजा जा सकता था.देश में पहली बार डाक टिकटों का प्रचलन आरंभ हुआ था। 

इसके बारेमें भी पढ़िए :- द्रितीय विश्व युद्ध  की जानकारी हिंदी

सार्वजनिक निर्माण विभाग –

डलहौजी से पूर्व सार्वजनिक निर्माण का कार्य एक सैनिक बोर्ड को करना होता था.डलहौजी ने एक अलग सार्वजनिक निर्माण विभाग का गठन किया.सिंचाई कार्यों पर भी ध्यान दिया गया.8 अप्रैल, 1854 को सिंचाई हेतु गंगा नहर खोल दी गई.ग्राण्ड ट्रंक रोड़ का निर्माण कार्य भी प्रारंभ हुआ.

वाणिज्य-सुधार –

डलहौजी ने भारत के बन्दरगाहों को अन्तरराष्ट्रीय वाणिज्य के लिए खोल दिया.कराची, बम्बई और कलकत्ता के बन्दरगाहों का भी विकास किया गया

सामाजिक योगदान – 

सामाजिक भेदभाव जो जाति पर आधारित था रेलवे के आगमन के बाद काफी कमजोर हो गया[तथ्य वांछित], इस से एक नयी सामाजिक क्रांति पैदा होने लगी। रेलवे निर्माण के बाद ब्रिटिश पूँजी भारत मे लगी जिस ने रोजगार के नए अवसर पैदा किए थे अभी तक पिछड़े क्षेत्रो का विकास होने लगा था रेलवे ने ही कृषि का वाण्जियीकरण शुरू किया था। जूट, कपास, गन्ना, चाय, काफी, नील, अफीम आदि फसलें भारत के धन निकासी का नया स्रोत बन गई थी।

लॉर्ड डलहौजी का मूल्यांकन –

लॉर्ड डलहौजी को एक साम्राज्यवादी गवर्नर जनरल के रूप में याद किया जाता है। डलहौजी के कार्यों का निष्कर्ष तीन शब्दों में बताया जा सकता है।  वह विलय,संगठन और विकास थे। उसके विलय ने भारत के वर्तमान मानचित्र को बनाया। उसने रियासतों के विलय से आन्तरिक संगठन के कार्य को पूर्ण किया डलहौजी के विलय एवं विजयों से लगभग ढाई लाख वर्ग मील का क्षेत्र कम्पनी के अधीन आ गया था  विकास कार्यों के रूप में उसने रेलवे, नहरों एवं सार्वजनिक निर्माण की दूरगामी योजनाएं तैयार की थी। 

इसके बारेमें भी पढ़िए :- चंगेज खान की जीवनी

Lord Dalhousie death – लार्ड डलहौजी की मृत्यु 

कई कहते है की how lord dalhousie died तो इसको बतादे की  6 मार्च 1856 के दिन डलहौजी भारत से इंग्लॅण्ड अपने घर वापस गए ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने 5000 यूरो की पेंशन देना शुरू किया था लेकिन  1857 की साल में विप्लव हुआ ओर क्रान्ति हो गई इसमें निंदा और आरोपों से लड़खड़ाते हुए 1860 में डलहौजी का निधन होचुका था। 

Lord Dalhousie Biography And  History Video –

Lord Dalhousie Facts –

  • लॉर्ड डलहौजी की हड़प नीति से उसने अंग्रेज़ साम्राज्य का बहुत विस्तार किया था। 
  • गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी ने भारत की रियासतों को तीन भागों में विभाजित कर दिया था। 
  • लॉर्ड डलहौजी भारत में सबसे पहले रेलवे की स्थापना मुंबई और थाने के बिच की थी। 
  • गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी ने भारत दे निवृत हो करके एक साल ही जिन्दा रहा था। 
  • लॉर्ड डलहौजी भारत में सबसे पहले विद्युत तार ,डाक सुविधा,सार्वजनिक निर्माण विभाग का गठन और वाणिज्य-सुधार करने वाले है। 

Lord Dalhousie Questions –

लॉर्ड डलहौजी की मृत्यु कैसे हुई ? 
गवर्नर जनरल डलहौजी की मौत भारत से वापस लौट ने के बाद ही एक साल में एक गाय के बछड़े ने शिग उसके पेट में डालने की वजह से हुई थी। 
विलय नीति क्या है ?
किसी भी तरह से अपनी कम्पनी में कोई भी राज्य को मिला देना ही विलय नीति थी। 
लॉर्ड डलहौजी ने किस नीति का अनुसरण किया ?
हड़प निति का गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी ने अनुसरण किया था। 

लॉर्ड डलहौजी की विलय नीति की प्रमुख विशेषताएं क्या थी ?

युद्ध की नीति ,कुप्रशासन की नीति और व्यपगत का सिद्धांत लॉर्ड डलहौजी की विलय नीति थी। 
गवर्नर जनरल के रूप में लॉर्ड डलहौजी का कार्यकाल क्या था ?
1848-1856 तक भारत के गवर्नर-जनरल के रूप में लॉर्ड डलहौजी ने अपनी सेवाएं प्रदान की थी। 

इसके बारेमें भी पढ़िए :- प्रथम विश्व युद्ध की पूरी जानकारी

Conclusion –

दोस्तों आशा करता हु आपको मेरा यह आर्टिकल Lord Dalhousie Biography Information बहुत अच्छी तरह से समज और पसंद आया होगा। इस लेख के जरिये  हमने lord dalhousie policy और lord dalhousie reforms से सबंधीत  सम्पूर्ण जानकारी दे दी है अगर आपको इस तरह के अन्य व्यक्ति के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है तो आप हमें कमेंट करके जरूर बता सकते है। और हमारे इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द ।

Leave a Reply

error: Sorry Bro
%d bloggers like this: